Monday, April 20, 2026
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पश्चिम के ‘चक्रव्यूह’ को भेद पाएगी भाजपा !

  • वर्ष 2019 में पहले चरण के चुनाव में आठ में से तीन सीट ही जीत पाई थी भाजपा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पहले चरण के चुनाव में भाजपा की अग्नि परीक्षा होगी। दरअसल, पहले चरण में आठ सीटों का नामांकन कार्य फाइनल हो गया है। सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, मुरादाबाद, रामपुर और पीलीभीत ऐसी लोकसभा सीटें हैं, जहां पर पहले चरण में इनका चुनाव होने जा रहा है। यहां 30 मार्च तक नाम वापसी किये जा सकते हैं। इन सीटों पर 19 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होगा, जिन आठ सीटों पर पहले चरण में मतदान होगा, उन पर वर्ष 2019 के चुनाव में मात्र तीन लोकसभा सीटों पर ही भाजपा ने जीत दर्ज की थी,

जबकि पांच पर बसपा और सपा गठबंधन के प्रत्याशी जीते थे। ऐसे में इस बार भाजपा के लिए कड़ी परीक्षा की घड़ी हैं। हालांकि इस बार भाजपा और रालोद का गठबंधन है, इसलिए भी यह पहले चरण का चुनाव बेहद अहम् माना जा रहा है। पश्चिमी यूपी के राजनीतिक समीकरण भी इसलिए बदले हैं, क्योंकि भाजपा, रालोद एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए ही पीएम नरेन्द्र मोदी मेरठ आ रहे हैं। इसी चक्रव्यूह को भेदने के लिए ये रैली मेरठ में की जा रही हैं।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर सीट को बसपा के हाजी फजर्लुरहमान, बिजनौर सीट को बसपा के ही मलूक नागर और नगीना लोकसभा सीट को बसपा के ही गिरीश चंद्र जीता था। ये तीनों सीटें बसपा के खाते में चली गई थी। इसके अलावा दो सीटें मुरादाबाद और रामपुर को समाजवादी पार्टी ने कब्जा लिया था। इनमें मुरादाबाद से डा. एसटी हसन और रामपुर से मोहम्मद आजम खान ने जीत दर्ज की थी। फिलहाल मोहम्मद आजम खान जेल में बंद है। कैराना, मुजफ्फरनगर और पीलीभीत तीन सीटें ही भाजपा की झोली में गई थी।

कैराना से प्रदीप चौधरी, मुजफ्फरनगर में डा. संजीव बालियान और पीलीभीत से वरुण गांधी संसद में पहुंचे थे। यह भी महत्वपूर्ण है कि वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी, बसपा और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन था। तीनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़े थे। हालांकि इस बार स्थिति एकदम विपरीत है। बसपा ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जबकि सपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ हैं। फिर सपा के टिकट की अदला-बदली से भी स्थिति खराब हुई है। भाजपा से मुकाबला करने की बजाय पहले सपा अपने ही पार्टी नेताओं के साथ जूझना पड़ रहा है। वर्तमान में रालोद और भाजपा के बीच गठबंधन हुआ है।

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इसमें पश्चिमी यूपी की जाट बेल्ट में समीकरण बदल सकते हैं। पहले चरण का चुनाव बेहद चुनौती पूर्ण भाजपा के लिए होने वाला है। वर्ष 2019 के चुनाव के मुकाबले वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के समीकरणों में काफी बदलाव आया है। क्योंकि राष्ट्रीय लोकदल तब सपा के साथ था, लेकिन वर्तमान में भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में है। सहारनपुर में भाजपा ने जहां राघव लखनपाल को प्रत्याशी बनाया है, वहीं सपा और कांग्रेस गठबंधन ने इमरान मसूद को प्रत्याशी बनाया है। इमरान मसूद कांग्रेस के प्रत्याशी हैं।

