- ‘बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय अयोध्या में नहीं थे शिवसैनिक, मैं 18 दिन जेल में रहा’
जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी का दौर जारी है। लाउडस्पीकर से शुरू हुआ विवाद हनुमान चालीसा पर पहुंचा और अभी भी लगातार नेताओं के बीच वार-पलटवार हो रहा है। इसी क्रम में रविवार को महाराष्ट्र के 62वें स्थापना दिवस के मौके पर मुंबई के सोमैया ग्राउंड में महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिव सेना पर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने अयोध्या में 1992 में गिराए गए विवादित ढांचे का जिक्र करते हुए शिव सेना की भूमिका पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने अपनी ‘बूस्टर डोज’ रैली में संबोधित करते हुए कहा कि मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने से डरने वाले लोग कह रहे हैं कि उन्होंने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया। हमसे पूछा जा रहा है कि जब बाबरी मस्जिद तोड़ी गई तो आप कहां थे? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जब बाबरी मस्जिद ढहाई गई तब वह अयोध्या में थे। उन्होंने कहा कि मैं वहां 18 दिन तक जेल में रहा, लेकिन अयोध्या में शिवसेना का कोई नेता नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि मैं इसे मस्जिद नहीं मानता, यह सिर्फ एक ढांचा था।
गौरतलब है कि उन्होंने अपनी रैली की शुरुआत सियापति रामचंद्र की पवनसुत हनुमान की जय के नारे के साथ की थी। आगे संबोधित करते हुए उन्होंने हिंदुत्व के मुद्दे पर सीएम उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा। फडणवीस ने कहा कि आप महाराष्ट्र नहीं हैं, आप हिंदुत्व नहीं हैं। आपके लोगों के भ्रष्टाचार के कारण महाराष्ट्र की बदनामी हो रही है।
शिवसेना सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार (शिवसेना) किसके लिए काम कर रही है, यह बड़ा सवाल है। उनके दो मंत्री जेल में हैं और वे सरकार के फैसलों पर बेशर्मी से जेल में बंद एक मंत्री की तस्वीर छापते हैं। इस दौरान उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि यहां पहले वर्क फ्रॉम होम था अब वर्क फ्रॉम जेल चल रहा है।
इस दौरान उन्होंने राणा दंपति और हनुमान चालीसा का पाठ करने पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा का पाठ करने के नाम पर राणा दंपति को जेल में बंद किया गया है। उनपर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है। क्या हनुमान चालीसा का पाठ करना देशद्रोह हो सकता है?

