Friday, March 20, 2026
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खाने में विविधता पसंद करते हैं बच्चे

सोनी मल्होत्रा

आजकल अधिकतर अभिभावकों को अपने बच्चे से एक परेशानी है कि वह खाने में बहुत चूजी है। घर का खाना तो बच्चा खाना ही नहीं चाहता। मुश्किल से दो-तीन चीजें ही उसकी पसंद की हैं। कुछ खाता ही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर बच्चा स्वस्थ है, एक्टिव है, उसका वजन सामान्य है तो अभिभावकों को चिंता करने की जरूरत नहीं। बच्चे की भूख उसकी उम्र, उसकी चयापचय क्रिया पर निर्भर करती है और हर बच्चे की भूख में भिन्नता होती है इसलिए कभी भी यह मत देखें कि उसका बच्चा इतना अधिक खाता है और मेरा बच्चा इतना कम।

हां, जहां तक बच्चे की भोजन की आदतों का प्रश्न आता है तो वह स्वस्थ होनी बहुत आवश्यक है। यहां मुश्किल यह पेश आती है कि बच्चे आजकल दालों, सब्जियों की बजाय जंक फूड पसंद करते हैं और इसके लिए सबसे जरूरी है कि अभिभावकों को इस बात का ज्ञान होना कि बच्चे को किस उम्र में किस प्रकार का भोजन चाहिए होता है, उसके लिए कौन से खाद्य़ पदार्थ अच्छे हैं। तभी वह उसे सही खान-पान की आदतें डाल सकेंगे।

बच्चे को 4-5 महीने की उम्र में स्वाद की पहचान प्रारंभ हो जाती है और उसी उम्र से उसमें सही आदतों का विकास भी प्रारंभ हो जाना चाहिए। बच्चे को चावल से बने भोज्य पदार्थ,मैश सब्जियां आदि तभी से प्रारंभ कर देने चाहिए। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है उसे कई और भोज्य-पदार्थों का स्वाद पता चलता है पर बच्चे को भोजन के पोषक तत्वों का ज्ञान नहीं होता। उनके लिए उस समय स्वाद का अधिक महत्व होता है और वह प्रतिदिन रोटी-सब्जी के स्थान पर विविधता की मांग करते हैं। आइए जानें आप उनकी यह मांग किस प्रकार पूरी कर सकते हैं।

बच्चे की पसंद को समझें। अगर आपका बच्चा भरवा पराठे पसंद कर रहा है तो आपको उसे वह देने में कोई परेशानी नहीं लेकिन ऐसा नहीं कि रोज आलू का ही पराठा देते रहे। कभी उसे पनीर का, कभी हरी सब्जियों जैसे मेथी, पालक, पिसी दाल आदि का पराठा दें ताकि बच्चे को प्रोटीन भी मिलता रहे और उसे स्वाद में भी भिन्नता मिले। अगर वह ब्रेड अधिक पसंद करता है तो उसे कभी टमेटो सैंडविच, कभी वैजिटेबल आदि अलग वैरायटी पेश करें।

बच्चे को अधिक स्नैक्स खाने की आदत मत डालिए। इससे बच्चा ढंग से खाना नहीं खाएगा। दिन में एक-दो बार ही स्नैक्स दें और वह भी पोषक तत्वों से युक्त। बच्चे को तीन समय भोजन करने की आदत डालिए। बच्चे को जबरदस्ती खाना खिलाने की कोशिश न करें। इससे अभिभावक अपना ही नुकसान करते हैं। बच्चा हर चीज में नखरे करने लगता हैं, इसलिए यह चिंता न करें कि बच्चा भूखा रहेगा। भूख लगने पर बच्चा खुद ब खुद कुछ खाएगा।

भोजन में नई चीजों को जोडे़ं। एक ही तरह का भोजन बच्चे को कभी न परोसें। कभी चावल, कभी रोटी, कभी ब्रेड आदि चीजें बच्चे को परोसें। आप अगर नाश्ते में हमेशा परांठे ही खाते हैं तो उसमें परिवर्तन लाएं। बच्चे स्वाद को महत्व देते हैं इसलिए भोजन की रूपरेखा बदलें। उन्हें गर्निश करें जिससे बच्चे को भोजन आकर्षक लगे। अगर आप रेस्टोरेंट,होटल में भोजन करते हैं तो आपने ध्यान दिया होगा कि वहां भोजन बनाने में उतनी मेहनत नहीं की जाती जितनी परोसने में। इसीलिए बच्चे को वह आकर्षक लगता है। आप भी थोड़ी मेहनत करिए।

भोजन करते समय आपके डायनिंग टेबल का माहौल अच्छा व खुशनुमा होना चाहिए। आप कितने भी व्यस्त क्यों न रहते हों पर इकट्ठे बैठ कर भोजन करें। बच्चे से उसकी दिनचर्या व उसके अनुभव शेयर करें। इससे बच्चा भी एंजाय करते हुए भोजन करेगा।

बच्चा दूसरे बच्चों के साथ मिलकर अच्छी तरह से खाता है इसलिए आपने नोट भी किया होगा कि आपका बच्चा दूसरों के घर जाकर ठीक ढंग से खाना खाना है और अपने घर में नखरे करता है। आप अपने घर में छोटी-छोटी पार्टी करते रहें और अपने बच्चे के दोस्तों को न्योता देते रहें। कई बार अभिभावक अपने बच्चे को समय न देने की भरपाई उसे चाकलेट, टॉफी आदि देकर करते हैं और धीरे-धीरे ये बच्चे की पसंद बन जाते हैं और वह स्वयं इनकी मांग करने लगता है।
ऐसा करके अभिभावक बच्चे में स्वयं गलत आदतें डालते हैं। ऐसा न करके बच्चे को समय देकर उसे पौष्टिक आहार खिलाकर उन्हें उनकी जिदंगी का अमूल्य उपहार अच्छा स्वास्थ्य दें।

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