Monday, March 30, 2026
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किसानों के विकास में विशेष भागीदारी निभाएं सहकारी समितियां

  • सरकार द्वारा संचालित योजनाओं व कार्यक्रमों का लाभ सीधे आम किसान तक पहुंचे

  • ऋण वितरण में पूरी तरह पारदर्शिता बरती जाए, खेती-बाड़ी तक के कार्यों में किसान की मदद की जाए

  • रुड़की नगर निगम सभागार में सहकारी समितियों की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित

जनवाणी संवाददाता |

रुड़की: केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित सहकारिता योजनाओं व कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनका लाभ आम किसान तक पहुंचाने के लिए आज नगर निगम रुड़की सभागार में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में सहकारी समितियों की प्रगति की समीक्षा भी की गई।

जिसमें मुख्य रूप से संयुक्त निदेशक एमपी त्रिपाठी, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष प्रदीप चौधरी, जिला सहायक निबंधक राजेश चौहान, जिला सहकारी बैंक महाप्रबंधक/सचिव राम यज्ञ तिवारी ने प्रत्येक सचिव से उनकी समिति की प्रगति रिपोर्ट जानी।

सचिवों से साफ शब्दों में कहा गया कि जो भी सहकारिता योजनाएं व कार्यक्रम है, उनमें पूरी तरह पारदर्शिता बरती जाए। उनका लाभ सीधे किसान को पहुंचे बीच में कोई किसी तरह की गड़बड़ी न हो। किसी भी स्तर पर वित्तीय अनुशासनहीनता नहीं होनी चाहिए। अधिक से अधिक ऋण वितरित किया जाए ताकि किसान सहकारी समितियों से ऋण वितरित का सदुपयोग कर खेती-बाड़ी का विकास कर सके।

सहकारी बैंक से प्राप्त ऋण शत-प्रतिशत वितरित किया जाए और उसे समय से लौटाने की भी समिति स्तर से व्यवस्था की जाए। मिनी बैंकों की प्रगति बेहतर रखी जाए। इसी के साथ सहकारी बैंक की शाखाओं में अधिक से अधिक डिपॉजिट बढ़ाया जाए। समितियों में सदस्यों की संख्या में लगातार वृद्धि की जाए। पूर्व में जो निष्क्रिय सदस्य हो गए थे। उन्हें फिर से सक्रिय किया जाए। ताकि सहकारी समितियों की स्थिति और अच्छी हो सके।

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इस अवसर पर संयुक्त निदेशक एमपी त्रिपाठी ने कहा है कि बैंक और सहकारी समिति खेती-बाड़ी के विकास में तभी सहायक साबित होंगे। जब सरकार द्वारा संचालित योजनाओं व कार्यक्रमों का लाभ आम किसान को पहुंचेगा। इसमें सहकारी समितियां विशेष भूमिका निभा रही है और इस दिशा में और अच्छे प्रयास किए जा सकते हैं।

इसीलिए सहकारी समितियों के बोर्ड किसानों के उत्थान और सहकारी समितियों की अच्छाई के लिए कार्य करें। सचिवों की विशेष जिम्मेदारी है कि उनकी समिति किसी भी तरह से घाटे में न जाए। समितियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न डाला जाए। इस अवसर पर जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष प्रदीप चौधरी ने कहा है कि सहकारिता ग्रामीण विकास की धुरी है।

हमें राजनीतिक भेदभाव से ऊपर उठकर पारदर्शिता एवं ईमानदारी के साथ सहकारिता को सशक्त करने के लिए और अधिक काम करना होगा। सहकारी बैंक की ओर से सहकारी समितियों को हर स्तर पर सहयोग दिया जा रहा है। लेकिन सहकारी समितियों को भी इस ओर ध्यान देना होगा कि न तो उनका वितरित किया गया ऋण डूबे और न ही वह किसी योजना को लागू करने में पिछड़े।

किसान का खेती बाड़ी में हर स्तर पर सहयोग किया जाए ताकि किसान को लगे कि सहकारी समितियां उनके विकास हुए विशेष भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा है कि ग्रामीण अंचल में सहकारी बैंक की कुछ और शाखाएं भी खोली जानी है। इसके लिए कुछ प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि शहर हो या गांव। सभी क्षेत्रों में सहकारी बैंक और समितियों के प्रति आमजन का रुझान बढ़ा है जो सहकारिता के लिए एक अच्छे संकेत हैं।

जिला सहायक निबंधक राजेश चौहान ने कहा कि सहकारी समितियों की स्थिति में काफी सुधार आया है। लेकिन पूर्व में समिति स्तर पर जो लापरवाही और वित्तीय अनुशासनहीनता हुई है। उससे आज भी कुछ समितियां नुकसान में है। उनके सुधार के लिए अधिक प्रयासों की जरूरत है।

सहकारी समिति भी अन्य समितियों की तरह लाभ में पहुंचे। इसके लिए वहां के समिति बोर्ड व अधिकारी मिलजुल कर कार्य करें।उन्होंने कहा है कि सभी सहकारी समितियों की मासिक प्रगति रिपोर्ट बहुत ही अच्छी हो। इसके लिए सचिव को गंभीरता पूर्वक कार्य करना होगा।

जिला सहकारी बैंक महाप्रबंधक /सचिव रामयज्ञ तिवारी ने कहा है कि सहकारी समितियों को बैंक मुख्यालय को किसी भी तरह की भ्रमित करती हुई रिपोर्ट नहीं भेजनी चाहिए। उनके द्वारा कितना ऋण वितरित किया गया है और कितना वसूल किया गया है। इस बारे में पूरी तरह पारदर्शी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि जो भी ऋण वसूली होती है वह तत्काल बैंक शाखा में जमा कराई जाए।ताकि वित्तीय अनुशासनहीनता का मामला न बन सके।

उन्होंने कहा है कि सहकारी बैंक समितियों की ऋण सीमा वृद्धि हो या फिर योजनाओं व कार्यक्रमों का संचालन। सभी में सहकारी समितियों को पूरा सहयोग दे रहा है। बैठक में कुछ समितियों की प्रगति रिपोर्ट अच्छी ना होने पर वहां के सचिवों को संयुक्त निदेशक एमपी त्रिपाठी ने सख्त हिदायत दी और कहा है कि वह समिति के लिए पूरे मनोयोग से कार्य करें। बैठक में हरिद्वार जिले की सभी तहसीलों के समितियों के सचिव व सहकारिता अधिकारी मौजूद रहे।

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