Saturday, March 14, 2026
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आलू की फसल पर मंडराए संकट के बादल

  • वर्तमान मौसम नहीं आलू की फसल के लिए अनुकूल

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आलू की फसल पर संकट मंडरा गया है। क्योंकि यह मौसम आलू की खेती के लिए अनुकूल नहीं है। बारिश पाला और मौसम इस फसल के लिए ठीक नहीं है। वर्तमान में मौसम को देखते हुए किसानों की चिंता बढ़ गई है। अभी तक अच्छी खड़ी आलू की फसल पर मौसम की मार से किसान बेहाल हो सकते है। वैज्ञानिक किसानों से संपर्क कर आलू की फसल को बचने के लिए काम कर रहे हैं।

वेस्ट यूपी में गन्ने के बाद किसान आलू की फसल को करते है। शुरुआत में मानसून की बारिश देर तक होने के कारण आलू की फसल बुवाई में प्रभावित हुई थी, दिसंबर का महीना बहुत ही आलू की फसल के लिए अहम था, इस महीने में कोहरा नहींं पड़ा, लेकिन जनवरी के प्रथम सप्ताह में कोहरा और बारिश के चलते आलू किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार मौसम के खराब होने के कारण आलू की फसल में पछेता झुलसा बीमारी का खतरा मंडराने लगा है।

फरुखाबाद, इटावा, फिरोजाबाद, आगरा, बिजनौर, बुलंदशहर, मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर आदि कुछ जनपदों में किसानों के यहां पर खेतों में बीमारी का असर दिखाई दिया है। अभी शुरुआत है, ऐसे में इसकी रोकथाम बहुत जरूरी है। केंद्रीय आलू अनुसंधान मोदीपुरम द्वारा वेस्ट यूपी के करीब 500 आलू उत्पादक किसानों को फोन के माध्यम से पछेता झुलसा बीमारी से बीमारी से बचाने के लिए जानकारी दे रहे हैं।

ऐसे बचाएं फसल

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खेतों से पानी की निकासी का प्रबंध करें और जल को खेतों में जमा न रहने दें। यदि किसी खेत में पिछेता झुलसा से ग्रसित है। तो उस खेत में पानी करे। ताकि बीमारी से बचाया जा सके।

जरबेरा फूलों की खुशबू से महक रही किसानों की अर्थव्यवस्था

किसानों के लिए संरक्षित खेती वरदान साबित हो रही है। इन दिनों पाली हाउस की खेती करने वाले किसान जरबेरा की बढ़ती मांग के चलते काफी उत्साहित हैं। वहीं, कोरोना काल में खेती किसानों को बड़ा नुकसान हुआ था, लेकिन साल के शुरुआत में किसानों के लिए फूलों की खेती संजीवनी बनकर आई है। सजावट के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला पांच रंगों के जरबेरा फूल की वर्तमान में बेहद मांग है।

जनपद में जरबेरा की एकड़ में संरक्षित खेती करने वो किसानों की अब प्रतिदिन 10 से 15 हजार रुपये के दाम दिल्ली के बाजारों में आसानी से मिल रहे हैं। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि पाली हाउस यानि संरक्षित खेती छोटे किसानों के लिए शानदार विकल्प है। एक एकड़ तक के किसान पाली हाउस लगाकर फूलों के अलावा विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

इसमें काम कम और दाम ज्यादा हैं। वहीं, उप निदेशक ने बताया कि मेरठ मंडल में उद्यान से संबंधित खेती तेजी से बढ़ रही है। इसके लिए पाली हाउस बेहतर विकल्प है। छोटे किसान इससे बेहतर आमदनी ले सकते हैं। इन दिनों बाजार में जरबेरा के फूलों की जबरदस्त मांग है। मेरठ से लेकर दिल्ली कर पांच रंगों में जरबेरा फूल अच्छा मुनाफा दे रहे हैं।

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