
बाल-विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, अपितु यह देश के आर्थिक विकास को भी प्रभावित करता है। आर्थिक विकास के विश्लेषण के लिए ऐतिहासिक, संस्थागत, सामाजिक, सांस्कृतिक, जनसांख्यिकीय, राजनीतिक और पारिस्थितिक कारक बहुत महत्वपूर्ण हैं। विकास की अवधारणा अकेले आर्थिक विकास की अवधारणा से कहीं अधिक व्यापक है। विकास में स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रौद्योगिकी या जीवन-प्रत्याशा जैसे विभिन्न प्रकार के सामाजिक संकेतकों में व्यापक परिवर्तन शामिल हैं, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक परिवर्तनों से जुड़े हैं। देश के अधिकांश राज्यों में, कुछ अपवादों को छोड़कर, सभी समुदायों में विवाह संबंधों में लगभग तीन तिहाई से भी ज्यादा हिस्सा बाल-विवाह का होता है।