Saturday, February 21, 2026
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पिता-पुत्र की जोड़ी निकली स्टांप रिफंड घोटाले की मास्टर माइंड!

  • स्टांप वेंडर ने ही खुद को कंपनी का मालिक दर्शाते हुए बैंक में अकाउंट खुलवाकर दिया 33 लाख हड़पने की घटना को अंजाम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एक फर्म के नाम से संपत्ति खरीदने के लिए खरीदे गए 36 लाख 76 हजार 400 रुपये के स्टांप की डुप्लीकेट कॉपी बनाकर कूटरचित कागजों के आधार पर ट्रेजरी से रिफंड लेने के मामले में मुकदमा दर्ज होने के साथ ही पांच महीने पुराने इस प्रकरण की परत खुलना शुरू हो गई है। इस पूरे मामले के मास्टर माइंड स्टांप वेंडर का काम करने वाले एक व्यक्ति और उसके दो पुत्रों ने मिलकर पूरी घटना को अंजाम दिया। इनके लाइसेंस निलंबन के साथ ही अब गिरफ्तारी तक की तलवार पिता-पुत्र की जोड़ी के सिर पर लटकी हुई है। वहीं, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अकाउंट खोलने के मामले में पंजाब एंड सिंध बैंक के अधिकारी भी जांच के घेरे में आ गए हैं।

इस संबंध में डीआईजी स्टांप ज्ञानेन्द्र कुमार की ओर से कुछ दिन पूर्व अभियोग एसएसपी के आदेश पर थाना सिविल लाइंस में दर्ज किया गया। जिसमें अवगत कराया गया कि उनके कार्यालय में एक नवंबर 2023 को एक प्रार्थना पत्र मैसर्स श्रीकृष्णा लैंडमार्क इंडिया प्रा.लि. की ओर से पवन कुमार अग्रवाल के नाम से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। जिसमें 36 लाख 76 हजार 400 रुपये के ई-स्टांप प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि उन्होंने कंपनी से यह ई स्टांप बैनामा कराने के लिए खरीदे थे, लेकिन सौदा कैसिंल हो गया। कंपनी की ओर से रिफंड की मांग की गई।

जिसके लिए सभी औपचारिकता पूरी कराते हुए 10 प्रतिशत की कटौती करते हुए 20 नवंबर को ई-स्टांप पत्र सत्यापित होने के आधार पर रिफंड की राशि पंजाब एंड सिंध बैंक में खोले गए खाते में कर दी गई। इस फर्जीवाड़े का पता तब चला, जब तीन सिंतबर 2022 में स्टांप खरीदने वाली कंपनी कृष्णा लैंडमार्क की ओर से करीब पांच महीने बाद 23 अप्रैल 2024 में स्टांप का प्रयोग करने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। तब यह बात सामने आई कि इन स्टांप का रिफंड लिया जा चुका है। जबकि उक्त मूल ई-स्टाम्प क्रेता के पास ही है।

डीआईजी स्टांप कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, उसके आधार पर पाया गया कि रिफंड के लिए प्रस्तुत किए गए स्टांप जिस स्टेशनरी पर प्रिंट किए गए, वह शुभम शर्मा के नाम से जारी हुई है। जबकि इसके एक पुत्र ने फर्जी रूप से खुद को मैसर्स श्री कृष्णा लैंडमार्क इंडिया प्रा.लि. कंपनी का मालिक दर्शाते हुए पंजाब एंड सिंध बैंक में खाता खुलवाया। जिसमें फर्जी कागजात के आधार पर 10 प्रतिशत कटौती के अनुसार ई-स्टाम्प 36 लाख 76 हजार 400 रुपये में से 33 लाख आठ हजार 760 रुपये प्राप्त की गई है।

जिसे तत्काल ही अपने खाते में भी ट्रांसफर करा लिया गया है। शुभम के दोनों पुत्र अजय कुमार और आकाश वशिष्ठ के नाम से भी ई-स्टांप वेंडर के लाइसेंस हैं, इन तीनों को निलंबित करते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। अब पुलिस तीनों पिता-पुत्र की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।

स्टांप से जुडेÞ दो अलग-अलग हैं प्रकरण

इन दिनों जनपद में स्टांप से जुड़े दो प्रकरण चल रहे हैं, जिनको लेकर कई बार भ्रम की स्थिति बन जाती है। दरअसल जिस मामले में तीन स्टांप वेंडर्स के लाइसेंस निलंबित करते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, वह मैसर्स श्री कृष्णा लैंडमार्क इंडिया प्रा.लि. कंपनी के नाम से जारी 36 लाख 76 हजार 400 रुपये के ई-स्टांप का फर्जी दस्तावेजों और अकाउंट के आधार पर रिफंड लेने का है। इसका मुकदमा सिविल लाइन थाने में दर्ज है। जबकि दूसरा प्रकरण तीन वर्ष की अवधि में 997 फर्जी स्टांप लगाकर सात करोड़ 31 लाख 45 हजार रुपये का चुना लगाने से संबंधित है।

जिसमें रजिस्ट्री कराने वाली तीन फर्म मैसर्स पर्व एसोसिएट, मैसर्स वेद एसोसिएट और मैसर्स वासु एसोसिएट से जुड़ा है। जिसके संबंध में भी थाना सिविल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इस मामले की गूंज शासन स्तर तक पहुंची हुई है, जिसमें कई अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। एक अधिवक्ता पर भी शिकंजा कसा गया है, जिसके माध्यम से दो-तीन को छोड़कर 997 में अधिकांश रजिस्ट्री कराई गई हैं।

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