Monday, March 23, 2026
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भ्रष्टाचार की गहरी जड़े हैं बीएसए कार्यालय में, अधिकारी मौन

  • चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पढ़ा रही पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को
  • फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी करने वाली बर्खास्त शिक्षिका को थी निपुण भारत का प्रशिक्षण देने की तैयारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरकार ने गरीब व कमजोर आय वर्ग के परिवारों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के लिए प्रदेश के सभी जिलों मे सरकारी विद्यालय चला रखे है। इन विद्यालयों में शिक्षा का स्तर अच्छा बना रहे और सरकारी योजना का लाभ स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को मिले इसके लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी बना रखे है, जहां पर विभाग के मुखिया (बीएसए) की तैनाती है।

इनकी जिम्मेदारी है कि जिले में पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक के सभी सरकारी विद्यालयों में छात्रों को हर तरह की शिक्षा व्यवस्था मिले। लेकिन मेरठ बीएसए कार्यालय में सरकार की नीतियों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। इसी वजह से एक प्राथमिक विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी की महिला कर्मचारी शिक्षकों की जगह खुद बच्चों को पढ़ा रही है, जबकि जिस शिक्षिका की भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर सेवाएं समाप्त कर दी गई थी,

उसे अब निपुण भारत योजना में प्रशिक्षण देने की तैयारी थी। वहीं एक मठाधीश लिपिक शासनादेश के बाद भी उसे पिछले नौ सालों से बीएसए कार्यालय मे जमे हुए है। जबकि उनके खिलाफ शासन स्तर तक शिकायते हो चुकी है बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

  • केस-एक

नगर क्षेत्र प्राथमिक विद्यालय भाटवाड़ा में एक भी शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए तैनात नहीं है। ऐसे में यहां पर तैनात चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी साधना बच्चों को पढ़ा रही है। साधना ने बताया कि वह पिछले 15 दिनों से बच्चों को पढ़ा रही है, जबकि उसका काम विद्यालय में साफ-सफाई की व्यवस्था करना, स्टाफ को पानी पिलाना व बच्चों की देखभाल करना है। बावजूद इसके उसे यहां पढ़ाना भी पड़ रहा है।

साधना का कहना है कि फतेउल्लापुर से एक शिक्षक अरविंद कुमार को यहां बच्चों को पढ़ाने भेजा गया था लेकिन वह 15 दिन से नहीं आ रहे है। ऐसे में जो बच्चे यहां शिक्षा लेने आते है उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी उन्होंने संभाली हुई है। एक कमरे में विद्यालय की पांच कक्षाओं के 27 बच्चे बैठते है तो उन्हें पढ़ाने में कोई परेशानी नहीं होती। भले ही वह महज दसवीं कक्षा पास है

लेकिन इतना तो है कि वह पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ा सकती है। जिस समय चतुर्थश्रेणी कर्मचारी बच्चों को पढ़ा रहीं थी तो महज छह छात्र ही मौजूद थे। साधना ने बताया यहां दिनों दिन छात्रों की संख्या कम हो रही है क्योंकि जब कोई शिक्षक ही यहां नहीं है तो बच्चे किसके पास शिक्षा लेने आएंगे।

  • केस-दो

फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी करने वाली बर्खास्त शिक्षिका को निपुण भारत जैसी योजना का हिस्सा बनाने के लिए प्रशिक्षण देने की तैयारी थी। लेकिन जब यह सूची जनवाणी संवाददाता के पास पहुंची तो संबंधित अधिकारी से बात की गई जिसके बाद इस बर्खास्त शिक्षिका का नाम सूची से हटाया गया। गौरतलब है कि बर्खास्त सहायक अध्यापिका निगहत जमील को बीएसए ने बीती 29 अगस्त को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद उनके द्वारा अपने सेवाकाल में जितना वेतन प्राप्त किया गया उसकी रिकवरी व धोखाधड़ी का मुकदमा संबंधित थाने पर दर्ज कराने के आदेश बीएसए ने दिये थे।

लेकिन विभाग की करतूत पर नजर डाले तो पता चलेगा कि इस शिक्षिका का रिकार्ड अभी भी विभाग के डाटा में है। इसी वजह से आज से बीआरसी नगर पर जिन 100 शिक्षकों को निपुण भारत योजना के तहत प्रशिक्षण देने के लिए चार दिवसीय शिविर का आयोजन किया जा रहा है उसकी सूची में बर्खास्त शिक्षिका का नाम भी शामिल था। हालांकि एबीएसए नगर सतेन्द्र कुमार ने इसे मानवीय भूल बताया लेकिन इसके पीछे किसी साजिश की बू आ रही है।

  • केस-तीन

शासन से कई बार आदेश आ चुका है कि जिला मुख्यालय पर कोई भी अधिकारी व कर्मचारी तीन साल से अधिक समय तक नहीं रहेगा। इसको लेकर कई लिपिको को इधर से उधर किया गया लेकिन वरिष्ठ लिपिक प्रदीप बंसल आज भी अपनी सीट पर जमे है। उन्हें इस कार्यालय में 9 साल से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन इन्हें यहां से दूसरी जगह नहीं भेजा गया।

हालांकि चर्चा है कि शासनादेश से पहले ही कागजों में इन्हें किसी बीआरसी पर भेजा जा चुका है लेकिन सच्चाई इससे उलट है। यह आज भी उसी सीट पर जमे हुए है और बीएसए के चहेते बने है। अब सवाल यह उठता है कि ऐसा क्या कारण है कि बीएसए भी इन्हें अपने कार्यालय से भेजने को तैयार नहीं है।

जबकि यह वरिष्ठ लिपिक कागजों पर कहीं और नौकरी कर रहे है। अगर कागजों पर इन्हें कहीं और भेजा गया है तो इनकी जगह किसे लाया गया है इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है। यह मठाधीश वरिष्ठ लिपिक किसकी शह पर शासनादेश की धज्जियां उड़ा रहे है।

विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बच्चों को पढ़ा रही है यह बात बेबुनियाद है। यहां पर एक अध्यापक पहले अटैच थे जो अब वापस चले गए है। इसके बाद एक शिक्षामित्र को यहां भेजा गया है जो बच्चों को पढ़ाने आएंगे। गुरूवार से बच्चों को शिक्षक द्वारा पढ़ाया जाएगा। -सतेन्द्र कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी नगर

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