जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: 42 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर अपनी मांगों पर डटे किसान बृहस्पतिवार को केएमपी पर ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। सिंघु, टीकरी, गाजीपुर और पलवल से करीब 4500 हजार ट्रैक्टर मार्च के लिए किसानों के साथ रवाना होंगे। विरोध मार्च की तैयारियों में पूरे दिन सभी किसान संगठनों के साथ समूहों में बैठकों का दौर जारी रहा। 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड का किसान, इसे रिहर्सल बता रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा), पंजाब के प्रदेश महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा कि ट्रैक्टर मार्च के जरिये दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान सरकार के रवैये के खिलाफ अपना विरोध जताएंगे। करीब 2000 ट्रैक्टर सिंघु से टीकरी की तरफ जबकि टीकरी से करीब एक हजार ट्रैक्टर रवाना होंगे। बीच में एक जगह पर इकट्ठा होने के बाद केएमपी पर मार्च के लिए कूच करेंगे। इसी तरह गाजीपुर से पलवल से भी करीब 1500 ट्रैक्टर के साथ किसान, मार्च के लिए कूच करेंगे।
किसान नेता प्रेम सिंह का कहना है कि खराब मौसम के पूर्वानुमान की वजह से ट्रैक्टर मार्च एक दिन के बढ़ाया गया। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से भारी संख्या में ट्रैक्टर रवाना होंगे। 30 को हुई बातचीत में सरकार का रुख सकारात्मक दिखा तो किसानों की उम्मीदें जगी थीं। बाद में तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की बजाय इसे अच्छा बताया गया और दोबारा विचार करने की बात कही गई, किसानों के पास अच्छा है और आप सोच ले, कानूनों को रद्द करने के अलावा कोई बात नहीं हो सकती हैं।
किसान जागृति पखवाड़ा शुरू
सयुंक्त किसान मोर्चा के सदस्य दर्शन पाल ने बताया कि किसान जागृति पखवाड़ा बुधवार से पूरे देश में शुरू हो गया है। देश भर के किसान, मजदूर सहित जागरूक नागरिक इस मुहिम में शामिल होकर तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस करवाने और एमएसपी को कानूनी गारंटी की मांग को मजबूती दे रहे हैं।
आंदोलन अब देशव्यापी रूप ले चुका है
बिहार, ओडिशा, झारखंड में अलग अलग तरीके से किसान सरकार के किसान-मजदूर-गरीब विरोधी चेहरे को बेनकाब कर रहे हैं। राजस्थान के उतरी जिलों में टैक्टर मार्च निकाले गए जबकि आंदोलन में कर्नाटक के किसान भी भारी संख्या में हिस्सा ले रहे है। दिन प्रतिदिन किसान आंदोलन देशव्यापी और जनव्यापी रूप ले रहा है। सरकार इस आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। गुजरात के किसान नेता जेके पटेल की गिरफ्तारी कीसयुंक्त किसान मोर्चा कड़ी निंदा करता है।
किसानों को घर छोड़े 40 से ज्यादा दिन हो गए हैं जबकि 70 से अधिक किसानों की इस दौरान मौतें हो चुकी हैं। दुनिया भर के राजनैतिक और सामाजिक संगठनों का इस आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। मोदी सरकार के किसान विरोधी रवैये को देखते हुए किसानों ने 26 जनवरी को दिल्ली में शांतिपूर्ण किसान गणतंत्र परेड की घोषणा की।

