Saturday, April 4, 2026
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मशरूम की खेती कर किसान कमा सकते हैं अच्छा मुनाफा

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: प्रशांत अहलावत, पादप रोग विज्ञान विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, कैपस एवं ललित कुमार, फसल प्रणाली अनुसंधान संस्थान किसानों को मशरूम की खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसान के लिए यह खेती मुनाफे का सौदा है।

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इसके लिए उन्होंने किसानों को इस खेती के बारे में जानकारी दी है। पिछले कुछ वर्षों से भारतीय बाजार में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ी है। जिस हिसाब से बाजार में इसकी मांग बढ़ी है। उस हिसाब से अभी इसका उत्पादन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में किसान मशरूम की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

युवा इसे तेजी से अपना रहे हैं क्योंकि इसमें आमदनी अधिक है और इससे रोजगार भी मिल रहा है। नवीन लघु उद्योग के रूप में मशरूम की खेती पहचान बढ़ा रही है। मशरूम हजारों वर्ष पूर्व से ही पोस्टिक वह औषधीय दोनों रूपों में जाना जाता है।

इसे शाकाहारी मीट के नाम से भी जानते है। मशरूम में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है तथा वसा और कार्बोहाइड्रेट कम मात्रा में होने के कारण यह डायबिटीज वह हृदय रोगों के लिए बहुत उपयोगी है। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी लगभग हजारों प्रजातियां हमारी धरती पर मौजूद है, लेकिन भारत में खेती के लिए केवल तीन तरह के मशरूम का उत्पादन ही अधिक होता है।

मशरूम या ओयस्टर मशरूम

बटन मशरूम यह भारत में उगाई जाने वाली सबसे लोकप्रिय किस्म है। यह 80 से 90% आद्रता व 15 से 25 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर उगाया जा सकता है इस की नई किस्में 22 विकसित की गई है। मशरूम यह दक्षिण भारत में समुद्र तटीय इलाकों में उगाई जाने वाली सबसे उपयुक्त मशरूम है यह भारत के उत्तरी मैदानी भागों में अक्टूबर से अप्रैल तक उगाया जा सकता है। जलवायु व तापमान मशरूम की खेती के लिए विशेष तापमान सापेक्षिक आर्द्रता आवश्यक होती है। बटन मशरूम 15 से 25 डिग्री तापमान पर ली जाती है।

बुवाई का समय

उत्तरी मैदानी भागों में अक्टूबर से अप्रैल तक उगाई जा सकती है।

मशरूम अथवा स्पान की मात्रा

स्पान मशरूम के बीज को कहते है। बीज की गुणवत्ता का उत्पादन पर बहुत असर होता है। इसलिए बीज अच्छी भरोसेमंद दुकान से ही लेना चाहिए। बीज एक माह से अधिक पुराना भी नहीं होना चाहिए।

भूमि का चयन

मशरूम की खेती के लिए भूमि की जरूरत नहीं पड़ती इसे भूमि रहित खेती भी कहते है। मशरूम की खेती कमरों ग्रीन हाउस तथा गैर आजादी में आसानी से कर सकते हैं। मशरूम की खेती विशेष प्रकार से निर्मित मशरूम उत्पादन कक्ष में करना उत्तम रहता है। औद्योगिक उद्देश्य से मशरूम की खेती वातानुकूलित उत्पादन कक्ष में की जाती है।

मशरूम खेती के लिए कंपोस्ट तैयार करना

मशरूम की खेती के लिए कंपोस्ट आसानी से एक माह में तैयार कर सकते हैं इसके लिए हवलदार पक्का फर्श का उपयोग करते हैं भूसा अधिकतम चार सेंटीमीटर से अधिक लंबा नहीं होना चाहिए

बीज की मात्रा

कंपोस्ट खाद के वजन के दो से ढाई प्रतिशत के बराबर ले बीज को पेटी में भरी कंपोस्ट पर बिखेर दें तथा उस पर दो से तीन सेंटीमीटर मोटी कंपोस्ट की एक परत और चढ़ा दें अथवा पहली पेटी में कंपोस्ट की तीन इंच मोटी परत लगाएं और उस पर बीज की आधी मात्रा बिखेर दे।

उस पर फिर से तीन इंच मोटी कंपोस्ट की परत बिछा दें और बाकी बचे बीज उस पर बिखेर दे। इस पर कंपोस्ट की एक पतली परत और बिछाने बुवाई के बाद थैलियों को वहां रख दें। जहां पर उत्पादन करना हो। इन पर पुराने अखबार बिछाकर पानी से भिगो दे।

कमरे में पर्याप्त नमी बनाने के लिए कमरे के फर्श और दीवारों पर भी पानी छिड़कने रहे। इस समय कमरे का तापमान 22 से 26 डिग्री सेंटीग्रेड और नमी 80 से 85% के बीच होनी चाहिए। अगले 20 दिन में मशरूम का कवक जाल पूरी तरह से कम पोस्ट में फैल जाएगा।

कीट और उनका नियंत्रण

सूत्र कर्मी मशरूम के कवक जाल को खाते है। जिससे जाल फैल नहीं पाता और धीरे-धीरे लुप्त हो जाता है।

बचाव और रोकथाम

मशरूम उत्पादन क्षेत्र की पर्याप्त साफ सफाई करनी चाहिए।

मशरूम की मक्खियां

मक्खियां मशरूम की टोपी में छेद कर देती है। जिससे मशरूम की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

बचाव और रोकथाम

इस कवक की रोकथाम के लिए मशरूम उत्पादन कक्ष में इंडोफिल एम 45 की दो ग्राम दवा को एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करे।

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