- फर्जी चिकित्सा प्रमाण पत्र भी आ चुके हैं सामने
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के नाम पर लोगों को आरटीओ आॅफिस में परेशान किया जा रहा हैं। कभी ड्राइविंग स्कूल में भेजा जाता हैं, कभी लखनऊ में ड्राइविंग लाइसेंस अटका होना बताकर मामले को पेंडिंग डाल दिया जाता हैं। इस तरह से आरटीओ में हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के नाम पर 100 से ज्यादा लाइसेंस लटके हुए हैं। आवेदनकर्ताओं को ये लाइसेंस नहीं मिल रहे हैं। यही नहीं, ड्राइविंग लाइसेंस लेने वाले को चिकित्सा प्रमाण पत्र भी देना होता है, लेकिन इसमें भी बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा हैं।
आरटीओ मेरठ आफिस में हर रोज 150 से ज्यादा ड्राइविंग लाइसेंस बनने का स्लॉट बुक किया जाता हैं। हैवी का स्लॉट अलग होता हैं। उसके लिए एक प्रक्रिया ये है कि हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए ड्राइविंग स्कूल का एक प्रमाण पत्र आरटीओ आॅफिस में देना होता हैं। शहर में कई ड्राइविंग स्कूल हैं। कुछ ड्राइविंग स्कूल बंद भी हो गए हैं। इनका प्रमाण पत्र ही अनिवार्य आरटीओ ने कर रखा हैं। हैवी ड्राइविंग लाइसेंस का आवेदन करने वाले को कई प्रक्रिया से गुजरना पड़ता हैं। इस तरह से कई जगह भ्रष्टाचार के बैरियर लगे हुए हैं। प्रत्येक बैरियर पर सुविधा शुल्क देना होता हैं, उसके बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आरआई के पास जाना होता हैं,
जिसके बाद कहा जाता है कि हैवी का ड्राइविंग लाइसेंस लखनऊ से जारी होता हैं, वो कभी पहुंचता ही नहीं हैं। यदि दलाल के माध्यम से हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया गया है तो 15 दिन में बनकर हाथ में मिल जाता हैं। इस तरह से आरटीओ में दलालों से गठजोड़ हैं, जिसके चलते सीधे आवेदनकर्ता को ड्राइविंग लाइसेंस मिलता ही नहीं हैं। यही नहीं, कई मामले ऐसे भी प्रकाश में आये थे कि फर्जी चिकित्सा प्रमाण पत्र लगाकर ड्राइविंग लाइसेंस स्वीकृत कर दिया जाता हैं।

