Friday, March 20, 2026
- Advertisement -

युद्ध की बदलती तकनीक

19 3

विश्व के सैकड़ों देशों के पास अपनी भूमि की रक्षा के लिए सेना है, हथियार हैं और उनके नियंत्रण के लिए एक सरकार है। बीसवीं शताब्दी तक दो या अधिक देशों के मध्य युद्ध एक परंपरागत तरीके से लड़ा जाता था जिसमें युद्धक विमान, युद्धपोत, पनडुब्बी, तोप, टैंक, राकेट और राइफल इस्तेमाल किए जाते थे और युद्ध हारे जीते जाते थे।? ईराक, लीबिया, अफगानिस्तान की लड़ाई तक ऐसा ही होता आया और तकनीक में कोई बहुत ज्यादा परिवर्तन देखने को नहीं मिला।

इक्कीसवीं शताब्दी में प्रवेश करने के साथ ही विश्व के प्रभावशाली देशों ने उपग्रह, इलेक्ट्रोनिक वारफेयर सिस्टम, सैटेलाइट ओरियंटेड इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, अवाक्स राडार सिस्टम, बीवीआर (बियोंड विज्युअल रेंज मिसाइल), स्टील्थ तकनीक, द्रोण तथा हाइपर सोनिक और क्रुज मिसाइलों पर ध्यान देना आरंभ किया और यहीं से युद्ध की पूरी परिभाषा और तकनीक ही बदल गई। अब ना फाइटर जेट्स, विमानवाहक पोत और पनडुब्बी की बहुत ज्यादा अहमियत रह गई और ना पैदल सेना की। चीन, अमेरिका, रूस, इस्राइल और ईरान ने इस क्षेत्र में बहुत ज्यादा काम किया हालांकि फ्रांस, भारत और उत्तरी कोरिया भी कोई ज्यादा पीछे नहीं रहे।

युद्ध विज्ञान के जिस भाग पर जो सबसे ज्यादा काम हुआ वह है पिन प्वाइंट टारगेटेड हाइपरसोनिक, बैलास्टिक एवं क्रुज मिसाइलों का निर्माण। इन मिसाइलों की विभिन्न रेंज के द्वारा घर बैठे ही शत्रु देश के सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण नेताओं पर उपग्रह तथा राडार सर्विलांस के माध्यम से टारगेट फिक्स किया जाता है और दागो और भूल जाओ वाले भाव से काम तमाम कर दिया जाता है। ये मिसाइलें युद्धपोत और जमीन से तो चलाई ही जाती हैं साथ ही बगैर शत्रु की सीमा में प्रवेश किए अपने ही एरिया में उड़ते फाइटर जेट्स के द्वारा भी चलार्इं जा सकती हैं। यही कार्य छोटे-छोटे सस्ते द्रोण भी करने लगे हैं, जिन पर लगी चिप में शत्रु टारगेट को फिक्स करके विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ये द्रोण ठीक टारगेट पर जाकर ही हिट करते हैं। एक अन्य सफल तकनीक अब यह आ गई है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक ध्वनि, किरण, तरंग और कूट संदेश भेजकर दुश्मन के विमानों के राडार और सुरक्षा प्रणाली को भ्रमित करके उन्हें नष्ट कर दिया जाता है और मिसाइलों की दिशा उल्टी कर दी जाती है। चीन ने इस सिस्टम पर बहुत ज्यादा कार्य किया है जिसका एक नमूना दुनिया ने 2025 में भारत पाक के मध्य संयुक्त झड़प में देखा था और अब कतर में तीन अमेरिकी एफ 18-35 विमानों के नष्ट होने में भी देखा।

अब एक सम्पूर्ण युद्ध में तकनीकी आयाम कैसे बदलते हैं और समूचा विश्व जिसे देखकर हतप्रभ है उसकी चर्चा कर लेते हैं। 28 फरवरी 2026 को इस्राइल और अमेरिका ने एक संयुक्त अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता खामनई तथा लगभग चालीस टॉप नेताओं और कमांडर्स को मार डाला। यह कार्य सैटेलाइट सर्विलांस, मानवीय जासूसी, फाइटर जेट और बंकर नाशक बम के संयुक्त एवं सटीक उपयोग से किया गया जो अपने आपमें एक बहुत बड़ा तकनीकी आश्चर्य था। यही कार्य उन्होंने अभी दो अन्य बड़े कमांडर्स लारीजानी और सुलेमानी को मारकर दोहराया है। अब ईरान की बारी थी। संभावना के विपरीत जाकर ईरान ने अपनी एक से बढ़कर एक बेमिसाल मिसाइलों से खाड़ी में स्थित अमरीकी सैन्य ठिकानों के साथ साथ संपूर्ण इस्राइल को नष्ट भ्रष्ट करना आरंभ कर दिया और उसके द्रोण हथियारों ने अब्राहम लिंकन और जार्ज बुश जैसे विशालकाय विमानवाहक पोतों की गरिमा और धाक को मटियामेट कर दिया। उसकी मिसाइलों की मारकता और सटीकता ने उसके मित्रों और शत्रुओं दोनों को आश्चर्यचकित कर दिया। जिस आयरन डोम सुरक्षा का ढोल इजरायल पीटा करता था वो हवा हवाई हो गया और ईरान इस्राइल के हर हिस्से पर वार करने लग गया।

