Saturday, March 14, 2026
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खादर में बाढ़ का कहर जारी, गांव पानी-पानी

  • जलस्तर में कमी, फिर भी सड़कों पर पानी, डिस्चार्ज घटकर 1 लाख 50 हजार हुआ, खराब होने लगी जलमग्न फसलें

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में हो रही आफत की बारिश खादर क्षेत्र में लगातार कहर बरपा रही है। गंगा किनारे बसे गांव के हस्तिनापुर-रामराज मार्ग भी पानी की चपेट में आ गया है। जिसके चलते आवागमन बंद हो गया। शनिवार को बिजनौर बैराज से चल रहा डिस्चार्ज घटकर 1 लाख 50 हजार क्यूसेक रह गया। हरिद्वार भीमगोड़ा बैराज से पानी का डिस्चार्ज 73 हजार क्यूसेक से होने के बाद भी गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।

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बिजनौर बैराज पर तैनात जेई पीयुष कुमार का कहना है कि शनिवार सुबह से गंगा के जलस्तर में लगातार कमी हो रही है। शनिवार सुबह 8 बजे बिजनौर बैराज से 1 लाख 67 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज चल रहा था। जो देर शाम को घटकर 1 लाख 45 हजार क्यूसेक रह गया। वहीं, हरिद्वार से डिस्चार्ज में लगातार कमी हो रही है। जिससे रविवार को गंगा जलस्तर में गिरावट की संभावना है।

गंगा के रौद्र रूप से सहमे ग्रामीण

खादर क्षेत्र में गंगा का कहर लगातार जारी है। संपर्क मार्गों के साथ गांवों की सड़कों पानी ओवरफ्लो होने से आवागमन बाधित हो गया है। लिहाजा इन गांवों में प्रशासन द्वारा नाव लगवा दी गई है। बाढ़ से घिरे सिरजेपुर, फतेहपुर प्रेम, दबखेड़ी, चमरोद आदि ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ भीषण रूप धारण करती जा रही है। खेत, घरों और सड़कों पर पानी बह रहा है और फसलें बर्बाद हो रही है।

छतों पर शरण ले रहे ग्रामीण

गंगा में लगातार बढ़ रहे जलस्तर के चलते बाढ़ का पानी घरों में घुस हो गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के भयभीत ग्रामीण सुरक्षा के लिए घरों की छतों पर शरण ले रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में घर छोड़कर भी नहीं जा सकते हैं। घरों में चोरी होने का खतरा है। जिसके चलते घरों की छतों को ही ग्रामीण सुरक्षित मान रहे हैं और उन पर शरण ले रहे हैं।

बीमारों को नहीं मिल पा रहा उचित इलाज

गांव में बाढ़ का पानी भरने से संक्रमित बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। अब पानी भरा होने के चलते अगर कोई ग्रामीण बीमार पड़ा तो समय पर इलाज भी नहीं मिल सकेगा। ग्रामीणों ने नाव की मांग उठाई। जिससे आपातकाल में बाढ़ से निकल कर जाया जा सके। सिरजेपुर में गर्भवती महिला उपचार का इंतजार करती रही, लेकिन पर्याप्त साधन न होने के कारण महिला के कई घंटे बाद राष्ट्रीय बाढ़ आपदा राहत की टीम मौके पर पहुंची और महिला को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर भेजा।

बांध टूटने से कई घरों में भरा पानी, कई को किया रेस्क्यू

मेरठ: शनिवार को एडीएम वित्त एवं राजस्व सूर्यकांत त्रिपाठी ने एसडीएम अखिलेश यादव व राजस्व टीम के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र ग्राम लतीफपुर, शिरजेपुर, हादीपुर गांवड़ी तथा कंकरखेड़ा का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि दो दिन पूर्व तहसील मवाना में फतेहपुर प्रेम गांव में स्थित गंगा के दाहिने किनारे का बांध टूट जाने के कारण जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

ग्राम लतीफपुर में लालू सिंह पुत्र पुन्नू सिंह व पप्पू सिंह पुत्र लालू सिंह के दो घरों तक एवं 10-15 घरों की बाउंड्री के अन्दर तक पानी पहुंच गया है। तथा जाने वाले सम्पर्क मार्ग पर जलभराव है। ग्राम कंकर खेड़ा में हरदास सिंह पुत्र सावल सिंह, हरनाम सिंह पुत्र मेहर सिंह, शीशपाल पुत्र अमर सिंह के घरों में पानी पहुंच गया है। उक्त लोगों को हस्तिनापुर स्थित शेल्टर होम में प्रतिस्थापित करने के लिए अनुरोध किया गया,

