
नैतिकता मानव समाज का एक अभिन्न अंग है। नैतिकता व्यक्ति के विकास में एक सीढ़ी के समान है , जिसके सहारे हम अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं। इंसान में नैतिक शिक्षा का होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इसके बिना व्यक्ति पशु की तरह कार्य करने लगता है। अल्बर्ट कैमस के अनुसार, ‘नैतिकता के बिना एक व्यक्ति इस दुनिया पर जंगली जानवर है।’ हमारे द्वारा किए गए किसी भी निर्णय का नैतिक आधार होता है। हमें इस सांसारिक सुखों के लिए ईश्वर ने इस दुनिया में नहीं भेजा है|
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इसी पराकाष्ठा पे अपनी व्यक्तित्व विशेष का सही एवं उपयुक्ता को अपनाते हुए, नैतिक, समाजिक, पारिवारिक एवं उपयोगी पहलूओ को ध्यान मे रखते हुए जीवन को वैकल्पिक विन्दुओ में केंद्रित करना चाहिए। आज हम समाज में देख रहे है कि अन्तरात्मा की आवाज न सुनकर केवल भौतिक सुविधाओं की ओर ध्यान दिया जा रहा है।
मानव जाति नैतिक मूल्यों में गिरावट का सामना करती आ रही है। इसके कारण, लगातार संघर्ष और टकराव होते हैं, जो अक्सर खूनी रूप लेते हैं। नैतिक मूल्यों के अभाव में परिवार बिखर रहे हैं, भाई -बंधू एक दूसरे के लिए लड़ाई-झगड़े कर रहे हैं, नैतिक मूल्यों के अभाव में व्यक्तियों के चरित्र में गिरावट आ रही हैं।
हर व्यक्ति को अपने जीवन को सफल बनाने के लिए नैतिकता का पालन करना चाहिए जिससे कि न सिर्फ व्यक्ति का विकास हो अपितु समाज का भी विकास हो सके। अर्थात हमें एक सफल व्यक्ति बनने की कोशिश करने से अत्यिधक महत्व नैतिक मूल्यों पर चलने वाले व्यक्ति बनने पर देना चाहिए।
-नृपेंद्र अभिषेक नृप


