- विदेशों से बेकार कागजों की आपूर्ति हुई प्रभावित
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्रदेश की पेपर मिलों के बंद होने का खतरा है क्योंकि कोरोना ने कई यूरोपीय देशों और अमेरिका के बेकार कागज आयातों को प्रभावित किया है। अब हालात यह हो गए हैं प्रदेश की पेपर मिलें बेकार कागजों की कमी से जूझ रही है और सरकार से मदद की गुहार लगा रही है।
कच्चे माल की आपूर्ति की मार को देखते हुए तमाम उद्योगपति मदद के लिए सरकार की ओर देख रहे हैं। प्रदेश में इस वक्त 120 पेपर मिलें हैं, जिनमें से 25 मिलें मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में स्थित हैं। कच्चे माल की कमी से परेशान मिल मालिकों ने सरकार से गुहार लगाई है कि ऐसे कठिन वक्त में उनको मदद की जरूरत है।
संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई यूरोपीय देश कोविड के बढ़ते मामलों के साथ लॉकडाउन के एक और चरण में तेजी से बढ़ रहे हैं। उन देशों में बेकार कागज संग्रह को रोक दिया गया है। इसके अलावा अपशिष्ट कागज की खेप के शिपमेंट में भिन्नता है। इन सभी कारकों के कारण पेपर मिलों में कच्चे माल की भारी कमी हो गई है और पूरे प्रदेश के पेपर मिलों के बंद होने का खतरा बढ़ने लगा है।
पेपर मिल मालिकों ने इस समस्या से निपटने के लिये आपस में विचार विमर्श करना शुरू कर दिया है और संकट से निकलने के लिये सरकार से उम्मीदें लगा रहे हैं। दिल्ली पेपर मिल्स और क्राफ्ट पेपर मिलों के लिए अपशिष्ट पेपर का एक बड़ा निर्यातक भी है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी भी पुनर्खरीद वाले कच्चे माल को उपलब्ध कराने में असमर्थ है।
स्थानीय बाजतार के द्वारा बेकार कागज की रिकॉर्डिंग के अलावा, बेकार कागज की कीमत भी मजदूरों की कमी से बढ़ी है। दो माह पहले बेकार कागज की कीमत 10 रुपये प्रति किलो थी, अब इसकी लागत 18 रुपये प्रति किलोग्राम है। पेपर मिल मालिकों का मानना है हमें अपने अस्तित्व के लिए सरकार से परिवहन पर सब्सिडी की आवश्यकता है। मुजफ्फरनगर में चार पेपर मिलें इसी कारण से बंद भी चुकी है।

