Sunday, March 22, 2026
- Advertisement -

अहंकार की गति

 

SAMVAD


एक मूर्तिकार उच्चकोटि की ऐसी सजीव मूर्तियां बनाता था, जो सजीव लगती थीं। लेकिन उस मूर्तिकार को अपनी कला पर बड़ा घमंड था। उसे जब लगा कि जल्दी ही उसक मृत्यु होने वाली है तो वह परेशानी में पड़ गया। वह सोचने लगा कि यमदूतों को कैसे चकमा देकर जीवित रहा जाए। कई दिन सोचने के बाद उसके दिमाग में एक युक्ति आई। वह बहुत खुश हुआ। यमदूतों को भ्रमित करने के लिए उसने एकदम अपने जैसी दस मूर्तियां उसने बना डालीं और योजनानुसार उन बनाई गई मूर्तियों के बीच मे वह स्वयं जाकर बैठ गया। यमदूत जब उसे लेने आए तो एक जैसी ग्यारह आकृतियां देखकर स्तम्भित रह गए। इनमें से वास्तविक मनुष्य कौन है- नहीं पहचान पाए। वे सोचने लगे, अब क्या किया जाए। मूर्तिकार के प्राण अगर न ले सके तो सृष्टि का नियम टूट जाएगा और सत्य परखने के लिये मूर्तियां तोड़ें तो कला का अपमान होगा। अचानक एक यमदूत को मानव स्वभाव के सबसे बड़े दुर्गुण अहंकार की स्मृति आई। उसने चाल चलते हुए कहा-काश इन मूर्तियों को बनाने वाला मिलता तो मैं से बताता कि मूर्तियां तो अति सुंदर बनाई हैं, लेकिन इनको बनाने में एक त्रुटि रह गई। यह सुनकर मूर्तिकार का अहंकार जाग उठा कि मेरी कला में कमी कैसे रह सकत है, फिर इस कार्य में तो मैंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया है। वह बोल उठा-कैसी त्रुटि? झट से यमदूत ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला, बस यही त्रुटि कर गए तुम अपने अहंकार में। क्या जनते नहीं कि बेजान मूर्तियां बोला नहीं करतीं।


janwani address 9

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

सुरक्षित उत्पाद उपभोक्ता का अधिकार

सुभाष बुडनवाला उपभोक्ता जब भी कोई वस्तु या सेवा खरीदें,...

UP: केसी त्यागी का रालोद में स्वागत, पश्चिमी यूपी की राजनीति में आ सकते हैं नए मोड़

जनवाणी ब्यूरो | यूपी: वरिष्ठ राजनेता किशन चंद (केसी) त्यागी...

कौन चला रहा है दुनिया?

प्रेरणा इतिहास में कभी-कभी कुछ ऐसा घटता है कि दुनिया...

Dhurandhar 2: अनुपम खेर ने ‘धुरंधर 2’ विवाद पर जताई नाराजगी, कहा- ‘ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए’

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...
spot_imgspot_img