- मनोज जोशी के चाणक्य के मंचन से सटीक संवादों और बेहतरीन अभिनय से रूबरू हुए दर्शक
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिस युद्ध में अनेकानेक छल प्रायोजित किए गए हो उस युद्ध को भारतवर्ष में धर्म युद्ध कहा गया है। राजा होना सुखी होने का मार्ग नहीं है स्मरण रहे। यह शिक्षक क्रांति करेगा पौरव नरेश। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की घटना पर केंद्रित चाणक्य नाटक उक्त संवाद को सुन दर्शक भी खो गए। नाटक की प्रस्तुति पद्मश्री मनोज जोशी की ओर से दी गई। नाटक के दौरान दर्शकों के भी चेहरे के भाव बदलते रहे। दिव्य सेवा मिशन मेरठ की ओर से रविवार को चौधर चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेता जी सुभाष चंद्र बोस सभागार में ज्वलंत ऐतिहासिक नाटक चाणक्य की प्रस्तुति दी गई।
अलेक्जेंडर को रोकने और भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए चाणक्य ने जो किया, चाणक्य के किरदार में प्रख्यात कलाकार एवं रंगकर्मी पद्मश्री मनोज जोशी ने दर्शकों को ढाई घंटे बांधे रखा। दिव्य सेवा मिशन के सेवा कार्यो को समर्पित इस नाटक में महानायक चाणक्य की कूटनीति को लोगों ने साउंड, लाइट इफेक्ट और कलाकारों के जीवंत अभिनय के माध्यम से देखा। नाटक में अपनी विद्वता से चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य से नंदवंश का नाश कराकर अखंड भारत का सपना पूरा किया। किरदारों के संवाद बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत कर दर्शकों पर अनोखा प्रभाव छोड़ा।

यह नाटक बताता है कि आज चाणक्य सदृश्य नीति नियंता की आवश्यकता है। हमें उसके कौटिल्य वाले पक्ष को समझने की आज अधिक जरूरत है और यह संदेश दिया गया कि राष्ट्र से महान कुछ नहीं होता है। स्वत्व…परिवार समाज, नागरिक, धन, संपदा…इत्यादि सभी राष्ट्र के सम्मुख द्वितीय श्रेणी में रहने वाले हैं। इतना ही नहीं बेहतरीन अभिनय, खूबसूरत मंच की साज-सज्जा और सटीक संवादों ने दर्शकों को पूरे समय बांधे रखा। चाणक्य की दूरदर्शिता, योजनाद्ध तरीके से कार्य का क्रियान्वयन और समर्पण को मंच पर मनोज जोशी ने बखूबी दर्शकों के सामने पेश किया।

पौराणिक कहानी के मंचन में आकर्षण का केन्द्र बिन्दू अभिनेता मनोज जोशी ही रहे। उनके सधे अभिनय और टाइमिंग को टीवी और फिल्मों की तरह थियेटर में दर्शकों का प्यार मिला। अक्सर हास्य भूमिकाओं में गुदगुदाने वाले मनोज जोशी जब भी चाणक्य के किरदार में आते हैं तो उनका अलग ही रूप दिखता है। कार्यक्रम के आयोजक दीपक शर्मा का इसमें बड़ा सहयोग रहा।
चाणक्य को कुछ ऐसा मानते हैं अभिनेता मनोज जोशी
एक्टर मनोज जोशी इस समय अपने नाटक ह्यचाणक्यह्ण के मंचन को लेकर मेरठ आए। मनोज जोशी ने कहा कि चाणक्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने मध्ययुग में थे। आज भी उनके विचार अगर कोई अपने जीवन में अपना लें तो उसका कल्याण हो जाए। आज दुनिया के कई देशों में ह्यचाणक्यह्ण पढ़ाया जाता है, लेकिन हमारे देश में उसकी कोई कद्र नहीं है। मनोज जोशी ने माना कि वर्तमान राजनीति में चाणक्य और चन्द्रगुप्त के रास्ते पर लोग चल रहे हैं।

