जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने बीते 15 दिनों में करीब 41 फीसदी की तेज बढ़ोतरी दर्ज की है। 27 फरवरी को तेल की कीमत लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल थी, जो शनिवार तक बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से तेज हुआ सैन्य टकराव है। इस दौरान अमेरिकी और इस्राइली बलों ने ईरान के सैन्य ठिकानों और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया। इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है।
विशेषज्ञों की राय?
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि आने वाले सप्ताह में वैश्विक बाजार में तेजी और उतार-चढ़ाव जारी रह सकते हैं। उनका कहना है कि निवेशक पूरी तरह इस संघर्ष से जुड़ी घटनाओं पर नजर रखेंगे, जैसे कि संबंधित देशों के अधिकारी तनाव कम करने या कूटनीतिक समाधान की दिशा में क्या संकेत देंगे।
पोनमुडी आर ने चेताया कि यह संघर्ष केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक बॉन्ड यील्ड, मुद्रा बाजार और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर भी असर डालेगा। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति सख्त हो सकती है, जिससे एशियाई बाजारों में महंगाई की उम्मीदें बढ़ सकती हैं और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन सकता है।