हालांकि बसपा ने भी माजिद अली को यहां से चुनाव मैदान में उतारा है। कैराना सीट भी बेहद महत्वपूर्ण है। भाजपा ने यहां फिर से प्रदीप चौधरी पर भरोसा जताकर उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है, जबकि सपा कांग्रेस गठबंधन से इकरा हसन को चुनाव मैदान में उतारा है। बसपा ने यहां श्रीपाल राणा को टिकट दिया है। चुनाव परिणाम क्या होंगे? वह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन कैराना लोकसभा सीट पर सभी की निगाहें लगी हुई है। मुजफ्फरनगर सीट भी बेहद महत्वपूर्ण है, यहां से भाजपा ने तीसरी बार डा. संजीव बालियान को चुनाव मैदान में उतारा है,

जबकि सपा और कांग्रेस गठबंधन ने हरेंद्र मलिक और बसपा ने दारा सिंह प्रजापति को चुनाव मैदान में उतारा है। मुजफ्फरनगर सीट पर त्रिकोणीय चुनाव होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। बिजनौर से भाजपा-रालोद गठबंधन से चंदन सिंह चौहान को अपना प्रत्याशी बना है। ये सीट रालोद के गठबंधन में हैं। सपा ने दीपक सैनी और बसपा ने चौधरी विजेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया है। यहां का चुनाव दिलचस्प होने वाला है। हालांकि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-रालोद और बसपा के गठबंधन से मलूक नागर ने चुनाव लड़ा था

और जीत भी दर्ज की थी। फिलहाल पश्चिमी यूपी की इस बहु चर्चित सीट पर सभी की निगाहें लगी हुई है। पांचवीं लोकसभा सीट है नगीना 2024 के लोकसभा चुनाव में नगीना से भाजपा ने ओम कुमार, सपा से मनोज कुमार और बसपा ने सुरेंद्र पाल सिंह को उतारा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा के गिरीश चंद्र ने जीत दर्ज की थी। इस बार नगीना इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद भी यही से चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी दलितों में मजबूत पकड़ होना बताया जाता है।

चंद्रशेखर किसको कितना नुकसान पहुंचाते हैं, अभी ये सब भविष्य के गर्भ में है। ये चुनाव परिणाम के बाद पता चलेगा मुरादाबाद सीट पर भाजपा ने कुंवर सर्वेश कुमार को प्रत्याशी बनाया है। क्योंकि सपा में मुरादाबाद सीट को लेकर उठा फाटक चल रही है तथा अब रुचि वीरा जो बिजनौर की रहने वाली है, उन्होंने नामांकन दाखिल कर दिया है। मुरादाबाद से बसपा ने मोहम्मद इरफान सैफी को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के डा. एसटी हसन ने जीत दर्ज की थी। चर्चा ये है कि डा. एसटी हसन ओवैसी की पार्टी से चुनाव मैदान में उतर गए हैं।

अब देखना है कि भाजपा और रालोद का गठबंधन का जो समीकरण बना है, वो पश्चिमी यूपी में क्या समीकरण बनाता है। चर्चित लोकसभा सीट रामपुर कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी, लेकिन वर्तमान में इस सीट पर सपा का कब्जा हैं। 2019 के लोकसभा आजम खां जीते थे, वर्तमान में आजम खां जेल में हैं। उप चुनाव में यहां से भाजपा के घनश्याम सिंह लोधी ने जीत दर्ज की थी। इस बार भी भाजपा ने घनश्याम लोधी को प्रत्याशी बनाया है, जबकि बसपा ने यहां से जीशान खान को प्रत्याशी बनाया है।

सपा में खूब उठा पटक के बाद शाही इमाम मुहीव्वुल्लाह नदवी ने अंतिम दिन नामांकन भर दिया है। रामपुर से सपा नगर अध्यक्ष असीम राजा ने भी पर्चा दाखिल किया है। फिलहाल यहां पर सपा प्रत्याशी को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। पीलीभीत को वीआईपी सीट माना जाता हैं। ये कभी मेनका गांधी और फिरोज वरुण गांधी की पारंपरिक सीट मानी जाती थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में फिरोज वरुण गांधी ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी,

लेकिन 2024 में ये सीट उनके हाथ से निकल गई। भाजपा ने वरुण गांधी की जगह यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और जितिन प्रसाद को यहां से प्रत्याशी बनाया है। सपा ने इस सीट से भगवत शरण गंगवार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि बसपा ने पूर्व मंत्री अनीश अहमद खान को चुनाव मैदान में उतारा है।

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