- मीट कारोबारियों की ओर से दायर की गई रिट पर सुनवाई के बाद दिए आदेश
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हाईकोर्ट ने डीएम और नगरायुक्त को आगामी आठ फरवरी को पेश होने के लिए समन जारी किए हैं। हाईकोर्ट के जस्टिस पंकज नकवी व पीयूश अग्रवाल की संयुक्त बैंच जो इस मामले की सुनवाई कर रही है, ने दो फरवरी मंगलवार को दोनों अधिकारियों को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए इस आश्य के आदेश किए हैं। कोर्ट में इसको लेकर अफजाल कुरैशी व तीन अन्य ने रिट दायर की है।
रिट में कहा गया है कि साल 2013 में दशकों पुराना हापुड़ रोड स्थित पशु वधशाला को बंद करा दिया गया था, लेकिन अन्यत्र नई आधुनिक वधशाला की स्थापना न किए जाने से पूरे जनपद में मांस की आपूर्ति के लिए जगह जगह घनी आबादी के बीच पशुओं को अवैध कटान किया जा रहा है।
इनमें से कुछ इलाके संकीर्ण आबादी के बीच भी स्थित हैं, जहां अवैध कटान हो रहा है। कटान से भारी मात्रा में अपशिष्ट पदार्थ एवं वध किए जाने वाले पशुओं के अवशेषों के कारण भारी दुर्गंध व गंदगी रहती है। पशुओं की तस्करी में भी भारी वृद्धि हुई है। कटान के बाद पशुओं के अवशेष नाले नालियों में खपाए जा रहे हैं।
महागनर में लगभग 250 से अधिक मीट विक्रेताओं द्वारा मांस की बिक्री की जा रही है। नगर निगम प्रशासन द्वारा मीट की आपूर्ति की व्यवस्था न किए जाने के कारण ऐसा हो रहा है। इन सभी दुकानों पर अवैध रूप से कटान किए जाने वाले पशुओं का ही मीट बिक रहा है।
नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 114 की उप धारा 21 एवं अध्याय 16 की धारा 421, 422, 423 एवं 426 का नगर निगम द्वारा स्वयं उल्लंघन किया जा रहा है। महानगर में मेरठ में अधिकृत पशु वधशाला ना होने के कारण सघन आबादी के क्षेत्रों में जगह-जगह पशुओं के अवैध कटान के कारण अपशिष्ट व पशु अवशेषों का समुचित निस्तारण नहीं हो रहा हे। भयानक एवं गंभीर प्रदूषण फैलने लगा है।
जिला प्रशासन मेरठ एवं नगर निगम बोर्ड ने विगत आठ सालों से कमेला स्थापना एवं संचालन की दशा में कोई कार्रवाई नहीं की है। मांसाहार ग्रहण करने वाली एक पर्याप्त जनसंख्या मौजूद है। मांसाहार के लिए अधिकृत स्थल एवं समुचित पर्यावरण हित के दृष्टिगत उचित कटान न होने के कारण महानगर मेरठ के अन्य नागरिकों के जनजीवन के साथ एवं पर्यावरण से खिलवाड़ किया जा रहा है।

