भावनाएं प्रकृति का अद्भुत उपहार होती हैं, ये हमें आंतरिक संदेश देती हैं कि हम जिस स्थिति में है या हम जो कर रहे हैं, वो हमारे विश्वास, हमारी मान्यताओं और हमारी इच्छाओं एवं आकांक्षाओं के अनुरूप है या नहीं।
हम अच्छी भावनाओं को महसूस करते हैं, जब हम अपने अनुकूल कार्य कर रहे होते हैं और यदि हम अपने प्रतिकूल होते हैं तो हम बुरी भावनाएं महसूस करते हैं। डॉ. टीपी चिया कहते हैं- भावनाएं हमें रोजमर्रा के जीवन में मानसिक, आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक और क्रियात्त्मक तौर पर प्रभावित करती हैं।
यदि हम सकारात्मक भावनाओं से ओत-प्रोत हैं, तो हमें लाभ होगा। यदि हम नकारात्मक भावनाओं के नियंत्रण में हैं, तो हमें नुकसान होगा। सकारात्मक भावनाएं, जैसे कि प्यार, दया, आत्म-मूल्य, आत्मविश्वास और आशावाद की भावनाएं, एक बेहतर व्यक्ति और एक अच्छी नियति पैदा करती हैं।
नकारात्मक भावनाएं, जैसे कि घृणा, नीचता, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की कमी और निराशावाद की भावनाएं, एक अप्रिय व्यक्ति और धूमिल भाग्य का निर्माण करती हैं। अपनी भावनाओं को संतुलित और नियंत्रित रखना जीवन के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक है।
बुरी भावनाओं से निपटने का सबसे आसान उपाय है, उन्हें समझना, न कि उन्हें नकारना या उनके साथ बह जाना। सबसे पहले हम अपने आप से यह पूछें कि हम जो भावना महसूस कर रहे है, वह क्या है, कैसी महसूस हो रही है और वह हमें क्या बताना चाहती है? उसके बाद हम उपलब्ध विकल्पों को देखें और उनमें से ऐसे विकल्पों को चुनें, जिससे हमारी दूरगामी खुशियां भी सुनिश्चित होती हों।