- मेरठ और सहारनपुर मंडल में जाट लैंड में केपी के सहारे जाटों को साधने का भाजपा ने चला तीर
- एक तीर से दो जनपदों में जाटों के बीच दिया बड़ा संदेश
- बागपत व शामली के खाते में गिना जाएगा तोहफा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पश्चिमी यूपी के जाटों की नाराजगी को दूर करने की कोशिश हुई या फिर 2024 को देखते हुए जाट लैंड में चार जाटों को मंत्री बना दिया गया। एक तीर से कई निशाने साधने की भाजपा हाईकमान ने कोशिश की। केपी मलिक को राज्यमंत्री बनाकर गढ़वाला खाप में सेंध लगाने की कोशिश हुई। क्योंकि गढ़वाला खाप बड़ी खाप हैं।
बालियान और गढ़वाला खाप के बीच किसान आंदोलन के बीच भी तकरार हो गई थी। ऐसे में पश्चिमी यूपी के नाराज जाटों को साधने का भी इसमें काम हुआ हैं। योगी आदित्यनाथ के मंत्रीमंडल में दो कैबिनेट मंत्री जाट बना दिये गए, जिसमें भूपेन्द्र चौधरी और लक्ष्मीनारायण चौधरी शामिल हैं। दोनों का बड़ा कद हैं। दो राज्यमंत्री केपी मलिक और बलदेव सिंह ओलख शामिल हैं। इस तरह से योगी मंत्रीमंडल में चार जाटों को जगह दी गई हैं।

किसान आंदोलन का सबसे अधिक असर उत्तर प्रदेश में वेस्ट यूपी में रहा था। मेरठ, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बुलंदशहर आदि जनपदों में अधिक असर देखने को मिलता था। विधानसभा चुनाव के समय भी यही अंदाजा लगाया जा रहा था कि भाजपा कम सीटें लेकर आएगी, लेकिन परिणाम विपरीत आए। प्रथम चरण में भाजपा को 45 सीटें मिली थी। भाजपा के परिणाम से सपा-रालोद को बड़ा झटका लगा था। मेरठ, शामली व मुजफ्फरनगर, बिजनौर जनपद में जरूर भाजपा को नुकसान हुआ है।
मुजफ्फरनगर में दो सीटें जीती, मेरठ में तीन सीटें और बागपत में दो सीटें जीत सके। इस तरह से शामली में भाजपा का खाता भी नहीं खुला। गन्ना मंत्री सुरेश राणा तक हार गए थे। मेरठ के सरधना से संगीत सोम तक हार गए थे, परंतु बागपत जनपद में किसान आंदोलन के असर के बाद भी यहां भाजपा 2017 के परिणाम को दोहराने में कामयाब रही। बड़ौत से विधायक केपी मलिक और बागपत से विधायक योगेश धामा विजयी रहे थे। रालोद को महज छपरौली से ही संतोष करना पड़ा है।
देखा जाए तो आसपास के जनपदों में जाट चेहरे के रूप में तीन विजयी होकर आए हैं। मोदीनगर से मंजू सिवाच, बड़ौत से केपी मलिक, बागपत से योगेश धामा विजयी हुए थे। इनमें योगेश धामा को नाम आगे चल रहा था, लेकिन जब भाजपा की सूची जारी हुई तो उसमें केपी मलिक बाजी मार गए। या यूं कहें कि भाजपा ने यहां बड़ा उलटफेर करते हुए जाट चेहरे के रूप में केपी मलिक को मंत्री बनाकर तोहफा दिया है।
मलिक खाप को रिझाने के साथ-साथ जाट लैंड में एक बड़ा संदेश भाजपा ने केपी मलिक के माध्यम से देने की कोशिश की। केपी मलिक कभी चौधरी अजित सिंह के करीबी माने जाते थे, लेकिन वर्तमान में भाजपा के कर्मठा नेता हैं। दूसरी बार बड़ौत से विधायक बने हैं। बड़ौत से उनकी पत्नी व खुद भी चेयरमैन रह चुके है तथा एक बार रालोद के कोटे से एमएलसी भी रह चुके हैं। भूपेन्द्र चौधरी मूल रूप से मुरादाबाद के रहने वाले हैं, जबकि लक्ष्मीनारायण चौधरी आगरा से हैं। वैसे लक्ष्मीनारायण चौधरी का मेरठ से रिश्ता हैं। पूर्व एमएलसी चौ. जगत सिंह और लक्ष्मीनारायण आपस में समधी भी हैं। इस वजह से भी मेरठ में भी उनका हस्तक्षेप रहता हैं। दो जाट नेताओं का कैबिनेट मंत्री बनाया जाना अपने आप में महत्वपूर्ण हैं।

