Monday, March 23, 2026
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हॉस्पिटल को लेकर मौत का डर, आइसोलेशन को तरजीह

  • टेस्टिंग से बच रहे, लक्षणों के आधार पर करा रहे इलाज
  • एक साल में 1032601 से अधिक टेस्ट हुए थे
  • सिर्फ मई महीने में 140750 लोगों ने टेस्ट कराए

ज्ञान प्रकाश |

मेरठ: कोरोना की पहली लहर लोगों के मस्तिष्क में उतनी दहशत पैदा नहीं कर पाई जितनी कोरोना की दूसरी लहर ने एक अप्रैल से लेकर अब तक पैदा कर रखी है। पहली लहर के 12 महीनों में 1032601 लोगों ने कोरोना का टेस्ट कराया था और उसमें 21833 कोरोना पाजिटिव निकले थे। जब दूसरी लहर ने सुनामी की तरह कहर बरपाना शुरु किया और मौत का ग्राफ तेजी से बढ़ने लगा तो लोगों ने टेस्टिंग से मुंह चुराना शुरु कर दिया। ऐसा करने के पीछे उनकी मजबूरी थी क्योंकि कोरोना से शत प्रतिशत मौतें अस्पताल में भर्ती लोगों की हुई है। लोगों को इस बात का डर है कि अगर टेस्टिंग पाजिटिव आई तो अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा। इस कारण लोगों ने होम आइसोलेशन को तरजीह दी।

कोरोना की दूसरी लहर ने महामारी के संभावित खतरों से कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचा दिया। 15 अप्रैल के बाद कोरोना का रौद्र रुप देखकर हर कोई दहशत में आ गया। एक मई से मौतों के ग्राफ ने आम आदमी से लेकर स्वास्थ्य विभाग को बुरी तरह से डरा दिया था। मेडिकल कालेज से लेकर निजी अस्पतालों से रोज निकलने वाले शवों की संख्या ने सूरजकुंड श्मशान घाट से लेकर कब्रिस्तानों तक को हाउसफुल कर दिया था। हर किसी के मन में यह धारणा बन गई थी कि अस्पताल में भर्ती होने का मतलब मौत के करीब जाना है।

यही कारण रहा कि लोग टेस्टिंग से बचने लगे। वही लोग टेस्टिंग करा रहे थे जिनको लग रहा था कहीं वो कोरोना की चपेट में तो नहीं है। एक मई से लेकर 27 मई तक 140750 लोगों ने टेस्टिंग कराई जो 40 लाख की आबादी वाले जनपद के लिये न के बराबर है। अधिकांश लोगों ने खांसी, बुखार और सांस लेने की दिक्कत होने पर घर में रहकर इलाज कराना जरुरी समझा। वहीं जो लोग कोरोना पाजिटिव निकले उनमे अधिकांश लोगों ने होम आइसोलेशन को तरजीह दी और आक्सीजन तक लगवाई।

यह हालात तब बिगड़े जब अस्पतालों में इलाज के लिये बेडों का अकाल पड़ा और मौतों की तादाद बढ़ने लगी। यही कारण है कि एक अप्रैल को 190 लोग होम आइसोलेशन में रहकर इलाज करा रहे थे जो एक मई को 4021 तक आंकड़ा पहुंच गया था। बारह मई को 7306 लोग होम आइसोलेट थे। सबसे ज्यादा 18 मई को 7599 तक आंकड़ा घर में रहकर इलाज कराने वालों का पहुंच गया था। मई महीने में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कम टेस्टिंग कराई गई। एक सप्ताह तक 4500 से लेकर 5500 तक ही टेस्टिंग हुई।

प्यारेलाल शर्मा स्मारक जिला अस्पताल में टेस्टिंग के लिये अनवर हुसैन और उसके परिवार के दो सदस्यों का कहना था कि जिस तरह मौतें हो रही है उसको लेकर लिसाड़ीगेट थाना क्षेत्र के कई मोहल्ले के लोगों ने साफ कह दिया है कि अस्पताल में जाकर मरने से अच्छा है घर में रहकर इलाज कराओ। परिवार के पांच सदस्य पॉजिटिव निकले और सभी ने घर में रहकर इलाज कराया।

लोगों के मन में मौत का डर इसलिये भी था क्योंकि सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 265 मौतें सिर्फ मई महीने में हुई लेकिन गैरसरकारी आंकड़े मौतों की संख्या हजार से ज्यादा दर्शा रहे है। सोशल मीडिया हो या आप अचानक किसी से मिलते हैं तो उनके मुंह से किसी की मौत की खबर मिलनी अब आम बात हो गई है। इसी डर ने लोगों को अस्पताल की ओर जाने से रोक दिया, रही सही कसर प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण आक्सीजन की कमी से हुई तमाम मौतों ने पूरी कर दी।

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