
कोरोना की तीसरी लहर बीत चुकी है। देश में पिछले लगभग दो महीनों से सक्रिय मामलों की संख्या भी दिन-ब-दिन कम रिकार्ड हो रही है। देश के कई राज्यों में कोविड प्रोटोकॉल में छूट भी दी गई है। मास्क न लगाने पर लगने वाले जुर्माने को हटा दिया गया है। लेकिन नागरिकों ने सरकार प्रदत्त छूट से बढ़कर आजादी ओढ़ ली है। कोरोना का नया वैरिएंट अभी ब्रिटेन में मिला है और एक्सई स्ट्रेन ने लगभग 637 लोगों को संक्रमित किया है। यह वायरस काफी तेजी से फैल रहा है, इसलिए भविष्य में सावधानी नहीं बरती गई तो यह वैरिएंट दुनिया भर में फैल सकता है। नए वैरिएंट के केस मुंबई में मिलने की बात भी सामने आई है। बात बीते साल की कि जाए तो भारत में ओमीक्रॉन ने तीसरी लहर के रूप में दस्तक दी थी जिसकी संक्रमण दर डेल्टा वेरिएंट की तुलना में बेहद अधिक थी, हालांकि इसके चलते मृत्यु दर में कमी रही। डेल्टा वेरिएंट के घातक प्रहार से हजारों लोग असमय काल के गाल में समा गए।
विशेषज्ञों के अनुसार तीव्र संक्रामकता के चलते नया वेरिएंट एक्स-ई ज्यादा चुनौती पैदा कर सकता है। विश्व कई स्वास्थ्य संगठन और ग्रुप नए वेरिएंट को लेकर बार-बार चेतावनी जारी कर रहे हैं। वास्तव में नए वेरिएंट की वजह से स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है। ऐसे में जांच व निगरानी में किसी भी तरह की शिथिलता भविष्य में संकट की स्थिति पैदा कर सकती है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि कोरोना हमारी जिंदगी से निकलने का नाम नहीं ले रहा है। रूप बदल-बदलकर यह हमारे सामने आ जाता है। 2019 में कोरोना की महामारी की शुरुआत हुई थी। तब से यह सिरदर्द बना हुआ है।
पिछले तीन साल में इस वायरस के कई वेरिएंट सामने आए हैं। इन्होंने साइंसदानों की नाक में दम कर दिया है। इस वायरस के कारण दुनिया में लाखों लोगों ने जान गंवाई है। इसके हल्के और घातक दोनों स्वरूप सामने आए हैं। ब्रिटेन की ब्रिटिश हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी के हाल के एक अध्ययन से पता चला है कि वर्तमान में 3 हाइब्रिड कोविड वेरिएंट चल रहे हैं। इसमें डेल्टा और बीए-1 के कॉम्बिनेशन से पैदा हुए दो अलग-अलग वेरिएंट एक्सडी और एक्सएफ हैं, जबकि तीसरा एक्सई है। रिपोर्ट के मुताबिक एक्सई वेरिएंट पुराने ओमिक्रॉन के दो सब लीनेज बीए-1 और बीए-2 का रीकॉम्बिनेंट स्ट्रेन है।
हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि जब तक एक्सई वेरिएंट के ट्रांसमिशन और बीमारी के व्यवहार में महत्वपूर्ण बदलाव नहीं देखा जाता तब तक इसे ओमिक्रॉन वेरिएंट से ही जोड़कर देखा जाएगा। उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्कूल खुलने के साथ कोरोना के मामले बढ़ने की खबर आ रही है। दरअसल, भविष्य में किसी भी चुनौती से मुकाबले के लिए सरकार ने अब लड़ाई मजबूत करने का मन बनाया है। सरकार का दावा है कि वह सभी आयु वर्गों की संवेदनशीलता को देखते हुए टीकाकरण अभियान चला रही है।
भारत में अब तक 180 करोड़ कोविड वैक्सीन डोज लग चुकी हैं। भारत की 80 फीसदी वयस्क आबादी को वैक्सीन के दोनों डोज लग चुके हैं जबकि अब तक 94 प्रतिशत वयस्कों को कम से कम एक डोज लग चुकी है। ऐसे में देश के अधिकतर हिस्सों से कोविड संबंधी पाबंदियां हट गई हैं, दफ्तर खुल गए हैं|
जनजीवन सामान्य हो गया है। वहीं दूसरी ओर साठ वर्ष से अधिक आयु वर्ग तथा अग्रिम मोर्चे के कर्मचारियों को 2.4 करोड़ डोज देने की बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय कर रहा है। सरकार कह रही है कि वंचित आबादी के लिए सरकारी टीकाकरण केंद्रों के जरिये निशुल्क मुफ्त टीकाकरण जारी रहेगा, जिसके जरिये स्वास्थ्यकर्मी, अग्रिम मोर्चे के कर्मचारियों तथा साठ वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए बूस्टर डोज दी जाती रहेगी।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि कोविड ने सारी दुनिया को बुरी तरह प्रभावित किया। हमें ये कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारा देश कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल रहा है। फिलहाल अमेरिका में डेढ़ करोड़, ब्रिटेन के में 19 लाख व रूस में पांच लाख संक्रमितों के मुकाबले भारत में संक्रमितों की संख्या महज ग्यारह हजार होना बताता है कि भारत में कोरोना जांच में शिथिलता आई है।
यही वजह है कि केंद्र सरकार ने मास्क की अनिवार्यता खत्म करने के बावजूद कोरोना के खिलाफ नए सिरे से लड़ाई तेज करने का मन बनाया है। इसके लिये केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीते दस अप्रैल से दस से अट्ठारह वर्ष से अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों को कोरोनारोधी डोज लगानी शुरू की गई है। वहीं बूस्टर डोज भी निजी टीकाकरण केंद्रों पर लगाई जा रही है। यह डोज उन लोगों को लग रही है, जिन्हें दूसरी डोज लगे नौ महीने हो चुके हैं।
नि:संदेह सरकार के स्तर पर और नागरिकों के स्तर पर किसी आसन्न संकट के प्रति पूरी सजगता जरूरी है, यह जानते हुए कि विगत में हम उन देशों में शुमार रहे हैं, जिन्होंने संक्रमण की सबसे ज्यादा कीमत चुकाई। कोविड प्रतिबंधों में ढील के ये मायने कतई नहीं हैं कि एक नागरिक के स्तर पर हम लापरवाही बरतने लगें। हमें इस अवस्था में जांच का दायरा बढ़ाना होगा, जिससे हम किसी नये वेरिएंट का समय रहते मुकाबला कर सकें। विशेषज्ञों की माने तो कोविड आउटडोर के बजाए इंडोर में अधिक तेजी से फैलता है।
ऐसे में भारत के भीड़-भाड़ वाले कार्यस्थलों में हाइब्रिड वर्क कल्चर (घर और दफ्तर दोनों जगह से काम करने की संस्कृति) लाने की जरूरत है। ये सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कर्मचारी दफ्तर में मास्क पहनें, और नियोक्ता कर्मचारियों के लिए बूस्टर डोज की व्यवस्था करें। जानकारों के मुताबिक जो भी हालात हों, उन्हें संभाला जा सकता है।


