जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है उनका 5, कृष्णा मेनन मार्ग स्थित आधिकारिक बंगला, जिसे रिटायरमेंट के आठ महीने बाद भी खाली न करने को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को पत्र लिखकर बंगला तुरंत खाली कराने की मांग की है।
नियमों का उल्लंघन?
सरकारी नियमों के अनुसार, रिटायरमेंट के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश को अधिकतम छह महीने तक टाइप-7 बंगला में रहने की अनुमति होती है। लेकिन चंद्रचूड़ टाइप-8 बंगले में पिछले आठ महीने से रह रहे हैं, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की ओर से पहले अप्रैल 2025 तक की सीमा तय की गई थी, जिसे बाद में मौखिक रूप से मई 2025 तक बढ़ाया गया, लेकिन अब वह समय भी बीत चुका है।
क्या बोले चंद्रचूड़?
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा “मुझे अपनी जिम्मेदारियों का पूरा एहसास है। मेरी दो बेटियों को विशेष देखभाल की जरूरत है और उनके लिए उपयुक्त घर ढूंढना आसान नहीं था। सरकार ने जो घर किराए पर दिया है, उसकी मरम्मत जारी है। जैसे ही काम पूरा होता है, मैं बंगला छोड़ दूंगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को यह बात पहले ही बता दी थी और यह मामला व्यक्तिगत कठिनाइयों से जुड़ा है, न कि किसी जानबूझी गई अनदेखी से।
मुख्य न्यायाधीशों की अनोखी मिसाल
दिलचस्प बात यह है कि चंद्रचूड़ के रिटायरमेंट के बाद दो नए CJI — जस्टिस संजीव खन्ना और वर्तमान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई — दोनों ने ही कृष्णा मेनन मार्ग स्थित बंगला लेने से इनकार कर दिया था। उन्होंने अपने पुराने आवासों में रहना अधिक उचित समझा, जिससे चंद्रचूड़ को अतिरिक्त समय तक बंगले में रहना संभव हो सका।
सुप्रीम कोर्ट की साख पर सवाल
यह मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट को अपने ही पूर्व मुख्य न्यायाधीश से बंगला खाली करवाने के लिए केंद्र को लिखित पत्र भेजना पड़ा। सामान्यत: ऐसे मामलों में आंतरिक सहमति और समझ से समाधान निकाल लिया जाता है, लेकिन इस बार न्यायपालिका को सख्ती दिखानी पड़ी।

