- पेड़ों के कटान की पोल खुलने से आलाधिकारियों में है बेचैनी का आलम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा चौधरी चरण सिंह गंगनहर कांवड़ पटरी मार्ग का निरीक्षण करना यहां के अधिकारियों की नींद उड़ा गया। लोक निर्माण विभाग और वन विभाग के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों में भी बेचैनी है। इसकी वजह मुख्य सचिव के निरीक्षण में अत्याधिक पेड़ों के कटान की पोल खुलना और उसपर मुख्य सचिव का भड़क जाना व उनके द्वारा सजा मिलेगी कहना है। मुख्य सचिव के तल्ख तेवर के बाद से कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
गौरतलब है कि गाजियाबाद के मुरादनगर से हरिद्वार के मंगलौर तक 122 किलोमीटर लंबे चौधरी चरण सिंह गंग नहर कांवड़ पटरी मार्ग की दायी पटरी पर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। सात मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस सड़क निर्माण के लिए 1.12 पेड़ों के कटान की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन पीडब्लूडी व वन विभाग के अधिकारियों पर वन माफिया से मिलकर लाखों पेड़ काटने का आरोप लगाते हुए सरधना के विधायक अतुल प्रधान ने वन विभाग से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक शिकायत की।
इसके अलावा मुख्यमंत्री तक शिकायत की गई। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने एनजीटी का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद उन्होंने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया। बुधवार को प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने अगले वर्ष हरिद्वार में होने वाले कुुंभ की तैयारियों को लेकर कई मंडलों के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसके बाद उन्होंने मुरादनगर से लेकर दुल्हेड़ी तक निर्माणाधीन सड़क का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने कई स्थानों पर अत्याधिक पेड़ों का कटान पाया तो वह भड़क गए थे।
उन्होंने अधिकारियों से पेड़ों के कटान और कटान को छुपाने के लिए चंद गड्ढों में नए पेड़ रखने की वजह पूछी थी। ठेकेदार द्वारा पेड़ों की शिफ्टिंग की बात कही थी। यह सुनकर मुख्य सचिव ने सजा देने की बात कही थी। इस निरीक्षण के बाद से कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। मुख्य सचिव निरीक्षण के बाद से ही यहां लोक निर्माण विभाग, वन विभाग के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों की भी नींद उड़ गई। कुछ अधिकारियों ने तो गुरुवार को लखनऊ तक संपर्क किया।

