जून को अपनी जिस तपन पर घमंड था उस घमंड को दिसंबर ने चकना चूर कर दिया है। दिसंबर के परफोरमेंस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अहंकार का नाश निश्चित है। अभी तक जून अपराजय था। उसकी लपटे तेज गति से गेंद फेंक रही थी, उसके लू वाले शॉट ने कहर बरपा दिया था। उसे लोगों के पसीना निकाल देने पर घमंड था। इस बार जून को दिसंबर ने जो मुंह तोड़ जवाब दिया है, जिससे जून सकते में आ गया है। कलेंडर की सत्ता पर जून का कब्जा था। जन जन का प्रिय जनवरी सब को सुधरने का हर साल एक नया अवसर दे रहा था, लेकिन जनवरी जितने प्रेम से प्रेम का आग्रह करता जून का आतंक उतना ही बढ़ जाता। वह पानी को सुखा देता, वायु को गर्म कर देता, हरियाली को नष्ट कर देता।
फरवरी कैलेंडर परिवार का सबसे छोटा सदस्य था, इसलिए चाह कर भी जून से टकरा नही सकता था। उसकी ताकत सीमित थी। फरवरी प्रेम का संदेश देता था, रंग बिखेरता था मार्च और अप्रैल पूरी तरह जून की गिरफ़्त में थे। मार्च उसके लिए मुखबिरी करता, उसे घुसपैठ के लिये रास्ता देता। अप्रैल उसके रहने और भोजन का प्रबंध करता और मई अपनी भट्टी का उसे र्इंधन देता, जिससे जून अपने हथियार बनाता। इन गद्दारों के सहयोग से ही वह दानव मानव पर अत्याचार करता था।
लेकिन कहते हैं न जालिम का जुल्म सदा नही चलता। जब अत्याचार बढ़ जाता है, तब उसके नाश के लिए रस्ते बनना आरंभ हो जाते हैं। जून के सीमावर्ती राज्यों जुलाई, अगस्त और सितंबर में जून के विरोध में दबे स्वर में बात होने लगी। धीरे-धीरे यह दबा स्वर मुखरित होने लगा इन राज्यों ने अपना सिंडिकेट बना लिया। जून को अपनी ताकत का घमंड था। इस घमंड के नशे में वह इतना मदमस्त था कि उसे अहसास भी नही हुआ कि उससे मुक्ति के लिए लोग लामबंद हो रहे हैं।
कैलेंडर के दक्षिण क्षेत्र में जून के खिलाफ जो सिंडिकेट बना था, उसके रणनीतिकारों ने तय किया कि जून से निपटने की ताकत दिसंबर में है, लेकिन दिसंबर को अपनी ताकत का अहसास नहीं हो, इन्होंने दिसंबर का हर तरह से सहयोग करने का आश्वासन दिया। गुप्त स्थानों पर दिसंबर के इकतीस सिपाहियों को प्रशिक्षण दिया जाने लगा। अब अच्छे लोग खराब लोग के खिलाफ खड़े होने के लिए तैयार हो रहे थे।
खराब में कभी इतनी ताकत नही होती कि वह अच्छे को दबा सके। बस अच्छों को संगठित होने की जरूरत ह।े जून के लिये जो काम मार्च , अप्रेल और मई कर रहे थे वही भूमिका दिसंबर के लिये जुलाई, अगस्त, सितंबर निभा रहे थे। अक्टूबर और नवंबर हर हाल में सिंडिकेट का साथ देने के लिए वचनबद्ध थे। जून के खिलाफ यह आंदोलन इतना गुप्त और सुनियोजित था कि जून को इसकी भनक भी नहीं लगने पाई। जून का गुप्तचर विभाग पूरी तरह नाकामयाब रहा। दिसंबर ने अत्याचारी जून पर इतना बड़ा हमला किया कि आग का यह गोला भूमिगत हो सर्दी से ठिठुरते हुए कही आ

