Thursday, April 25, 2024
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जानलेवा बनता चाइनीज मांझा

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Samvad


ashok bhatiyaहमें केवल चीन से ही नहीं चीनी मांझे से भी दूर रहना है। 14 जनवरी को मकर संक्राति है। मकर संक्रांति तिल गुड़ की मिठास के साथ पतंगबाजी के उत्साह से भरा पर्व है। इस पर्व पर पतंग उड़ाने की परंपरा है। पूरा बाजार पतंगों से पटता जा रहा है। ऐसे में आप भी पतंग उड़ाने की पूरी तैयारी कर चुके होंगे। ये आप भी जानते हैं कि कैसे देश वासियों में पतंग उड़ाने का जुनूनी शौक है। देश में कैसे मकर संक्राति के मौके पर पूरा आसमान विभिन्न आकारों की रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है, महाराष्ट्र में तो अभी से लेकर जनवरी तक यह शौक फरमाया जाता है। ये किसी भी छिपी नहीं है। पतंगबाजी का यह शौक आज इसलिए खतरनाक होता जा रहा है क्योंकि पतंगबाज चीनी मांझा का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह मांझा न सिर्फ पतंग बल्कि लोगों की जिंदगी भी डोर भी काट रहा है। पिछले कुछ सालों में कई ऐसे हादसे हुए हैं, जिनमें चीनी मांझे से लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, कई की जान भी गई है।

चाइनीज मांझा न सिर्फ इंसानों के लिए बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी बहुत खतरनाक है और हर साल सैकड़ों पक्षी इसमें फंसकर अपनी जान गंवा देते हैं। आज भारत समेत दुनिया के कई देशों में पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, लेकिन पतंगबाजी का सबसे पुराना प्रमाण चीन में मिलता है। हान राजवंश के शासनकाल में पतंगों का सैन्य उपयोग भी होता था।

वहां के सैन्य कमांडरों ने दुश्मन सेना की स्थिति और दूरी का पता लगाने के लिए पतंगों का भी इस्तेमाल किया। कहा जाता है कि पतंगबाजी भी चीन के रास्ते भारत पहुंची है। अब आपके मन में भी यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर यह मांझा इतना खतरनाक क्यों है और एक पतला धागा लोगों की जान कैसे ले सकता है? इसका कारण यह है कि पतंगबाजी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सामान्य मांझा कपास का बना होता है, लेकिन चीनी मांझा नायलॉन और अन्य सिंथेटिक सामग्री से बना होता है। यह मांझा कांच, लोहे के पाउडर और कई अन्य रसायनों के साथ लेपित है। इस वजह से मांझा और भी तीखा और जानलेवा हो जाता है।

चाइनीज मांझा साधारण मांझा की जगह स्ट्रेचेबल होता है यानी टूटने की बजाय खिंचता रहता है। इतना ही नहीं चीनी मांझा में धातु के चूर्ण के प्रयोग से यह विद्युत का सुचालक होता है, अर्थात इसमें से करंट प्रवाहित हो सकता है और इसलिए बिजली के झटके का खतरा रहता है, लेकिन इसके खतरों से वाकिफ होने के बावजूद आज बाजार में इसकी काफी मांग है, क्योंकि जब लोग पतंग उड़ाते हैं तो चाहते हैं कि उनकी पतंग न कट जाए और वे दूसरों की ज्यादा से ज्यादा पतंगें काट सकें।

साल 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस मांझा पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। पर्यावरण विभाग के तहत 10 जनवरी 2017 को एक अधिसूचना जारी की गई थी, जिसके अनुसार पतंगबाजी के लिए नायलॉन, प्लास्टिक और किसी भी तरह की सिंथेटिक सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके अलावा कांच, धातु या अन्य नुकीली चीजों से बने धागों पर भी पतंग उड़ाने पर रोक लगा दी गई है।

नियम के मुताबिक, सूती धागे से बने धागों से पतंग उड़ाई जा सकती है, लेकिन इनमें भी किसी न किसी तरह का धागा होता है, तेज वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इन नियमों का उल्लंघन कड़ी सजा के साथ दंडनीय है। अगर कोई ऐसा करते पाया जाता है तो उसे 5 साल तक की कैद और एक लाख रुपये तक के जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है।

इतने सख्त नियम होने के बावजूद आज देश भर में में चीनी मांझा का कारोबार फलफूल रहा है। व्यवसायी कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं और इन घातक मांझा को लोगों को बेच रहे हैं, और खरीदने वालों की कोई कमी नहीं है। मांझा के व्यापारी पुलिस को चकमा देने के लिए हाईटेक तरीके अपना रहे हैं और इसके लिए फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह मांझा इतना खतरनाक होता है कि अगर तेज रफ्तार से चलने वाला व्यक्ति इसकी चपेट में आ जाए तो यह न केवल त्वचा या नसों को बल्कि उसकी मांसपेशियों को भी काटकर हड्डियों तक पहुंच सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद चीनी मांझे के पीड़ितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

जानकारों की मानें तो अब मांझा चीन से नहीं बल्कि तेज धार के साथ इंडिया में ही बन रहा है। यह मांझा प्लास्टिक का बना होता है। काफी मजबूत है। चाइनीज मांझे को मेटलिक कोटिंग से तैयार किया जाता है। चाइनीज मांझे की कई वैरायटी बन रही हैं। इसे बनाने में अधिकतर केमिकल और अन्य धातुओं का इस्तेमाल हो रहा है। इनमें शीशा, वज्रम गोंद, मैदा, एल्युमीनियम आॅक्साइड और जिरकोनिया आॅक्साइड शामिल है। इन सभी चीजों के मिक्स होने पर तेज धार वाला चाइनीज मांझा तैयार होता है।

यह आसानी से टूटता नहीं है। इसमें ब्लेड जैसी धार होती है। वैसे बाजार में मिलने वाले सभी मांझे घातक होते हैं, लेकिन इनमें चाइनीज मांझा सबसे खतरनाक साबित है। पुलिस हर साल समय समय पर मांझे को लेकर नोटिफिकेशन जारी करती है। जहां भी बिक्री होती है, पुलिस एक्शन लेती है। चूंकि पतंग कटने के बाद हवा में उड़ता हुआ मांझा हादसे की वजह बनता है।

ऐसे में पुलिस के सामने पतंग उड़ाने वाले का पता करना बड़ी चुनौती होती है। मकर सक्रांति के अवसर पर कई राज्यों में लोगों की मौत की खबरें भी सामने आई थीं। इसके बाद राज्य सरकार ने चाइनीज मांझे की बिक्री और खरीद पर रोक लगा दी थी। इस बार भी राज्य सरकार ने मकर संक्रांति के अवसर पर चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगा दी है।


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