- 3283 मामले पैंडिंग, उपभोक्ता फोरम से उठ रहा लोगों का भरोसा
- शिकायत कर्ता लगाते रहते हैं चक्कर नहीं हो पाता समस्याओं का समय से निदान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जागो, ग्राहक जागो का नारा सुनकर भले ही उपभोक्ताओं की धोखाधड़ी कर ठगने वाले दुकानदारों को सबक सिखाने के लिए उम्मीद जगी हो लेकिन जब वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहते हैं तो उन्हें मायूसी का सामना करना पड़ता है। शिकायत के बाद उपभोक्ता को 90 दिनों में न्याय दिलाने के वादे तो बहुत किये जाते हैं, लेकिन वह वादे पूरी किस तरह से होते हैं।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेरठ में जिला उपभोक्ता न्यायालय में अभी तक 3283 मामले पैंडिंग है। इसके अलावा हर महा करीब 30 से अधिक मामले आते हैं। जिनका निपटारा करना मुश्किल होता है। जिसके चलते उपभोक्ता फोरम से लोगों का विश्वास उठता जा रहा है।
हममें से हर कोई किसी न किसी रूप में उपभोक्ता है। राशन, दवाएं, कपड़े, ऐसी, फ्रीज आदि खरीदने वाला तो उपभोक्ता है ही, इसके अलावा इलाज के लिये अस्पताल में भर्ती होने वाला या बस, ट्रेन या हवाई जहाज में सफर कर रहा व्यक्ति भी उपभोक्ता है। वह इन सब सामानों व सेवाओं के मुल्य का भुगतान करके ही उनका इस्तेमाल करता है।
इस प्रक्रिया में उसे किसी किस्म का कोई नुकसान उठाना पड़े, इसके लिये उसको सामान की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता व मानकों और मूल्यों के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने का पूरा अधिकारी है। यह भी उसके अधिकार क्षेत्र में आता है कि गलत मंशाओं या धोखाधड़ी का शिकार न हो उसका भरोसा न टूटे। उसका संतुष्ट होना जरूरी है। अगर उसे लगे कि वह किसी तरह की बेईमानी या अन्याय का शिकार हुआ है तो वह उपभोक्ता कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 में पारित किया गया था। यह एक्ट उपभोक्ता के हितों की रक्षा करता है। यह कई विषयों बैंकिंग, ट्रांसपोर्ट, बीमा, फाइनेंस, मेडिकल, होटल, बिजली, टेलीफोन, बिजली आपूर्ति, आवास, मनोरंजन आदि मामलों में उपभोक्ता को पूरा संरक्षण देता है। उपभोक्ता के मामलों के निपटारे के लिये जिला फोरम, राज्य फोरम, राष्ट्रीय फोरम जैसे न्यायालय बनाये गये हैं।
हर माह आते हैं 30 से 35 मामले, नहीं होती सुनवाई
उपभोक्ताओं की शिकायतों को सुनने के लिये तीन न्यायालय बनाये गये हैं। जिसमें जिला फोरम जिसमें 20 लाख तक के नुकसान की शिकायत की जा सकती है। इसके बाद राज्य फोरम जिसमें 20 लाख से एक करोड़ तक की शिकायत की जाती है। उसके बाद राष्ट्रीय फोरम जिसमें एक करोड़ से अधिक के नुकसान की शिकायत होती है। मेरठ में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की बात करें तो यहां जिला कार्यालय पर जब से कोर्ट बनी है तब से लेकर अब तक 3280 मामले पैंडिंग में हैं यहां कभी न्यायालय लगता है तो कभी नहीं जिस कारण शिकायतकर्ता परेशान रहते हैं।
प्रतिमाह की बात की जाये तो यहां 30 से 35 शिकायतें आती हैं इनमें से एक या दो मामलों का निपटारा ही मुश्किल से उसी माह में हो पाता है। बाकी के लिये लोगों को इंतजार करना पड़ जाता है। यह इंतजार ही इतना लंबा हो जाता है कि लोग परेशान हो जाते हैं और उनका विश्वास इस पर से उठता चला जाता है। यहां के अध्यक्ष भोपाल सिंह ने बताया कि यहां न्यायालय में शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है, लेकिन लंबित मामलों को देखकर ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है।