लेकिन लोगों ने जाने से मना कर दिया और पानी बढ़ने की स्थिति बनने पर शिफ्ट होने की बात कही। ग्राम लतीफपुर में ही सुरक्षित व ऊंचे स्थान पर गुरुद्वारा व स्कूल स्थित है, जहां पर रुकने की व्यवस्था है। ग्राम शिरजेपुर में सूचना प्राप्त होने पर तत्काल एसडीआरएफ की टीम भेजकर हरभजन सिंह पुत्र उजागर, सनकीत सिंह, कमलजीत कौर पत्नी सुणचैन सिंह, मनदीप कौर पत्नी हरजीत सिंह, हमनदीप कौर पुत्री सुणचैन सिंह, हर्षदीप सिंह, अमृत सिंह, जपनीत कौर

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एवं ग्राम हादीपुर गांवड़ी से सोनी पुत्री इन्द्राज, पारूल पुत्री विनोद, रितिका पुत्री बेदू, परी पत्नी सोनी बच्चों को भी एसडीआरएफ की टीम भेजकर सकुशल रेस्क्यू कर हस्तिनापुर में स्थित उनके अपने घरों में सुरक्षित पहुंचा दिया गया है। इस बीच बिजनौर बैराज में डिस्चार्ज 165219 क्यूसेक से घटकर शाम तक 149996 क्यूसैक हो गया है।

उफान पर आई हिंडन नदी, खेतों में भरा पानी

सरधना: पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर मैदानी क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है। लगातार बारिश के चलते जो हिंडन नदी अपने अस्तित्व के लिए तड़प रही थी। आज वही हिंडन उफान पर चल रही है। सरधना क्षेत्र की बात करें तो हिंडन नदी बपारसी, पिठलोकर, मुल्हैड़ा आदि गांव के जंगल से होकर गुजर रही है। वैसे तो हिंडन दशकों से अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ रही है।

मगर पिछले कुछ समय से लगातार हो रही बारिश के कारण कारण हिंडन नदी भी उफान पर आ रही है। हिंडन का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में हालत यह है कि हिंडन से पानी आसपास गांव के जंगलों में भरने लगा है। सैकड़ों किसानों के हजारों बीघा खेतों में पानी भर चुका है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण यहां बाढ़ जैसे हालत होने की आशंका बनी हुई है। वहीं आबादी में पानी भरने का खतरा मंडरा रहा है।

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हिंडन नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण आसपास गांव के लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। वहीं अधिकारी भी मामले पर पूरी तरह नजर बनाए हुए हैं। संबंधित हल्का लेखपालों को ध्यान रखने के लिए कहा गया है। नायब तहसीलदार राहुल सिंह का कहना है कि हिंडन नदी में जलस्तर बढ़ रहा है। मगर हालात अभी पूरी तरह नियंत्रण में हैं। बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। फिर भी हालात पर पूरी तरह नजर बना रखी है।

बाढ़ और वज्रपात से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी

मेरठ: जिला आपदा प्राधिकरण की बैठक में बाढ़ और वज्रपात से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की गई। जिसमें पहले से ही ऊंचे स्थानों को चिन्हित करके खाद्य सामग्री के साथ अपनी पहचान के समस्त अभिलेखों को सुरक्षित करके अपने पास रखने को कहा गया है।

अपर जिलाधिकारी वित्त सूर्यकान्त त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान वर्ष 2023-24 में जनपद मेरठ में अत्यधिक वर्षा एवं बाढ की स्थिति उत्पन्न होने के दृष्टिगत जिलाधिकारी दीपक मीणा एवं उनकी अध्यक्षता में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें मेरठ में तैनात जिला आपदा विशेषज्ञ दीपक कुमार ने बताया कि बाढ़ अत्यधिक वर्षा, बादल फटने, बांध टूटने, वनों की कटाई एवं नदी की धारा में परिवर्तन जैसे कारण से आती है।

यदि बाढ़ की आशंका से अपना स्थायी स्थान छोड़ना पड़े, तो बिजली के मेन स्विच और गैस वाल्व को तुरंत बंद कर दें। बिजली के उपकरणों को हटाकर अलग रख दें। एवं जरूरी चीजों को किसी ऊपरी जगह पर रख दें। उन्होंने एडवाइज किया कि बाढ़ से बचाव के लिए बाढ़ से पूर्व, ऊंचे स्थानों को पहले से चिन्हित करें। जरूरी कागजात जैसे राशन कार्ड, पासबुक मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड इत्यादि को वाटरप्रूफ बैग में इकट्ठा रखें।

