- एक साथ दो माह के पैसे देते समय एंटी करप्शन विभाग की टीम ने दबोचा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सरकारी विभागों में किस हद तक भ्रष्टाचार की जड़े गहरा हो चुकी है, इसका एक और उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब एंटी करप्शन विभाग की टीम ने पूर्ति विभाग की एक महिला सप्लाई इंस्पेक्टर को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ दबोच लिया। बताया जा रहा है कि राशन डीलर के स्टॉक रजिस्टर के वेरिफिकेशन की एवज में पैसे की मांग की गई थी।
कचहरी पुल के पास हीरा लाल बिल्डिंग में जिलापूर्ति विभाग कार्यालय पर तैनात महिला इंस्पेक्टर तारावती शुक्रवार को एंटी करप्शन विभाग की टीम ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ दबोच लिया। बताया जा रहा है कि तारावती पिछले चार माह से लक्खीपुरा के राशन डीलर शाहिद से उसकी दुकान के स्टॉक रजिस्टर के वेरिफिकेशन के लिए पांच हजार रुपये प्रतिमाह की मांग कर रही थी। वहीं, पिछले दो माह से दुकान के रजिस्टर का वेरिफिकेशन नहीं हुआ था। शुक्रवार को सप्लाई इंस्पेक्टर तारावती ने शाहिद को दो माह के पैसे एक साथ देने के लिए आॅफिस बुलाया था।
इससे पहले ही पीड़ित राशन डीलर ने एंटी करप्शन विभाग में सप्लाई इंस्पेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी थी। इस दौरान जैसे ही शाहिद ने इंस्पेक्टर को 500-500 रुपये के 20 नोट दिए, उसी समय एंटी करप्शन विभाग की टीम ने उसे दबोच लिया। मौके पर ही महिला इंस्पेक्टर के हाथ धुलवाए गए तो वह गुलाबी हो गए। बताया जा रहा गिरफ्तार की गई महिला इंस्पेक्टर माधवपुरम सेक्टर तीन के राशन डीलरों पर काफी मेहरबान थी। एंटी करप्शन विभाग की टीम ने आरोपी महिला सप्लाई इंस्पेक्टर के खिलाफ लालकुर्ती थाने पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जिसके बाद पुलिस ने उसे जेल दिया।
पहले भी लगते रहे है पूर्ति इंस्पेक्टर पर वसूली के आरोप
आपूर्ति विभाग की इंस्पेक्टर तारावती पर पहले भी भ्रष्टाचार के आरोप लगते आए है। पिछले वर्ष संयुक्त व्यापार संघ के महामंत्री संजय जैन के सूरजकुंड स्थित पेट्रोल पंप पर विभाग द्वारा जांच की गई थी। जिसमें तारावती उस जांच टीम की प्रमुख थी। उस दौरान भी वहां पर लेन-देन के कारण ही विवाद होना सामने आया था। जिसमें व्यापार संघ के महामंत्री संजय जैन द्वारा अवैध रूप से पैसे की मांग का आरोप लगाया गया था। बावजूद इसके संयुक्त व्यापार संघ के महामंत्री पर ही मुकदमा दर्ज हो गया था। जबकि विभाग द्वारा इन आरोपो की कोई जांच या कार्रवाई नहीं करने से ही विभाग के आलाधिकारियों पर की सांठगांठ द्वारा भ्रष्टाचार को शह देने के आरोप लगते हैं।

