Friday, March 20, 2026
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कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की जगह दी क्लीन चिट

  • 180 करोड़ के केबल खरीद में घोटाले का आरोप, उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष का खुलासे पर चेयरमैन को पत्र

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: दो बार की जांच में फेल केबल को क्लीनचिट देने के मामले में बजाए कंपनी पर कार्रवाई व उसको ब्लैकलिस्ट करने के क्लीनचिट देना जांच करने वाले एक्सईएन के लिए बड़ी मुश्किल का कारण बन सकता है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग को लेकर यूपी पावर कारपोरेशन चेयरमैन को पत्र लिखा है। यह पूरा मामला 180 करोड़ रुपये कीमत के केबल खरीद से जुड़ा हुआ है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने चेयरमैन को भेजे गए पत्र में अगवत कराया है कि गुजरात की एक नामी कंपनी का अत्यंत खराब गुणवत्ता का 18 किमी एचटी केबल आरडीएसएस की एसबीजी (स्टैंडर्ड बिडिंग गाइडलाइन) का उल्लंघन करके एमडी आॅफिस के डीक्यूसी अनुभाग ने सबसे पूर्व से चर्चित रहे एक एक्सईएन (जो दादरी से सस्पेंड करके मेरठ भेजे गए थे) ने कथित रूप से भ्रष्टाचार कर पास कर दिया,

जबकि यह केबल पूर्व में दो बार की गयी तकनीकि जांच व इंस्पेक्शन में फेल हो चुका था। दोनों बार कंपनी पर पेनाल्टी लगाई गई थी और आरडीएसएस की एसबीजी के अनुसार दो बार इंस्पेक्शन में फेल होने के बाद फर्म को ब्लैकलिस्टेड किया जाना था, लेकिन एक्सईएन ने कंपनी का घटिया गुणवत्ता का केबल पास कर विभाग को करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया।

इंस्पेक्शन में केबल फेल

पावर चेयरमैन को बताया गया है कि 13 अप्रैल को यह केबल इंस्पेक्शन में फेल हुआ था। जिसके तीन दिन बाद ही कंपनी ने दोबारा इंस्पेक्शन आॅफर कर दिया और 23 अप्रैल को एसबीजी ने उक्त एक्सईएन को नामित कर दिया, जिसने कथित रूप से घटिया केबल पास कर दी। चेयरमैन से इस बात की भी जांच की मांग की गई है कि पूर्व में दो बार की जांच में फेल करार दिए गए केबल को तीसरी बार पास कराने के खेल में कौन-कौन शामिल हैं

या फिर जांच करने वाले एक्सईएन की इकलौती कारगुजारी है, इसकी भी जांच कराई जानी चाहिए। सवालों के घेरे मे एसबीजी भी है। क्योंकि क्या उन्हे इस बात की जानकारी नहीं थी की दो बार इंस्पेक्शन में फेल होने के बाद फर्म को ब्लैकलिस्ट किया जाना है ना कि उसके केबल को पास कर कंपनी को क्लीनचिट दे दी जाए।

नहीं हो सका डायरेक्टर टेक्निकल से संपर्क

अवधेश वर्मा ने पत्र में कहा है कि चेयरमैन के स्पष्ट आदेश हैं कि भंडार गृह, मेटेरियल मैनेजमेंट, एसबीजी आदि में सिर्फ ऐसे अफसरों की तैनाती की जाए जो टेक्निकली काबिल हों। जिनका शेष कार्यकाल तीन वर्ष से ज्यादा हो, लेकिन वर्तमान में एमडी आॅफिस की एसबीजी में एक एक्सईएन आईटी की अभियंता है न कि इलेक्ट्रिकल और एक एक्सईएन जेई से प्रोन्नत है। जिनके रिटायरमेंट में मात्र दो वर्ष बचे हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने पूरे मामले को उठाते हुए ट्वीट भी किया है। वहीं, दूसरी ओर इस मामले में पीवीवीएनएल के डायरेक्टर टेक्निकल से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन कई बार प्रयास के बाद भी उनसे बात नहीं हो सकी।

हारमनी प्रकरण: हड़ताल से 13 तक बढ़ी अंतरिम जमानत की मियाद

मेरठ: नौचंदी थाना के गढ़ रोड होटल हारमनी के कसीनो कांड के नवीन अरोरा समेत सभी आठों अभियुक्तों को फिलहाल 13 तक राहत मिल गयी है। अधिवक्ताओं की हड़ताल के चलते मियाद आगे बढ़ानी पड़ी। अंतरिम बेल बढ़ाए जाने के बाद फिलहाल पुलिस की ओर से किसी प्रकार की कार्रवाई का संभावित खतरा टल गया है।

सूत्रों ने जानकारी दी है कि होटल हारमनी कसीनो कांड में पुलिस की ओर से एफआईआर में 3/4 के अलावा 112 भी बढ़ाई जा सकती है। 13 नवंबर को प्रस्तावित अदालती सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से यह धारा बढ़ाए जाने की अनुमति के लिए याचिका दायर की जा सकती है। जानकारों का कहना है कि यदि 112 लगती है तो फिर मुश्किल हो सकती है। इस मुसीबत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि

यदि कोर्ट ने 112 की अनुमति दी तो बेल खारिज भी हो सकती है और बेल खारिज हुई तो फिर हारमनी कसीनो कांड में अभियुक्त बनाए गए हारमनी के मालिक नवीन आरोरा, चिराग तनेजा, अमित चांदना, राजीव, कपड़ा व्यापारी मोहित को जेल जाना पडेÞगा। इस धारा में शराब और जुआ खिलाने व नाल काटने का संगीन आरोप लगता है।

डीवीआर पर इतना सन्नाटा क्यों?

होटल हारमनी कसीनो कांड का सच डीवीआर के पेट में छिपा है, लेकिन इस डीवीआर को लेकर ना तो फिलहाल पुलिस ज्यादा कुछ बोल रही है और ना ही होटल कसीनो कांड में जिन्हें अभियुक्त बनाया गया है वो कुछ बोलने को राजी हैं। होटल हारमनी के मालिक नवीन अरोरा पहले ही कह चुके हैं कि डीवीआर पुलिस के पास है। वहीं, दूसरी ओर एसपी सिटी का कहना है कि डीवीआर का पासवार्ड है जो नवीन अरोरा मुहैय्या नहीं करा रहे हैं। बीच अभियुक्तों की ओर से कोर्ट में पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट अनिल बक्शी ने तो पूरे मामले को लेकर पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

उन्होंने गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए बताया कि होटल के जिस फ्लोर पर कसीनो की बात पुलिस कह रही है, वहां से एक भी शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया है। होटल कसीनो कांड को लेकर जो अब तक सामने आया है। उसके चलते 13 नवंबर का दिन इस केस में अहम माना जा रहा है। पुलिस का प्रयास एफआईआर में 112 की अनुमति हासिल करने का रहेगा जबकि हारमनी के मालिक नवीन आरोरा, चिराग तनेजा, अमित चांदना, राजीव, कपड़ा व्यापारी मोहित को स्थायी बेल की दरकार होगी।

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