Wednesday, March 4, 2026
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15 सालों में दर-ब-दर सिमटती चली गई कांग्रेस

  • 2009 के चुनावों में पार्टी को यूपी की 80 में से 21 सीटों पर मिली थी जीत
  • फिर 2014 में इकाई के अंक में पहुंची तो 2019 में एक सीट पर ही अटक गई

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जिस प्रदेश में कभी कांग्रेस की तूती बोलती थी, वहां आज कांग्रेस के नाम पर सिर्फ ‘सन्नाटा’ है। 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पिछले 15 सालों में 21 सीटों से मात्र एक सीट पर सिमट गई। अब इसे कांग्रेस की किस्मत कहें या फिर ‘भगवा मैजिक’ कि इस जादूगरी में कांग्रेस की चूलें हिल कर रह गर्इं। वैसे पिछले 15 सालों में प्रदेश में कांग्रेस की कयादत (नेतृत्व) भी ज्यादा दमदार नहीं रही। हांलाकि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय जरुर पार्टी को ‘संजीवनी’ देने के लिए एक्टिव मोड में दिख रहे हैं,

लेकिन यह तो लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद ही पता चल पाएगा कि अजय राय की दौड़ धूप ने क्या ‘गुल’ खिलाया। यदि 2009 की बात करें तो प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस के पास 21 सीटें थीं और प्रदेश में उसका वोट प्रतिशत भी 18.3 था। यहां पार्टी भाजपा से काफी आगे थी। क्योंकि 2009 में भाजपा के पास यूपी से10 सीटें थीं, हालांकि भाजपा का वोट प्रतिशत लगभग कांग्रेस के इर्द गिर्द (17.5) ही था। इसके अलावा सपा के पास 23 सीटें (वोट प्रतिशत 23.3), बसपा के पास 20 सीटें (वोट प्रतिशत 27.4)

और रालोद एवं अन्य के पास 6 सीटें (वोट प्रतिशत 7.8) थीं। 2014 में जब ‘भगवा मैजिक’ का दौर शुरू हुआ तब कांग्रेस को ऐसा करंट लगा कि वो उससे आज तक नहीं उबर पाई। इस दौरान यूपी में जहां भाजपा 10 से बढ़कर 71 सीटों तक पहुंच गई वहीं कांग्रेस 21 से 2 पर सिमट गई। यह कांग्रेस के लिए बड़ा आघात रहा। भगवा मैजिक ने यूपी में सिर्फ कांग्रेस की ही लुटिया नहीं डुबोई बल्कि सपा को भी बैसाखियों पर ला खड़ा किया। आश्चर्य देखिए कि उत्तर प्रदेश से बसपा का तो सूपड़ा ही साफ कर दिया। 2014 के चुनावों में भाजपा को 71 सीटें मिलीं

और उसका वोट प्रतिशत भी पिछले चुनावों के मुकाबले 17.5 प्रतिशत से बढ़कर 42.6 प्रतिशत पहुंच गया। सपा भी यहां गर्त में चली गई और उसके यूपी से सांसद पिछले चुनावों के मुकाबले 23 से घटकर सिर्फ 5 रह गए और पार्टी का वोट बैंक भी एक प्रतिशत घट गया। बसपा को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ और वो अपनी पूरी कमाई ही लुटा बैठी और संसद में उसका प्रतिनिधित्व ‘शून्य’ हो गया। यहां अगर बसपा के वोट प्रतिशत की बात करें तो वो पिछले चुनावों के मुकाबले 27.4 से गिरकर 19.8 पर आ गया। अगर बात 2019 की करें तो यहां ‘भगवा मैजिक’ तो कायम रहा लेकिन भाजपा की कुछ सीटें कम हुर्इं।

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पिछले चुनावों के मुकाबले भाजपा 71 से 62 पर आ गई, लेकिन खास बात यह रही कि पार्टी (भाजपा) का वोट प्रतिशत 42.6 से बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। सपा यहां एक बार फिर 5 पर ही अटकी रही, साथ ही उसका वोट प्रतिशत भी और गिरा जो पिछले चुनावों के मुकाबले 22.3 से घटकर 18.1 पर आ गया। पिछले चुनावों के मुकाबले बसपा को थोड़ा लाभ हुआ। उसका वोट प्रतिशत तो नहीं बढ़ा लेकिन सीटें 0 से 10 हो गर्इं। कांग्रेस यहां फिर नुकसान में रही और उत्तर प्रदेश से संसद में उसका सिर्फ एक सांसद ही चुना गया तथा उसका वोट प्रतिशत भी साढ़े सात से घटकर 6.4 रह गया।

‘मिनी एलायंस’ पर अब एमआईएम की नजर !

लोकसभा चुनावों का धूमधड़ाका शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेरठ में प्रबुद्ध सम्मेलन कर यहां चुनावी श्री गणेश कर चुके हैं। अब 31 मार्च को पीएम नरेन्द्र मोदी जनसभा को सम्बोधित करने मेरठ आ रहे हैं। उधर, मेरठ-हापुड़ सीट पर विभिन्न पार्टियों में टिकटों को लेकर स्थिति लगभग साफ हो चुकी है। समाजवादी पार्टी प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह का टिकट कटा हैं, जो फिलहाल होल्ड पर चल रहा हैं। बहुजन समाज पार्टी और भाजपा सभी अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर चुकी हैं। यहां सिर्फ सपा और एमआईएम के प्रत्याशी की घोषणा होना बाकी है।

दरअसल, मेरठ में एमआईएम को एक अहम फैक्टर माना जा रहा है। सब जानते हैं कि मेयर के चुनावों में एमआईएम प्रत्याशी अनस ने सबको चौंकाते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया था और सवा लाख से ज्यादा वोट हासिल किए थे। इसके बाद मेरठ में हर पॉलिटिकल पार्टी की निगाह एमआईएम की रणनीति पर लग गई। अब पिछले दो-तीन दिनों से सोशल मीडिया पर एक और चर्चा आम है। कहा यह जा रहा है कि बहुत जल्द एक मिनी एलायंस भी वजूद में आ सकता है। इस एलायंस में जहां एमआईएम एक अहम फैक्टर होगा,

वहीं पहले बसपा से और अब सपा से अलग हुए स्वामी प्रसाद मौर्य इस एलायंस में अहम् भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा पीस पार्टी को भी एलायंस में शामिल किया जा सकता है, जबकि आजाद समाज पार्टी से लेकर अपनी अपनी पार्टियों से नाराज कई नेता इस गठबंधन का हिस्सा हो सकते हैं। यदि यह गठबंधन वजूद में आया तो कुछ सीटों पर मुख्य विपक्षी पार्टियों का गणित गड़बड़ा सकता है। उधर, मेरठ सीट पर एमआईएम प्रत्याशी को लेकर चर्चाओं का दौर गुरुवार को भी जारी रहा।

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