- विकास भवन, बैंकों और निजी कार्यालयों में रैंप की व्यवस्था नहीं
- दिव्यांग करते हैं सहारे का इंतजार
- दिव्यांगों का कहना सरकार के सारे दावे फेल
- नहीं मिल रही आने-जाने तक की सुविधा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर में सार्वजनिक स्थानों के साथ-साथ बैंकों व निजी कार्यलय में रैंप की सुविधा नहीं है। कचहरी में विकास भवन में ऊंचाई काफी ज्यादा है तथा प्रवेश के लिए भी सीढ़ियां ही हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं के जुड़ी जानकारी या काम के लिए आने वाले दिव्यांगजनों को काफी परेशानी होती है।
दिव्यांगों का कहना है कि रैंप न होने के कारण दिव्यांगजनों को किसी सहारे का इंतजार करना पड़ता है। दिव्यांग नितिन ने बताया कि शहर में कई बैंकों व एटीएम की ऊंचाई ज्यादा है। इनमें आवागमन के लिए केवल सीढ़ियां बनाई गई हैं। इससे जरूरी काम के लिए विकास भवन, बैंक व एटीएम तक दिव्यांग नहीं पहुंच पाते हैं। जिस पर इन्हें बाहर बैठकर मदद मांगने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सरकारी भवनों तथा विकास भवन जहां पर प्रतिदिन लोगों का आना जाना लगा रहता है। वहां भवन के गेट पर व्हील चेयर का होना जरूरी है। ऐसी जगहों पर अगर कहीं दिव्यांगजनों को आवेदन देना होता है तो वे किसी की मदद से अपने आवेदन को उसके विभाग तक पहुंचा पाते हैं। अगर कहीं प्रथम तल के कार्यालय में पहुंचने के लिए दिव्यांगजनों के लिए रैंप की व्यवस्था कर दी जाए तो उन्हें इन दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
इससे उन्हें परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है। वहीं, शहर के सबसे महत्वपूर्ण विकास भवन में रैंप की सुविधा नहीं है। इससे दिव्यांगों को खास दिक्कत झेलनी पड़ रही है। छोटे-मोटे कामकाज या फिर सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी को लेकर दिव्यांग विकास भवन पहुंचते हैं, लेकिन रैंप की सुविधा नहीं होने से कई घंटों तक मदद के लिए इंतजार करना पड़ता है।
बता दें कि विकास भवन में प्रथम व द्वितीय तल पर कई सारे विभाग बने हुए हैं। इनमें समाज कल्याण विभाग, कृषि विभाग, दिव्यांग कार्यालय समेत अन्य कई महत्वपूर्ण अधिकारियों के कार्यालय प्रथम व द्वितीय मंजिल पर हैं।
ऐसे में इनमे कामकाज को लेकर पहुंचने वाले दिव्यांगों को अधिकारियों के आॅफिस से बाहर नीचे आने का इंतजार करना पड़ता है। वहीं, विकास भवन आए दिव्यांग राहुल ने कहा कि जिले में अधिकांश कार्यालयों की यही स्थिति है।
एक तरफ सरकार दिव्यांगों की मदद को लेकर लाख दावे कर रही है, लेकिन उनके ही सरकारी कार्यालयों में उन्हें आने-जाने सुविधा भी नहीं मिल रही है।
समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों से देखें तो जिले में कई हजार दिव्यांग हैं। इन लोगों को सरकारी कार्य के लिए दफ्तर आना पड़ता है, लेकिन किसी भी दफ्तर में रैंप नहीं होने के कारण इन्हें कई बार बैरंग वापस लौटना पड़ता है।

