जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय लखनऊ पर आज वरिष्ठ समाजवादी नेता, पूर्व सांसद मोहन सिंह जी की 9वीं पुण्यतिथि मनायी गयी। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वर्गीय मोहन सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर अपने सम्बोधन में अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी आन्दोलन को आगे बढ़ाने में मोहन सिंह ने सक्रिय योगदान किया था। उनके योगदान को नहीं भुलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाजवाद ही सभी समस्याओं के समाधान का रास्ता है। समाजवादी सिद्धांतों के जरिए ही सभी वर्गों में खुशहाली और सम्पन्नता लायी जा सकती है।
यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने समाज में नफरत पैदा किया है।
भाजपा लोगों को लड़ाने का काम करती है। भाजपा राज में आम जनता की कोई सुनवाई नहीं है। गरीब और निर्दोषों को परेशान किया जा रहा है। पुलिस हिरासत में हत्याएं हो रही हैं। देश में पुलिस हिरासत में सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में हो रही है। महिलाओं के साथ लगातार अपराध बढ़ रहे हैं। बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घिनौनी घटनाएं हो रही है। बच्चियों पर जुल्म की इंतिहा हो गयी है। भाजपा सरकार समानता के खिलाफ है। इस सरकार में गरीब और गरीब होता जा रहा है।

यादव ने कहा कि भाजपा सरकार विद्वेष की भावना से काम करती है। भाजपा ने पांच साल की सरकार में विकास का कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया। भाजपा सरकार ने समाजवादी पार्टी की सरकार में हुए विकासकार्यों को बर्बाद कर दिया और जो विकास परियोजनाएं और निर्माण कार्य चल रहे थे उन कार्यों को भी बंद करा दिया है। जेपीएनआईसी (जयप्रकाश नारायण केन्द्र) को उजाड़ दिया गया। गोमती रिवरफ्रंट को तहस-नहस कर दिया गया। गोमती रिवरफ्रंट को पूरा नहीं किया गया। एशिया के सबसे बड़े जनेश्वर मिश्र पार्क को भी बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया गया है।
इस अवसर पर स्वर्गीय मोहन सिंह जी के परिवार से उनके दामाद टी.एन. सिंह, नाती प्रशांत कुमार सिंह सहित राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष श्री नरेश उत्तम पटेल अरविन्द कुमार सिंह एवं संजय लाठर के अतिरिक्त गजाला लारी पूर्व विधायक एवं रमेश प्रजापति, विकास यादव, धर्मवीर डबास, लल्लन यादव, डिलीप डे, मनीष सिंह, इकबाल खां, श्रीराम यादव, जगदीश यादव, प्रभात सिंह पटेल, रवि अग्रवाल, दिलीप गुप्ता, मनोज यादव, अज्जू इश्हाक आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

