- द सैनिक सहकारी आवास समिति के क्लर्क ने बांटा नकद वेतन, जांच की मांग
- चार लाख नकद भुगतान देने के लिए कहां से आया पैसा
- शिकायतकर्ता ने दर्ज कराई आपत्ति, जांच की मांग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: घोटालों की खान द सैनिक सहकारी आवास समिति में एक और विवादित घटना सामनें आई है। समिति के क्लर्क ने बिना किसी अधिकार के कर्मचारियों को चार लाख नकद वेतन का भुगतान कर दिया। अब कॉलोनी में ही रहने वाले शिकायतकर्ता ने इतनी रकम कैश देने पर सवाल उठाए है।
मवाना रोेड स्थित डिफेंस कॉलोनी की द सैनिक सहकारी आवास समिति का विवादों से चोली-दामन का रिश्ता प्रतीत हो रहा है। पहले से ही एनओसी के नाम पर करोड़ों की वसूली के आरोप लगने के बाद प्रबंध कमेटी भंग चल रही है।
समिति के दस्तावेजों को भी नष्ट करने के आरोप लग चुके हैं, साथ ही कर्मचारियों का वेतन नहीं दिए जाने की शिकायतें शासन स्तर तक हो चुकी है। इसको लेकर मंगलवार का गाजियाबाद से आवास अधिकारी स्वामीदीन जांच करने मेरठ पहुंचे थे, लेकिन उनके सामने समिति का पिछला रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया।
समिति के कर्मचारियों व बाबू ने रिकॉर्ड जलकर नष्ट होने का तर्क दिया था। वहीं, पिछले चार माह से समिति के कर्मचारियों जिनमें चौकीदार, माली, पंपमैन समेत सफाईकर्मी भी शामिल है, उनका वेतन नहीं मिला था। जांच करने पहुंचे अधिकारी के सामने ही कर्मचारियों को नकद वेतन देने पर सहमति बनी।
बुधवार को क्लर्क सलमान ने इन कर्मचारियोंं को चार लाख रुपये का नकद भुगतान कर दिया। इस पर शिकायतकर्ता राजेश त्यागी ने आपत्ति उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि क्लर्क सलमान के पास कहां से आई। कौन है जो इस राशि को फाइनेंस कर रहा है। इस राशि को बांटने का अधिकार क्लर्क को किसने दिया। इन सभी सवालों को उठाते हुए राजेश त्यागी ने समिति के फंड की जांच करानें की मांग की है।
साथ ही कहा कि पिछले एक साल से पेंडिंग चल रहा स्पेशल आॅडिट अब तक क्यों नहीं हुआ है। जबकि इसको लेकर उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा हाउसिंग कमिश्नर के आदेशों को भी दरकिनार किया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर भविष्य में समिति में कोई फ्राड या धांधलेबाजी होती है तो उसके लिए आवास आयुक्त व विभाग जिम्मेदार होंगे।

