- ग्राउंड से बनाया सात मीटर ऊंचा, परतापुर के प्लेटफार्म लेवल की ऊंचाई ग्राउंड से होगी लगभग 13 मीटर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेरठ में एनसीआरटीसी द्वारा निर्माणाधीन परतापुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म लेवल का निर्माण कार्य प्रारम्भ हो गया है। जिसके अंतर्गत ट्रैक लेवल बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। इसके पहले इस स्टेशन के कोनकोर्स लेवल का कार्य पूरा कर लिया गया था। जो ग्राउंड से सात मीटर ऊंचा बनाया गया है। परतापुर के प्लेटफार्म लेवल की ऊंचाई ग्राउंड से लगभग 13 मीटर की होगी।
परतापुर स्टेशन मेरठ मेट्रो सेवा के लिए समर्पित स्टेशन है। यह लगभग 75 मीटर लंबा और 34 मीटर चौड़ा है। इस स्टेशन पर आरआरटीएस की ट्रेनों के लिए बीच में ट्रैक बनाए जा रहे हैं। जिससे होकर आरआरटीएस ट्रेने सीधे निकल जाएंगी। मेट्रो ट्रेन की ट्रैक किनारों पर बनाई जाएगी। जहां मेरठ मेट्रो की ट्रेन अपनी सेवाएं देंगी। यात्रियों के लिए प्लेटफार्म, इस स्टेशन के दोनों किनारों पर बनाए जाएंगे।
इसलिए इस स्टेशन पर टोटल चार ट्रैक होंगे। परतापुर स्टेशन दिल्ली-मेरठ मुख्य मार्ग के बीच में बनाया जा रहा है। इस स्टेशन पर प्रवेश और निकास के लिए दोनों ओर दो द्वार बनाए जाएंगे। कोनकोर्स लेवल पर आने के लिए लिफ्ट और एक्सेलटर की व्ययस्था की जाएगी। कॉनकोर्स लेवल पर यात्रियों के लिए सुरक्षा जांच किओस्क और टिकट काउंटर के अलावा प्लेटफार्म लेवल पर जाने के लिए एएफसी (आॅटोमेटिक फेयर कलेक्शन) गेट आदि होते हैं।
साथ ही यात्री केंद्रित सुविधाएं जैसे आधुनिक सूचना डिस्प्ले बोर्ड (आॅडियो-वीडियो सहित), स्टेशन के आसपास के प्रमुख स्थान दर्शाने वाले सिस्टम मैप, सीसीटीवी कैमरे, अग्निशामक प्रणाली और वॉशरूम आदि जैसी सुविधाएं भी कॉनकोर्स लेवल पर ही बनाई जाती हैं।
कॉनकोर्स लेवल से यात्री सीढ़ियों, लिफ्ट या एस्केलेटर की मदद से प्लेटफार्म लेवल पर पहुंचेंगे
मेरठ में आरआरटीएस कॉरिडोर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही मेरठ मेट्रो की लोकल ट्रांसिट सेवाएं भी प्रदान की जाएंगी और परतापुर स्टेशन का निर्माण इसी कार्ययोजना का अंग है। इससे स्थानीय निवासियों को मेरठ मेट्रो की लोकल सेवा के साथ-साथ आरआरटीएस कॉरिडोर द्वारा सम्पूर्ण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कहीं भी आने-जाने की सुविधा मिलेगी।
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर में कुल 25 स्टेशन हैं। जिसमें से 13 स्टेशन मेरठ में स्थित है। इन्हीं स्टेशनों द्वारा ही मेरठ में लोकल मेट्रो की ट्रांसिट सेवा स्थानीय निवासियों को मिल सकेगी। मेरठ साउथ स्टेशन से लोकल मेट्रो की सेवा प्रारम्भ होगी और परतापुर, रिठानी, शताब्दीनगर, ब्रह्मपुरी के एलिवेटेड भाग से आगे भैंसाली, मेरठ सेंट्रल और बेगमपुल में भूमिगत हो जाएगी।
आगे यह पुन: एलिवेटेड होकर एमईएस कॉलोनी, डौरली, मेरठ नॉर्थ व मोदीपुरम होते हुए मोदीपुरम डिपो तक जाएगी। जहां मोदीपुरम डिपो में ट्रेनों के रखरखाव का प्रबंध किया जाना है। मेरठ में आरआरटीएस का सभी निर्माण कार्य निर्धारित बैरिकेडिंग क्षेत्र में ही किया जा रहा है और महत्वपूर्ण स्थानों पर ट्रैफिक मार्शल भी नियुक्त किए गए हैं। जिससे रोड पर आवागमन बाधित ना हो।
यातायात सुचारु रूप से चले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाती हैं। स्थानीय सरकारी एजेन्सियों के सहयोग से जगह जगह पर यू- टर्न दिये गए हैं, इसके अलावा जिम्मेदारी के साथ पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक मार्शल भी नियुक्त किए गए हैं। इन सभी व्यवस्थाओं में निरंतर जरूरत के अनुसार बदलाव भी होते रहते हैं, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या को रोका जा सके।
एनसीआरटीसी का निर्माण कार्य व्यस्त रोड के बीच बहुत बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। निर्माण से जुड़े जोखिम को देखते हुए सभी निर्माण कार्य बैरिकेडिंग जोन के अंदर ही किए जाते हैं। साथ ही सभी निर्माण स्थलों पर सुरक्षा और संरक्षा का बहुत ही ध्यान रखा जाता है और छोटी से छोटी बातों का ध्यान रखा जाता है। एनसीआरटीसी द्वारा निमार्णाधीन 82 किमी लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के साहिबाबाद से दुहाई के बीच 17 किमी के प्राथमिकता वाले खंड को 2023 तक और पूरे कॉरिडोर को 2025 तक शुरू करने का लक्ष्य है।

