जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा एक कुर्सी भले ही खतरे में हो लेकिन उन्हें न सिर्फ लिंगायत धर्मगुरुओं का भारी समर्थन मिल रहा है बल्कि विपक्षी विधायकों का भी।
कांग्रेस के दो लिंगायत विधायक एमबी पाटील और एस शिवशंकरप्पा ने एक बयान जारी कर भाजपा नेतृत्व पर लिंगायतों के सबसे बड़े नेता येदियुरप्पा को अपमानित करने का आरोप लगाया है। हालांकि उन्होंने इसे निजी बयान बताते हुए कहा, इससे कांग्रेस पार्टी का कुछ लेना-देना नहीं है।
वहीं दूसरी ओर कर्नाटक के मुख्यमंत्री के आवास पर भगवाधारी लिंगायत धर्मगुरुओं का जमावड़ा लग गया है। लिंगायतों के सबसे बड़े धर्मगुरु सिद्धलिंगास्वामी समेत लगभग 50 धर्मगुरु कर्नाटक के कोने-कोने से अपना समर्थन येदियुरप्पा को दे चुके हैं। उन्होंने भाजपा को भी येदियुरप्पा को सीएम पद से ना हटाने की चेतावनी दी है।
लिंगायत समुदाय कर्नाटक का सबसे बड़ा, धनाढ्य और प्रभावशाली समूह है। पिछले सप्ताह येदियुरप्पा दिल्ली आकर पार्टी नेतृत्व से परामर्श कर बंगलूरू वापस चले गए। उन्होंने कहा, उनसे इस्तीफा देने को नहीं कहा गया। बल्कि उन्हें पार्टी मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है। जबकि पार्टी सूत्रों के अनुसार 78-वर्षीय येदियुरप्पा से अब कुर्सी खाली करने को कह दिया गया है।
दूसरा दौरा 25 से
येदियुरप्पा 25 जुलाई को दोबारा दिल्ली आने वाले हैं। यहां से बंगलूरू जाते समय येदियुरप्पा का कहना था कि वह पार्टी को मजबूत करने की कार्य योजना बनाकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को देंगे। एचडी कुमारस्वामी को हटाकर मुख्यमंत्री बने येदियुरप्पा वर्तमान कार्यकाल के दो वर्ष 26 जुलाई को पूरे कर लेंगे। कर्नाटक में अगला विधानसभा चुनाव अप्रैल 2023 में होना है।
पार्टी के भीतर भी समर्थन
येदियुरप्पा को भाजपा के अंदर से भी समर्थन मिल रहा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बयान में कहा, भाजपा को कर्नाटक में सत्ता दिलाने वाले येदियुरप्पा ही हैं। लेकिन जब उन्हें किनारे कर दिया गया, पार्टी के हाथों से सत्ता निकल गई। भाजपा को दोबारा सत्ता में लाने वाले भी येदियुरप्पा ही हैं। अब पार्टी फिर से वही गलती दोहराने जा रही है।

