- शहर की सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस पर अब नहीं रहा सफर पूरा करने का भरोसा
- फिटनेस के मामले में बेहद खराब है सीएनसी बसों का ट्रैक रिकॉर्ड
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सस्ती और शीघ्र सेवा के नाम पर शुरू की सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस के भरोसे सफर की गलती ना करें। इनकी सीएनजी बसें सफर पूरा कराने की गारंटी खो चुकी हैं। ज्यादातर बसें मंजिल के लिए रवाना तो होती हैं, लेकिन इनके मंजिल पर पहुंचने की गारंटी बिलकुल नहीं। सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस के बेडेÞ में ज्यादातर ऐसी बसें हैं, जो मंजिल पर पहुंचने से पहले ही हांफने लगती हैं और हांफते-हांफते बीच रास्ते में ही बंद हो जाती हैं। इसकी बड़ी वजह इन बसों का समुचित रखरखाव न किया जाना। फिटनेस के मामले में बसों का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खराब है।
सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस के नाम पर सूबे की सरकार ने बसों का बेड़ा मुहैय्या कराने के नाम पर मेरठ वालों के साथ अन्याय के अलावा कुछ नहीं किया। जिस वक्त यह सेवा शुरू की गयी उसके कुछ समय बाद 96 सीएनजी बसें मेरठ भेजी गयी थीं। ये सभी बसें अपनी आधे से ज्यादा जिंदगी जी चुकी थीं। दरअसल, ये वो बसें थीं जो मेरठ भेजने से पहले 10 साल कानपुर में चल चुकी थीं। रोड पर इनकी जिंदगी की मियाद महज पांच साल बाकी रह गयी थी। इन बसों में 20 की मियाद इस साल दिसंबर में और अन्य 20 की मियाद जनवरी में पूरी हो जाएगी।
इस तरह जनवरी तक एक ही झटके में रोड से 40 सीएनजी बसें पक्की तौर पर हट जाएंगी। सीएनजी के अलावा मेरठ में 51 इलेक्ट्रिॉनिक्स और आठ लोफ्लोर वोल्वो बस हैं। नाम न छापे जाने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि मेरठ को पहले ही 10 साल चली हुई बसें दी गयीं। उनमें से भी यदि 40 बसें रोड से हट जाएंगी तो हालात कितने खराब होंगे, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि कुछ दिन पहले एक और इलेक्ट्रिक बस प्रदेश सरकार की आरएफटीवी योजना के तहत मेरठ को मिली है। जो पुरानी बसें चल रही।

