
दीपक गिरकर |
‘दिसम्बर संजोग’ आभा श्रीवास्तव का दूसरा कहानी संग्रह है। इस संग्रह में 10 कहानियां संग्रहित हैं। आभा श्रीवास्तव ने स्त्री विमर्श के विविध आयामों को ‘काली बकसिया’ तथा ‘दिसम्बर संजोग’ संग्रहों की कहानियों के माध्यम से सफलतापूर्वक हमारे सामने प्रस्तुत किया हैं। आभा श्रीवास्तव ने स्त्री पीड़ा को, उसकी इच्छाओं, आकांक्षाओं, भावनाओं और सपनों को अपनी कहानियों के माध्यम से चित्रित किया हैं। स्त्रियों के जीवन संघर्ष को और उनके सवालों को रेखांकित किया हैं। उनके यथार्थवादी जीवन, पारिवारिक रिश्तों के बीच का ताना-बाना, दोगलापन, रिश्तों का स्वार्थ, रिश्तों का विद्रूप चेहरा, विवाहपूर्व प्रेम, विवाहपूर्व दैहिक संबंध, गिरती नैतिकता, अनैतिक संबंध, दहेज प्रथा, माता-पिता का तनाव, असंतुष्ट दाम्पत्य जीवन, मन की हीन ग्रंथियां, आर्थिक अभाव, पुरुष मानसिकता, सामंती व्यवस्था के अवशेष, पुरुषों के उदंड आचरण, स्त्री जीवन का कटु यथार्थ, विधवा की मार्मिक व्यथा, बेबसी, शोषण, उत्पीड़न, स्त्री संघर्ष, स्त्रीमन की पीड़ा, स्त्रियों की मनोदशा, नारी के मानसिक आक्रोश आदि का चित्रण मिलता है। संग्रह की सभी कहानियां मानवीय संवेदनाओं को चित्रित करती मर्मस्पर्शी, भावुक हैं।
आभा श्रीवास्तव की कहानियों में सिर्फ पात्र ही नहीं समूचा परिवेश पाठक से मुखरित होता है। कथाकार ने नारी जीवन के विविध पक्षों को अपने ही नजरिए से देखा और उन्हें अपनी कहानियों में अभिव्यक्त भी किया हैं। आभा श्रीवास्तव ने मुखर होकर अपने समाज और अपने समय की सच्चाइयों का वास्तविक चित्र प्रस्तुत किया हैं। कहानियों के पात्र अपनी जिंदगी की अनुभूतियों को सरलता से व्यक्त करते हैं। ये कहानियां एक साथ कई पारिवारिक और सामाजिक परतों को उधेड़ती हैं। सहज और स्पष्ट संवाद, घटनाओं, पात्रों और परिवेश का सजीव चित्रण इस संग्रह की कहानियों में दिखाई देता हैं। कहानी के पात्र हमारे आस पास के परिवेश के लगते हैं। लेखिका ने परिवेश के अनुरूप भाषा और दृश्यों के साथ कथा को कुछ इस तरह बुना है कि कथा खुद आंखों के आगे साकार होते चली जाती है। कथाकार ने समकालीन सच्चाइयों तथा परिवार में स्त्रियों की हालत को निष्पक्षता से प्रस्तुत किया है। कथाकार ने स्त्री के अंतर्मन मे उठती हर लहर को बहुत ही खूबसूरती से अपनी कहानियों में उकेरा हैं।
पुस्तक : दिसम्बर संजोग, लेखिका : आभा श्रीवास्तव, प्रकाशक : सन्मति पब्लिशर्स, हापुड़, मूल्य : 160 रुपये।


