Friday, March 20, 2026
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अमलतास पैदा कर के किसान कर सकते हैं बंपर कमाई

अमलतास, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Cassia Fistula के नाम से जाना जाता है, आमतौर पर गोल्डन शॉवर ट्री, इंडियन लबर्नम या लैंटर्न ट्री जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह पौधा फैबेसिए/फैबासीई कुल का सदस्य है। अमलतास मुख्य रूप से भारत और मलेशिया में पाया जाता है, लेकिन यह सभी उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है। यह एक पर्णपाती वृक्ष होता है जिसकी ऊंचाई लगभग 12 से 14 मीटर तक होती है। इसके पत्तों की लंबाई लगभग 35 से 40 सेंटीमीटर तक हो सकती है, और इसकी वृद्धि दर सामान्य होती है।

अमलतास के फूलों का रंग

अमलतास के फूल सुनहरे पीले रंग के होते हैं, जो लटकते गुच्छों में निकलते हैं। इन गुच्छों की लंबाई लगभग 30 से 50 सेंटीमीटर होती है। इसके फल गहरे भूरे रंग के बेलनाकार होते हैं, जिनकी लंबाई 70 सेंटीमीटर तक हो सकती है।

जलवायु और स्थान की उपयुक्तता

जलवायु: यह पौधा उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बेहतर बढ़ता है। इसे गर्म और नम वातावरण पसंद है।

तापमान: अमलतास 10 डिग्री से 38 डिग्री तक के तापमान को सहन कर सकता है, लेकिन पाले और अत्यधिक ठंड से यह प्रभावित हो सकता है।

वर्षा: इसकी खेती के लिए 600 से 1300 मिमी वार्षिक वर्षा उपयुक्त मानी जाती है। साथ ही भूमि में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।

मिट्टी का चयन

अमलतास हर प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है। यह बलुई, दोमट और क्षारीय मिट्टी में भी अच्छी वृद्धि करता है। जरूरी है कि भूमि में जलभराव न हो, यानी जल निकासी उचित होनी चाहिए।

प्रचारण की विधियां

बीज द्वारा प्रचारण: अमलतास का रोपण प्राय: बीजों से किया जाता है। इसके बीजों का बाहरी खोल सख्त होता है, जिससे अंकुरण कठिन होता है। इसके लिए बीजों की स्कारिफिकेशन (खोल को पतला करने) की जाती है।

बोने का समय: बीजों को अप्रैल-मई के दौरान नर्सरी में बोया जाता है और सितंबर तक पौधे रोपण के लिए तैयार हो जाते हैं।

अमलतास की कुछ कोमल शाखाओं को पाले से सुरक्षा की आवश्यकता होती है। यह वृक्ष सूखे को सहन कर सकता है, लेकिन सर्दियों में पत्ते झड़ जाते हैं। गर्मियों में इसे हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है। कुछ मामलों में टहनियों का सिरा सूखने की समस्या देखी जाती है।

फसल की कटाई और उत्पादन

अमलतास के फूलों में मधुमक्खियों द्वारा परागण होता है और यह वृक्ष प्रति वर्ष लगभग 2 मीटर तक बढ़ सकता है। इसके बीजों की अंकुरण क्षमता एक वर्ष से अधिक तक बनी रहती है, बशर्ते इन्हें सामान्य तापमान पर संग्रहित किया जाए।

परिपक्वता

यह वृक्ष लगभग 7 वर्षों में परिपक्व होता है।

फलियां

इसके फल (फलियां) नवंबर-दिसंबर में परिपक्व होते हैं। एक वयस्क वृक्ष से 300 से 500 फलियां प्राप्त हो सकती हैं।

उपज

सही देखभाल और प्रबंधन के साथ एक स्वस्थ वृक्ष से अच्छी उपज ली जा सकती है।

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