- अवैध निर्माण ग्राउंड फ्लोर से लेकर तीसरी मंजिल तक पहुंचा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कचहरी स्थित कॉपरेटिव बैंक से चंद कदम की दूरी पर है पीएल शर्मा रोड। यहां पर 10 कदम ही पीएल शर्मा रोड पर चलते हैं तो अवैध कॉम्प्लेक्स का निर्माण चल रहा है। निर्माण ग्राउंड फ्लोर से लेकर तीसरी मंजिल तक पहुंच गया है। इस निर्माण का कोई रोक-टोक नहीं है। निर्माण ऊपर बढ़ता जा रहा है। कॉम्प्लेक्स बड़ा है, जिसमें लिफ्ट भी लगाई जा रही है।
इससे साफ है कि कॉम्प्लेक्स बड़ा बनाया जा रहा है, जो करीब एक हजार वर्ग मीटर में फेला हुआ है, जिसमें पार्किंग तक नहीं हैं। यह भीड़-भाड़ वाला इलाका है। सड़क भी संकरी है, जिसके चलते जाम की स्थिति बनी रहती है। ऊपर से धड़ाधड़ इस रोड पर कॉम्प्लेक्स बनाये जा रहे हैं।
इनको एमडीए किस ग्राउंड पर बनने दे रहा हैं, यह बड़ा सवाल है। क्योंकि अवैध कॉम्प्लेक्स बनेगा तो पार्किंग की समस्या पैदा होगी, फिर भी एमडीए ने इसका निर्माण क्यों नहीं रुकवाया। एफएआर के नियम का भी पालन नहीं किया गया। जिस तरह से बिल्डिंग की ऊंचाई बना दी, वैसे एफएआर का खुला उल्लंघन किया गया। एमडीए से पता चला कि इसका मानचित्र स्वीकृत ही नहीं है। फिर भी बिल्डिंग बनती चली गई।
आगे से बिल्डिंग के निर्माण को छुपाया गया है। मंगलवार को इसकी शिकायत कुछ लोग एमडीए उपाध्यक्ष के पास लेकर पहुंचे, लेकिन उपाध्यक्ष मौजूद नहीं थे। ऐसे में लोगों ने उपाध्यक्ष के स्टेनो को इसकी शिकायत देकर बिल्डिंग को सील करने व ध्वस्तीकरण की मांग की। इस शिकायत पर एमडीए कार्रवाई कर पाएगा या फिर शिकायत फाइलों में दबकर रह जाएगी।
रियल एस्टेट: ‘रेरा’ में पंजीकरण नहीं तो कुल लागत पर लगेगा 10 प्रतिशत जुर्माना
मेरठ विकास प्राधिकरण सभागार में मंगलवार को ‘रेरा’ के नियमों की एमडीए व आवास विकास के अधिकारियों को विस्तार से जानकारी दी गई। यही नहीं, कहा गया कि जिस बिल्डर का रेरा में पंजीकरण नहीं है, वह कॉलोनी विकसित नहीं कर सकते। चोरी-छिपे यदि कॉलोनी विकसित की जा रही है तो रेरा कॉलोनी की कुल लागत पर दस प्रतिशत का बिल्डर पर जुर्माना करेगा।
इसके बाद भी जुर्माना नहीं दिया जाता है तो फिर बीस प्रतिशत जुर्माना किया जा सकता है। फिर भी बिल्डर नहीं माना तो उसके बाद एफआईआर दर्ज करायी जाएगी, जिसमें कम से कम तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है। यह कहना था कि स्टेट रिसोर्स पर्सन(रेरा) लखनऊ राजेश मेहथानी ने कही।
दो दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पांच सौ स्कवायर मीटर में जो बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है तथा इसके लिए रेरा में पंजीकरण नहीं है तो संबंधित बिल्डर के खिलाफ जुर्माना लगाने का प्रवधान है।
घरेलू पर दस फीसदी, जबकि व्यवसायिक बिल्डिंग पर बीस फीसदी का जुर्माना है। उन्होंने कहा कि बिना पंजीकरण कराये होर्डिग्स पर रेरा का उल्लेख नहीं किया जा सकता। यदि कोई कर रहा है तो वह गलत है। इसमें भी एफआईआर दर्ज करायी जाएगी। रेरा के नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए तमाम बिन्दुओं पर सभागार में चर्चा की गई। कहा गया कि एमडीए व आवास विकास परिषद से एक सप्ताह में रेरा रिपोर्ट मांगता है।
सब कुछ आॅनलाइन है, जिसमें कुछ भी मैनवल नहीं है। इसमें कोई राहत किसी को नहीं मिल सकती। रेरा में केस जाने के बाद यह मानिये की कार्रवाई तय है। रेरा में पंजीकरण कराकर रियल एस्टेट का कारोबार करें। यही नहीं, 70 फीसदी पैसा मकान निर्माण से पहले बिल्डर को रेरा में जमा कराना होगा, जिसके निर्धारित समय के भीतर मकान बनाकर भी देना होगा। इसमें किसी तरह की देरी होती है तो उसमें भी रेरा कानून का चाबुक चला सकती है।

