- वेस्ट यूपी में मचान के प्रति बढ़ रहा है किसानों का रुझान
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: बारिश के मौसम में कददुवर्गीय फसलों को बचाने के लिए किसान मचान विधि का प्रयोग कर फसल को बचाने के साथ-साथ दोगुना लाभ कमा सकते है। कृषि वैज्ञानिक किसानों को मचान विधि का प्रयोग करने के लिए लगातार जागरुक कर रहे है। ताकि किसान बारिश के मौसम में होने वाले नुकसान से बच सके।
बारिश के मौसम में गल जाती है पौध
बारिश के मौसम में करेला, तोरई, लौकी, खीरा आदि की फसल बारिश के चलते गल जाती है। जिस कारण किसान को नुकसान उठाना पड़ता है। अक्सर बारिश के मौसम में सब्जियों के दाम बढ़ जाते है, लेकिन पौध गल जाने के कारण किसान इसका फायदा नहीं उठा पाते।

इन सब से बचने के लिए किसान मचान विधि का प्रयोग कर सकता है। एक एकड़ में मचान विधि के प्रयोग से किसान छह माह में 80 हजार से एक लाख रुपये तक कमा सकता है। इससे किसान की आय बढने के साथ-साथ नुकसान कम होगा।
मचान बनाने के लिए क्या करे
मचान बनाने के लिए लोहे का तार, प्लास्टिक की रस्सी व खूंटे की आवश्यकता होती है। एक एकड़ की मचान 25 से 26 हजार में तैयार हो जाती है। एक बार जो सामान खरीदा जाता है। वह तीन साल तक प्रयोग किया जा सकता है। इस प्रकार प्रत्येक साल 20 हजार के लगभग का खर्चा आता है। कुशावाली गांव के किसान विनोद सैनी बताते हैं कि जब से इन्होने मचान के माध्यम से खेती की है, तब से उन्हे बहुत लाभ मिल रहा है। यह विधि किसानों के हित की है, और इसका प्रयोग करने से फसल खराब नहीं होगी और दाम भी अच्छा मिलेगा।
खेती करते समय यह रखे ध्यान
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के प्रधान वैज्ञानिक डा. रितेश शर्मा के अनुसार किसान यदि करेले की खेती करना चाहते हैं तो आलू के खेत जब खाली हो जाते है। उसमें अच्छी तरीके से जुताई करके खेत को लेवल करते है। तीन फीट की दूरी पर पौधे लगाएं और प्रत्येक छह फीट की दूरी पर लाइन की दूरी रखे।

इस प्रकार यह जब पौधे तीन से चार फीट के हो जाएं तब मचान बनाकर इसके उपर पौधों को चढ़ा दे। मचान बनाने में सब्जी खराब नहीं होती। बीमारी और कीड़ों को भी बड़े आसानी से उपचार कर सकते है और इसके अलावा शुरू के दो महीने में टमाटर और मिर्च जैसी फसल ले अतिरिक्त लाभ किसान प्राप्त कर सकता है।

