- पीएम मोदी की रैली के एक दिन पहले भैंसाली बस अड्डे पर होगी बसों की भारी कमी, यात्रियों को होगी परेशानी
- रैली में शामिल होने से आने-जाने वालों के लिए 181 बसें जाएंगी बाहर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सावधान! दो दिन के लिए आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि जो जनता की सुविधा के लिए रोडवेज की बसों का संचालन किया जा रहा है, वे तमाम बसें पीएम नरेन्द्र मोदी की रैली में भाजपा कार्यकर्ताओं को ढोने में लगा दी गई है। आगामी एक और दो जनवरी को यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। आपकों घर से संभलकर निकलना होगा। निजी वाहनों से सफर करें तो बेहतर होगा।

पीएम मोदी की रैली में शामिल होने के लिए मेरठ के आसपास के जिलों से भारी भीड़ जुटने के कयास लगाए जा रहे हैं। आगामी दो जनवरी को सरधना क्षेत्र के सलावा में होने जा रही रैली में भी बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद है। लोगों को उनके गृहस्थलों से लाने के लिए प्रशासन ने रोडवेज से 1000 बसें देने को कहा है।
इसको लेकर रोडवेज के भैंसाली बस अड्डे से ही 181 अनुबंधित बसें दो दिन के लिए सवारियां नहीं ढोएंगी। यह बसें एक जनवरी से गाजियाबाद, मुरादनगर, मोदीनगर, बड़ौत, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बिजनौर आदि जिलों से पीएम की रैली में आने वाली जनता को लाने व ले जाने के लिए तैनात रहेगी। वहीं, दूसरी ओर भैंसाली बस अड्डे पर तैनात मेरठ डिपो की सभी 123 बसें अपने रूटों पर यथावत चलेगी, लेकिन दो दिन के लिए अनुबंधित बसें सड़कों पर न चलने से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। यहां गौर करने वाली बात ये है कि अनुबंधित बसें केवल आसपास के जिलों के लिए ही चलती है।
जबकि लंबे रूट पर मेरठ डिपो की बसें ही चलाई जाती है, जो अपने पूर्व कार्यक्रम के अनुसार चलती रहेंगी। भैंसाली बस स्टैंड की स्टेशन प्रभारी पूनम देवी का कहना है कि रैली के लिए प्रशासन ने मेरठ में चलने वाली सभी 1000 अनुबंधित बसें मांगी हैं, भैंसाली बस स्टैंड से चलने वाली सभी बसों में से 181 बसें ही अनुबंधित बसें है। जिन्हे एक जनवरी से सड़क से हटा लिया जाएगा, लेकिन मेरठ डिपो की सभी बसें अपने रूटों पर यथावत चलती रहेंगी।
मोदी की रैली में शामिल होने के लिए बनाया जा रहा दबाव
एक तरफ तो सरकार महिलाओं के हितों की बात करती है तो दूसरी ओर महिलाओं उत्पीड़न किया जा रहा है। पीएम की रैली में भीड़ जुटाने के लिए स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं पर रैली में जानें का दबाव बनाया जा रहा है। गुरुवार को उत्तर प्रदेश महिला स्वयं सहायता समूह की सैकड़ों महिलाएं हाथों में बैनर लेकर कमिश्नरी चौराहे पर पहुंची।
महिलाओं का आरोप था कि वह पिछले तीन सालों से सरकार द्वारा दिए जा रहे सभी कार्यों को बखूबी करती आ रही है, लेकिन तीन साल बीतने पर भी अभी तक उन्हे कोई पैसा नहीं मिला है। अब उन पर दो जनवरी को सलावा में पीएम की रैली में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही रैली में शामिल नहीं होने पर उन्हें नौकरी से निकाले जाने की धमकी दी जा रही है।
महिलाओं का आरोप है कि इससे पहले भी प्रयागराज में हुई पीएम की रैली में शामिल होने का दबाव बनाया गया था। श्री परमहंस सुरति शब्दयोग चेरिटेबल ट्रस्ट के साथ मिलकर महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर हंगामा किया।
महिलाओं ने प्रशासन पर काम कराने के बाद उनका मेहनताना नहीं देने का आरोप लगाया, उनका कहना है कि उनके विभाग के एडीओ द्वारा रैली में शामिल नहीं होने पर नौकरी से हाथ धाने की धमकी दी जा रही है। प्रदर्शन करने वालों में गांव तोहफापुर, मवाना तहसील की 100 से अधिक महिलाएं शामिल रही।

