- महिलाओं को नहीं दी जाती ट्रेनिंग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर में ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक नहीं है। हालांकि आरटीओ में टेस्टिंग परीक्षा भी होती है तथा आॅन रिकॉर्ड कार भी ड्राइविंग लाइसेंस बनने से पहले चलवाई जाती है। यह सब कागजों में हो रहा है, धरातल पर नहीं।
प्राइवेट लोगों ने ड्राइविंग स्कूल खोल रखे हैं, जिनको परिवहन विभाग की तरफ से अनुमति दी गई हैं, लेकिन इसमें भी महिलाओं को ड्राइविंग सीखाने के लिए कोई ट्रेनिंग स्कूल नहीं है। नियम तो यह है कि संभागीय परिवहन विभाग अपना ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनाकर तैयार करें, जहां पर लोगों को कार चलाना सीखाया जाना चाहिए। ड्राइविंग ट्रैक पर ही लोगों को ड्राइविंग की ट्रेनिंग दी जा सकती है, लेकिन यहां तो सरेआम सड़क पर भीड़भाड़ में ड्राइविंग की ट्रेनिंग प्राइवेट स्कूल संचालक दे रहे हैं।
ऐसे में कोई दुर्घटना भी हो सकती हैं, जिसका जिम्मेदार कौन होगा? यही नहीं, लर्निंग व परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से पहले यह ट्रेनिंग होनी चाहिए,मगर यहां पर कागजों में टेस्ट ले लिया जाता हैं, बाकी धरातल पर प्राइवेट स्कूल की तरफ से जो कागज तैयार करके दे दिये जाते हैं, उन पर ही विश्वास कर लिया जाता है। इसमें भी बड़ा खेल चल रहा है।
पैसा दो और ड्राइविंग स्कूल से प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया जाता है,जो बेहद खतरनाक खेल हैं। शहर में जो ट्रेनिंग स्कूल खुले हैं, उनकी विश्वस्नीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि कुछ ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं, जिनको ट्रक चलाना तक नहीं आता, लेकिन उनको भारी वाहन के ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिये गए हैं। इस तरह के मामले भी सामने आ रहे हैं। इस तरह के मामलों की जांच होनी चाहिए, तभी सरकारी सिस्टम में जो भ्रष्टाचार हो रहा है, वह रुक सकता है।