आवश्यकतानुसार खाद्य सामग्री जैसे बिस्किट, लाई, चना, गुड़, नमक, चीनी, सत्तू इत्यादि एकत्र करें, बीमारी से बचाव के लिए क्लोरीन, ओआरएस तथा आवश्यक दवाई प्राथमिक उपचार किट में रखें। जैरी कैन, छाता, त्रिपाल, रस्सी, हवा से भरी ट्यूब प्राथमिक उपचार किट, मोबाइल व चार्जर, बैटरी चालित रेडियो, टॉर्च, इमरजेंसी लाइट, माचिस इत्यादि पहले से तैयार रखें। सूखे अनाज व मवेशियों के चारे को किसी ऊंचे स्थान पर सुरक्षित रखें। एवं पशुओं में होने वाली बीमारी की रोकथाम के लिए पशुओं का समय से टीकाकरण कराएं।

बाढ़ के दौरान, बाढ़ की चेतावनी मिलते ही गर्भवती महिलाओं, बच्चों, वृद्ध, दिव्यांग जनों एवं बीमार व्यक्ति की तुरंत सुरक्षित ऊंचे स्थान पर पहुंचाएं। शौचालय सीट को बालू से भरी बोरी से ढक दें। उबला हुआ या क्लोरीन युक्त पानी का उपयोग करें, बिजली के तार व ट्रांसफार्मर से दूर रहें। डंड़े से पानी की गहराई की जांच करें, गहराई पता न होने पर उसे पार करने की कोशिश न करें। विषैले प्राणियों जैसे सांप, बिच्छू आदि से सतर्क रहें। सांप काटने पर पीडित व्यक्ति को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र लें जाएं।

गर्भवती महिलाओं के लिए आशा एवं एएनएम की मदद से सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था करें। बाढ़ में डूबे हैंडपम्प के पानी और बाढ़ के पानी के संपर्क से आई खाद्य सामग्रियों का सेवन न करें। क्षमता से अधिक लोग नाव पर न बैठें। लाइफ जैकेट जरूर पहनें, बच्चों को पानी में न खेलने दें। बाढ़ के बाद बाढ़ से क्षतिग्रस्त घटों एवं संरचनाओं में प्रवेश न करें। क्षतिग्रस्त बिजली के उपकरणों का प्रयोग न करें। क्षतिग्रस्त पुल या पुलिया को पार करने की कोशिश न करें। मरे हुए पशुओं एवं गलबों को एक जगह एकत्र कर जमीन में दबाएं। डेंगू-मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें।

उमस का प्रकोप बनने के कारण हो रही बारिश

मोदीपुरम: मौसम में लगातार उमस का बरकरार रहना बारिश के संकेत दे रहा है। शनिवार सुबह उमस बढ़ने के कारण तेज बारिश आ गई। हालांकि आधा घंटे की बारिश ने जगह-जगह जलभराव जरूर कर दिया, लेकिन यह बारिश गर्मी से लोगों को निजात नहीं दिला पा रही है। बारिश अधिक होने के बाद भी उमस का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है।

ऐसे में लोगों को गर्मी का रुख अधिक होने से परेशानी हो रही है। लोग इस गर्मी से बचने के लिए एसी और कूलर का सहारा ले रहे हैं। जिसके चलते लोग अपनी परेशानी को कम करते हुए नजर आ रहे हैं। मौसम विशेषज्ञ डा. यूपी शाही के अनुसार अगर मौसम में उमस का प्रकोप बढ़ेगा तो निश्चित ही बारिश के संकेत बनेंगे।

हालांकि अभी अगले 24 घंटे फिर से मौसम में बारिश होने की संभावना है। इस बार बारिश तेज होगी। लगातार बारिश होने के कारण लोगों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है। ऐसे में लोग अब बारिश से निजात मांग रहे हैं। जहां इस बारिश ने ज्वार, गन्ना और धान की फसल को लाभ पहुंचाया है। वहीं, बेल वाली फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

बेल की खेती करने वाले किसानों के चेहरों पर सिकन महसूस दिखाई दे रही है। हालांकि अगले 24 घंटे फिर से बारिश के लिए अहम बताए गए हैं। राजकीय मौसम वैधशाला पर शनिवार को दिन का अधिकतम तापमान 32.1 डिग्री एवं न्यूनतम तापमान 25.0 डिग्री सेल्स्यिस दर्ज किया गया। अधिकतम आर्द्रता 94 एवं न्यूनतम आर्द्र्रता 76 प्रतिशत दर्ज की गई। बारिश 6.3 मिमी दर्ज की गई है।

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