
गांधी की अस्थियों को देश की जिन 12 नदियों के तटों पर विसर्जित किया गया था, गंगा किनारे का बनारस उनमें एक था। देशभर में ये स्थान राजघाट कहलाते हैं। अब उसी बनारस उर्फ वाराणसी के उसी राजघाट पर विनोबा, जेपी जैसी विभूतियों द्वारा स्थापित ‘सर्व सेवा संघ प्रकाशन’ और ‘गांधी विद्या संस्थान’ को तबाह करने केन्द्र और उत्तरप्रदेश राज्य की सरकारें हुलफुला रही हैं। क्या हैं, इसकी वजहें?