- धीमी गति से चला मतदान, मतदाताओं को घर से बाहर निकालने की कोशिश भी हुई नाकाम
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: खतौली विधानसभा के उपचुनाव में कोई खास उत्साह नजर नहीं आया। मतदान बहुत धीमी गति से चला। आलम यह था कि बूथ लगभग सभी स्थानों पर सूने-सूने नजर आये। इक्का-दुक्का मतदाता अपने मत का प्रयोग करने के लिए पहुंच रहे थे, जिसके चलते मतदान स्थलों पर लाइन लगने जैसा नजर बहुत ही कम देखने को मिला।
विधानसभा 2022 के चुनाव में खासतौर से महिलाओं व युवाओं में जो उत्साह देखने को मिला था, वह उपचुनाव में गायब था। विधानसभा 2022 के चुनाव में जहां सुबह सात बजे से महिलाएं व युवाओं की लम्बी लाइनें लग गयी थी, वहीं उपचुनाव में नजारा बदला-बदला सा नजर आया। मतदान स्थल सूने पड़े हुए थे और इक्का-दुक्का मतदाता ही वोट डालने के लिए मतदान स्थल पर पहुंच रहा था। गत विधानसभा चुनाव में जहां सुबह नो बजे तक अच्छा खासा मतदान हो गया था,

वहीं इस बार उपचुनाव में केवल 6.5 प्रतिशत ही मतदान हो पाया था, जबकि 11 बजे तक 20 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि 1.00 बजे तक 33 प्रतिशत तथा 3.00 बजे तक 40 प्रतिशत मतदान हो गया था। पांच बजे तक लगभग 50 प्रतिशत ही मतदान हो पाया था। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मतदाताओं मं कितना उत्साह था।
अधिकतर भट्ठा मजदूरों ने नहीं किया मतदान
2022 के विधानसभा चुनाव में जहां हर वर्ग ने अपना मतदान का लोकतंत्र के महायज्ञ में आहूति दी थी, वहीं 2022 के ही खतौली विधानसभा उपचुनाव में भट्टा मजदूर इस यज्ञ से बाहर दिखायी दिये। देखने में आया कि जो भट्टा मजदूर अपनी मजदूरी पर गये हुए थे, वह मतदान करने के लिए मतदान स्थल तक नहीं पहुंचे, जिसके चलते मतदान प्रतिशत कम रहा।
प्रत्याशियों से नाराजगी भी रही कम प्रतिशत का कारण
विधानसभा उपचुनाव में मतदाताओं की प्रत्याशियों की नाराजगी भी कम मतदान का कारण बनी है। कुछ मतदाता भाजपा विधायक की कार्यप्रणाली से नाराजगी के चलते मतदान स्थल तक नहीं पहुंचे, तो कुछ गठबंधन के बाहरी प्रत्याशी होने के कारण मतदान स्थल तक नहीं पहुंचे, यही ंकारण रहा कि मतदान स्थल सूने-सूने नजर आये।
सशस्त्र सीमा बलों ने संभाला बूथों की सुरक्षा का जिम्मा
मतदान केंद्रों की सुरक्षा का जिम्मा सशस्त्र सीमा बल के जवानों के अधीन रहा। बाहरी सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के जवान तैनात किये गये थे। कई जगह बूथों की छतों पर भी अर्द्धसैनिक बलों के जवान हथियारों के साथ मुस्तैद नजर आये, इनकी मौजूदगी के कारण मतदाता स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे थे।
अपने-अपने क्षेत्रों में छाये प्रत्याशी
मतदान शुरू होते ही जहां मतदान केन्द्रों पर मतदाताओं की लाइन लगनी शुरू हो गई थी, वहीं कुछ मतदान केन्द्रों पर मतदाता ही नजर नहीं आये। ज्यादातर क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के लोगों ने मतदाताओं को पोलिंग बूथों तक ले जाने के लिए अपने अपने अंदाज में व्यवस्था की थी।
कुछ स्थानों पर प्रत्याशियों की ओर से कारों के माध्यम से मतदाताओं को लाने ले जाने की व्यवस्था की गयी तो कहीं पर छोटा हाथी (टाटा ऐस) लगाये गये। मुस्लिम इलाकों में ज्यादातर ई रिक्शा के माध्यम से मतदाताओं को पोलिंग केन्द्रों तक ले जाने की व्यवस्था राजनीतिक पार्टियों के लोगों द्वारा की गयी थी। सवेरे मतदान बेहद धीमी गति से शुरू हुआ और दिन चढ़ने के साथ ही मतदान प्रतिशत बढ़ता चला गया।
बेरोक-टोक चले वाहन, न तो वाहन रोका और न सूंआ भोंका
सोमवार को खतोली विधानसभा के लिए हुए मतदान के दौरान लोग बगैर रोक-टोक के अपने वाहनों से मत देने के लिए पोलिंग स्टेशन पर पहुंचे। चुनाव आयोग द्वारा सख्त आदेश दिये जाने का ही परिणाम रहा कि कहीं भी किसी ने वाहनों में सूआ नहीं भोंका। यद्यपि मतदान केन्द्रों के अन्दर सुरक्षा बलों की जबर्दस्त चौकसी रही। वहां किसी भी तरह नियम का उल्लंघन नहीं हो पाया। अलबत्ता बाहर खड़े ही आराम से लोग आपस में बात करते हुए मतदान केन्द्र तक आ-जा रहे थे। दुपहिया और चार पहिया वाहनों से बेधड़क लोग आ-जा रहे थे।

