- सजावट के लिए फूलों की डिमांड बढ़ने से कीमत में भारी उछाल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेट्रो सिटी में शुमार हो चुके शहर में लोग फूलों की सजावट में लाखों रुपये न्योछावर कर रहे हैं। शादी के सीजन के आगाज के साथ ही फूलों के डेकोरेशन का बाजार भी महक उठा है। फूलों के रेट में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। राजधानी दिल्ली की तरह मेरठ के फार्म हाउसों में फूलों की भव्य सजावट हो रही है।
हालांकि मध्यमवर्गीय लोग दिखावटी फूलों की सजावट से संतोष कर रहे हैं। बड़े-बड़े फार्म हाउसों में सजावट करने वाले अभिषेक ने बताया कि मुख्यद्वार, गैलरी और स्टेज की सजावट में कट फ्लावर डेकोरेशन का चलन जोरों पर है। इसमें विदेशी के साथ देशी फूलों का प्रयोग किया जा रहा है।
विदेशी फूलों में आर्किड, एंथोनियम, जरबेरा, ग्लाइडोअस और देशी फूलों में रजनीगंधा, गुलाब और गेंदा का प्रयोग किया जा रहा है। द्वार पर बुके और गैलरी में रंगीन चुनरी के साथ फूलों की डेकोरशन हो रही है। अधिकतर लोग स्टेज की सजावट में फूलों के अधिक प्रयोग पर जोर देते हैं।
इनमें रजनीगंधा और गुलाब की झालर और विदेशी फूलों की बुके का प्रयोग होता है। इस तरह की सजावट कम से कम 40 हजार रुपये में हो रही है। मंडप एसोसिएशन के विपुल ने बताया कि बाइपास स्थित फार्म हाउसों में होने वाली सजावट पर एक से दो लाख रुपये तक खर्च हो रहे हैं।
वहीं बैंक्वेट हॉल और गाड़ी की सजावट के लिए फूलों की प्री-बुकिंग भी चल रही है। इनकी मांग में बढ़ोत्तरी होने के साथ ही कीमत में भी उछाल आ गया है। सजावट के लिए गेंदा और गुलाब के फूलों का प्रयोग सबसे ज्यादा किया जा रहा है। इन फूलों की खपत भी दोगुनी हो गई है।
जहां गुलाब का फूल 250 से 300 रुपये किलो तक बिक रहा था, अब गुलाब के रेट बढ़कर 600 रुपये किलो हो गए हैं। वहीं, गेंदा के फूल 120 रुपये किलो की कीमत पर बेचा जा रहा है।
नूरनगर से देशी और दिल्ली से आ रहे विदेशी फूल
शहर का नूरनगर इलाका देशी फूलों की सप्लाई का प्रमुख केंद्र है। शास्त्रीनगर स्थित मंडप के संचालक बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि नूर नगर के अलावा सरधना, मवाना और लावड़ से गेंदा, ग्लाइडोअस, गुलाब व रजनीगंधा आ रहा है, जबकि कोलकाता के गेंदा और ग्लाइडोअस की मांग जबरदस्त है। कारनेशन, आर्किड व जरबेरा दिल्ली से मंगाए जा रहे हैं। आर्किड का एक पैकेट दो सौ रुपये और जरबेरा का 70 से 75 रुपये का है।
ये हैं खास
शादियों में गेंदा, ग्लाइडस, गुलाब, रजनीगंधा, गुलादाउदी, जरबेरा, लिली फूलों का विशेश् मांग होती है। इसके अतिरिक्त विदेशी फूलों में आॅर्किड की भी अच्छी खासी डिमांड है। जिनका गुलदस्तों के रूपे में प्रयोग किया जा रहा है। फिलहाल मिक्स फूलों के गुलदस्ते की शुरुआत 150 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक है।
अब भी कीमत बढ़ने के आसार
फूल विक्रेता अभिषेक ने बताया कि अभी शदियों का मौसम चल रहा है। इसके साथ ही फूलों की खपत बढ़ी है, जिससे कीमत में उछाल आई है। फूलों की खपत पहले से दोगुनी हो गई है। पहले जहां एक कुंतल की खपत होती थी, अब वह बढ़कर दो से तीन कुंतल तक पहुंच गई है। इसमें सभी किस्मों के फूल शामिल हैं। आने वाले दिनों में मांग बढ़ने से फूलों की कीमत में और उछाल आने की संभावना है।
महंगी हुई जयमाला
फूलों के दामों में बढ़ोतरी का असर जयमाला पर भी पड़ा है। बेस्ट फ्लावर डेकोरेशन के रिंकू ने बताया कि गुलाब के फूल जो 150 रुपये किलो चल रहे थे अब 600 रुपये किलो हो गए हैं। जयमाला का जोड़ा एक हजार रुपये से आरंभ हो कर पांच हजार रुपये तक का है।
दुर्लभ हुआ कोलकाता का गेंदा
बीते दिनों हुई बरसात के कारण कोलकाता का गेंदा मंडी में नहीं आ रहा है। सजावट के लिए कोलकाता के मोटा गेंदा फूल की जबरदस्त मांग है।
रेडीमेड शगुन फैब्रिक पैक की डिमांड
मिठाइयों के साथ शगुन में दिए जाने वाले कपड़े भी आकर्षक पैकिंग में उपलब्ध हैं। फूलों के साथ इनके गिफ्ट पैक तैयार किए जा रहे हैं। भारती फ्लोरा के संचालक ने बताया कि यह गिफ्ट पैक 150 से एक हजार रुपये कीमत तक के हैं।
कंपलीट पैकेज का बढ़ा चलन
बाईपास और दिल्ली रोड स्थित होटलों और फार्म हाउस अपने ग्राहक को खानपान के साथ सजावट का पैकेज दे रहे हैं। इन जगह 12 से 15 लाख रुपये में साज-सज्जा के साथ डिनर सर्व किया जा रहा है।
विवाह भवन भी महंगे
अभिषेक फूल विक्रेता का कहना है कि शादी के सीदजनव में विवाह भवन, बैंक्वेट हॉल तैयार हो गए हैं। कोरोना संक्रमण के कारण बीते दो साल की मंदी के बाद इस बार बैंक्वेट हॉल की बुकिंग फुल हो चुकी है। शादी की बढ़ती मांग का असर विवाह भवनों की बुकिंग पर भी पड़ा है।
फूलों का बिजनेस कर रहे अभिषेक ने बताया कि शादियों का सीजन चल रहा है। ऐसे में लोग इतने महंगे फूल खरीदने के लिए मजबूर हैं। मार्केट में सिर्फ 30 प्रतिशत फूल ही आ रहे हैं। अधिक कीमत होने के कारण लोग कम मात्रा में फूल खरीद रहे हैं। मौजूदा स्थिति के कारण हमें भी बड़ा नुकसान हो रहा है।

