Saturday, March 14, 2026
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बिजली कर्मियों को बनाया बंधक, अधिकारियों का घेराव

  • बमुश्किल पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कराया टीम को बंधनमुक्त

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भावनपुर थाने के गांव मुबारिकपुर आश्रम पर रविवार को विद्युत विभाग की टीम के जेई रणवीर, एसडीओ रविंद्र यादव, एक्सईएन रविंद्र प्रकाश पर पहुंचे। जहां पर स्याल के ग्रामीणों द्वारा जंगल की लाइन काटने को लेकर मौका-ए-मुआयना कर दोबारा जोड़ने का प्रयास किया। जिस पर गांव स्याल के ग्रामीणों ने स्याल फिटर पर विद्युत विभाग के दो कर्मचारियों को बंधक बनाया था। जिसकी सूचना पर भावनपुर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी करते हुए बंधक बने अधिकारियों के बंधनमुक्त कराते हुए अगले रोज लाइन चालू कराने का आश्वासन दिया।

गांव स्याल के ग्रामीणों ने उच्चाधिकारी के कहने पर जंगल की जर्जर लाइन को काटते हुए जान माल का नुकसान होने का खतरा की जानकारी दी। गांव मुबारिकपुर के किसान ऊर्जा भवन पहुंचे और मामले की जानकारी दी। वहीं, विभाग के आलाधिकारी जांच को स्याल विद्युत उपकेंद्र पहुंचे। जिस पर स्याल के ग्रामीणों ने लाइन जोड़ने का विरोध करते हुए बंधक बना दिया। सूचना मिलते ही गांव मुबारिकपुर के लोग आश्रम पहुंचे। जहां हंगामा करते हुए जंगल की लाइन न जोड़ने पर गांव की लाइट भी काटने की धमकी दे डाली।

वहीं, इस संबंध में भावनपुर एसओ संजय द्विवेद्वी ने बताया कि फिलहाल आश्रम की लाइट चालू करा दी गई है। वहीं, आज ग्रामीणों से वार्ता कर अन्य स्थानों की लाइन भी चालू कराने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, सभी विद्युत विभाग के अधिकारियों को बंधनमुक्त कराते हुए मामले को शांत कराया। इस दौरान सीमा प्रधान पुत्र गुड्डू प्रधान और जिला पंचायत प्रत्याशी कृष्ण पाल नागर, राहुल, पिंटू, लोकेंद्र, परविंदर आदि मौजूद रहे।

गांव में लाइट काटने का हुआ ऐलान

गांव मुबारिकपुर में जंगल की लाइन न जोड़ने पर ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए गांव की लाइट भी काटने का ऐलान कर दिया। इस पर गांव में अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। वहीं, गृहणियों ने जल्दी पानी भरकर रखना शुरू कर दिया।

अगस्त माह तक का मिला समय

गांव मुबारिकपुर के ग्रामीणों ने एक्सईएन रविंद्र प्रकाश से बातचीत करते हुए अगस्त माह तक पूरे जंगल की लाइन चालू करने की चेतावनी दी। वहीं, अगस्त माह तक चालू न होने पर बडेÞ स्तर पर किसान हंगामे के लिए विवश होंगे।

संविदा कर्मियों ने आस्तीन और अफसरों ने चढ़ाई त्योरी

मेरठ: तबादला नीति को लेकर पीवीवीएनएल के संविदा कर्मचारी और उच्च पदस्थ अफसर आमने-सामने हैं। संविदा कर्मियों ने तबादला नीति के विरोध में सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है। जबकि पीवीवीएनएल का कहना है कि नौकरी करनी है तो जो आदेश लखनऊ से आया है, उसको मनना तो पडेÞगा। इस मुद्दे को लेकर टकराव के आसार साफ नजर आ रहे हैं। वहीं, आदेश में कहा गया है कि जो संविदा कर्मचारी तीन साल से ज्यादा एक ही बिजलीघर पर जमे हैं, उनका तबादला किया जाएगा। पावर कॉरपोरेशन चेयरमैन ने निर्देश के बाद पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने इसका आदेश सभी अधीक्षण अभियंताओं को जारी कर दिया है।

जल्द ही दूसरी बिजली कंपनियां भी इस संबंध में आदेश जारी करेंगी। अभी तक तबादला नहीं होता था। संविदाकर्मियों और टीजी-2 कर्मियों का तबादला नहीं होता था। वे जिस उपकेन्द्र पर तैनात रहते हैं। उन्हें वहीं तैनात रखा जाता था। पावर कॉरपोरेशन चेयरमैन के निर्देश के मुताबिक, जो संविदाकर्मी एक ही उपकेन्द्र पर तीन साल से अधिक समय से तैनात हैं, उसे हटाया जाए। इसी तरह एक उपकेन्द्र पर 5 साल से अधिक समय से तैनात टीजी-2 कर्मियों को हटाया जाएगा। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि कोई भी संविदा कर्मी उस उपकेन्द्र में नहीं तैनात होगा कि जिस उपकेंद्र के दायरे में उसका घर होगा।

संविदा कर्मियों की ना

वहीं, दूसरी ओर चेयरमैन के इस आदेश को संविदा कर्मियों ने मानने से साफ इंकार कर दिया है। निविदा संविदा कर्मचारी सेवा समिति के अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह का तर्क है कि बिजली महकमे में हर साल संविदा कर्मचारियों का नया ठेकेदार आता है। जब हर साल नया ठेकेदार होगा तो फिर एक संविदा कर्मचारी एक बिजली घर पर भला तीन साल कैसे काम करता माना जा सकता है। जब नेया ठेकेदार आता है तो वो संविदा कर्मचारी से नया अनुबंध भी करता है। भूपेन्द्र सिंह का कहना है कि यदि स्थायी कर्मचारी की मानिंद तबादले करने हैं तो संविदा कर्मचारियों को पहले स्थायी करो फिर कहीं भी तबादला करो। यदि ऐसा नहीं किया तो फिर विरोध तो तय है।

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