क्लस्टर बम के आने के बाद अब टैंकों का जमाना लद गया है। पैदल सेना पर मिसाइलों और विमानों से क्लस्टर बमों को बरसाकर उन्हें हताहत किया जा सकता है। तोपखाने की जगह अब मल्टी माउथ मल्टी आरगेन राकेट लांचर प्रयोग में लाये जा रहे हैं जिनका प्रहार अपेक्षाकृत अधिक घातक होता है। पैदल सेना का उपयोग अब विमानों और मिसाइलों द्वारा वीरान कर दिए गए क्षेत्र या पहाड़ी क्षेत्रों पर कब्जा जमाने के लिए ही किया जाएगा। अब किसी भी युद्ध में सफलता प्राप्त करने के लिए अपने स्वयं के मिलिट्री सर्विलांस और जासूसी उपग्रह होने आवश्यक हैं। केवल इन्हीं के द्वारा ना केवल दुश्मन के ठिकानों और उसकी हरकतों पर सटीक और त्वरित निगाह रखी जा सकती है अपितु टारगेट फिक्स करने के लिए और दुश्मन के विमानों तथा मिसाइलों के मूवमेंट को जानने के लिए भी इन उपग्रहों की सहायता बेहद आवश्यक है। ईरान चीनी तथा रूसी उपग्रहों की सहायता से ही विरोधियों के ठिकानों पर सटीकता से वार करने में कामयाब हो रहा है। यूक्रेन को भी नाटो देशों के उपग्रहों से मदद मिल रही है।

आधुनिक युद्ध में दुश्मन के हवाई वार को अब विमान रोधी तोपों से या राकेटों से रोकने का जमाना नहीं रहा। अब अत्यंत ही आधुनिक वायुरक्षा प्रणाली आ गई हैं जिनमें एक अल्ट्रा सेंसेटिव राडार और निर्देशित मिसाइलें लगी रहतीं हैं जो स्वत: ही दुश्मन की हलचल देखकर सक्रिय हो जाती है और टारगेट फिक्स कर लेती है। रूसी एस 400, अमरीकी थाड, चीनी एफ 9 , इजरायली आयरन डोम और भारत का आकाश और रुद्र सिस्टम इस मामले में प्रभावी सिस्टम कहे जा सकते हैं। दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली तथा इसके विमानों के राडार सिस्टम को अपने इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से ठप्प कर देना यानी कि उन्हें अंधा बना देना भी आज के युग में एक बड़ी कामयाब तकनीक आ गई है।

ईरान में अमेरिका और इस्राइल ने अपने विमानों से जो बड़ा नुकसान किया है उसका एक बड़ा कारण ईरान के पास किसी मजबूत वायु रक्षा प्रणाली का ना होना और मिग 29 जैसे पुराने पड़ चुके विमानों पर निर्भर होना रहा है। ईरान की सारी तैयारी केवल प्रति आक्रमण की रही है जबकि उसे अपने रक्षण के लिए भी तैयारी करनी थी। अब जो नई युद्ध कला क्रांति आ रही है उसका एक मजबूत हथियार है सुगठित सूचना युद्ध जिसमें सोचे समझे वक्तव्य देकर और आक्रामक घोषणाएं करके ना केवल दुश्मन और उसके समर्थकों को भ्रमित एवं कुंठित किया जाता है अपितु इसके पीछे अपनी कमजोरियां भी छिपार्इं जाती हैं। इसी सूचना युद्ध में कूटनीतिक युद्ध भी शामिल रहता है जहां विश्व के तटस्थ देशों को अपने नैतिक या सक्रिय पक्ष में लाने का प्रयास करके दुश्मन पर एक मनोवैज्ञानिक जीत दर्ज की जाती है। अमरीका इस मामले में मास्टर है। ईरान, भारत, रूस , पाकिस्तान , फिलिस्तीन आदि देश इस मामले में इतने सफल नहीं हैं।

ईरान के कमजोर ना पड़ने से दुनिया के देश आश्चर्यचकित हैं और इस पर बारीकी से निगाह रखे हुए हैं, ताकि इसकी विशेषताओं और खामियों से वे भी कुछ सबक लें सकें और सीख सकें।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

चंदन, वंदन और जोरदार अभिनंदन

लोकतंत्र भी हिन्दी फिल्मों की तरह है। हिन्दी फिल्में...

एलपीजी पर पैनिक होने की जरूरत नहीं

विरोध के नाम विरोध या सत्ता के लालच में...

LPG: ‘अपने सिलिंडर की डिलीवरी पर भरोसा रखें, अफवाहों पर नहीं’- पेट्रोलियम मंत्रालय

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव...

UP: युद्ध ने यूपी डिफेंस सेक्टर को दिया बूस्ट, बाजार दोगुना होने की उम्मीद

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष...
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here