Thursday, March 5, 2026
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सिनेमाघरों का अस्तित्व खतरे में, अधिकांश में लगे ताले

  • कोरोना के कारण सात माह से बंद के अलावा दर्शकों की संख्या न के बराबर
  • नई फिल्में रिलीज न होने और पुरानी फिल्मों के प्रति मोह टूटना भी कारण

ज्ञान प्रकाश |

मेरठ: कोरोना ने जहां बिजनेस को बुरी तरह से प्रभावित किया वहीं एकल स्क्रीन वाले सिनेमाघरों का अस्तित्व ही खतरे में लाकर खड़ा कर दिया। हालात यह हो गए हैं कि मेरठ में इस समय एक दो सिनेमाघरों को छोड़कर सभी सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों पर ताला पड़ गया है।

इसके पीछे सिनेमाघर संचालकों का मानना है कि एक तो कोरोना और दूसरे ओटीटी पर फिल्म उपलब्ध होने के कारण लोगों ने सिनेमाघरों में जाना छोड़ दिया। इस कारण आर्थिक घाटे के कारण सिनेमाघर बंद होते चले गए।

घंटाघर स्थित मेनका सिनेमाघर अपने समय के अच्छे सिनेमाघरों में गिना जाता था। इसमें एक से बढ़कर एक हिट फिल्में रिलीज होने के कारण इस सिनेमाघर के प्रति लोगों का लगाव ज्यादा था। इस सिनेमाघर के बंद होने से पहले शहर का खूबसूरत ईव्ज सिनेमाहाल बंद हुआ और उसकी जगह पेट्रोल पंप खुल गया। फिल्मीस्तान, अजंतास, बंसल, नंदन, गुलमर्ग, आम्रपाली और निशात के बंद होने और अप्सरा की खराब हालत ने सिनेप्रेमियों के दिल तोड़ दिये।

सिनेमाघर शायद अब तक के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। कोरोना संकट के कारण सात महीनों तक बंद रहे सिनेमाघरों में से अधिकतर को खुले अब करीब पांच माह से ज्यादा गुजर गया है, लेकिन अब भी दो सिंगल स्क्रीन थिएटर, छोटे-बड़े मल्टीप्लेक्स सहित फिल्म एग्जिबिटर्स और वितरकों पर से बदहाली के बादल छटते नजर नहीं आ रहे हैं।

नई फिल्मों के रिलीज न होने की वजह से दर्शक भी सिनेमाघरों का रुख नहीं कर रहे हैं। हालांकि लंबे इंजार के बाद दीपावली के अगले दिन सूरज पे मंगल भारी रिलीज तो हुई, लेकिन मुट्ठीभर दर्शकों के आने से सिनेमाघर स्टाफ के चेहरे फिर से मुरझाते दिखे। इस लिहाज से मौजूदा हालात में सिनेमा कारोबार से जुड़े लोगों का सदमें में आना लाजमी है।

हालांकि एक तरफ नयी फिल्मों की आवक पर ब्रेक सा लगा हुआ है और दर्शक भी फिल्म देखने नहीं आ रहे हैं। सिनेमाघरों में पुरानी फिल्में ही दिखाई जाती रहीं, जिन्हें लेकर दर्शकों में रत्तीभर भी उत्साह नहीं था। तस्वीर का दूसरा पहलू ये भी है कि बड़े मल्टीप्लेक्स चेन, फिल्म वितरकों और निमार्ताओं के बीच मुनाफा प्रतिशत को लेकर मची नयी खींचतान और नई फिल्म के डिजिटल प्रसारण (सैटेलाइट एवं ओटीटी आदि) अवधि को कम करने (आठ हफ्ते से दो या चार हफ्ते करने) को लेकर शुरू हुई रार के बीच सिंगल स्क्रीन एवं छोटे मल्टीप्लेक्स वाले खुद को बेवजह पिस रहा मान रहे थे।

सिने एक्जीवीटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय गुप्ता का कहना है कि सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर आर्थिक संकट के कारण बंद हो गए हैं। इनको न केवल कम दर्शकों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है बल्कि कोरोना के बाद से नई फिल्में न आने के कारण लोग इन सिनेमाघरों में आना पसंद नहीं कर रहे हैं।

निशात सिनेमा के संचालक दीपक सेठ का मानना है कि ओटीटी के कारण फिल्में घर बैठे लोगों को देखने को मिल रही है। इसके अलावा दर्शकों की संख्या लगातार गिरती हुई न के बराबर हो गई है। ऐेसे में सिनेमाघरों को बंद होने से कोई नहीं रोक पा रहा है।

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