Wednesday, March 11, 2026
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Ganesh Chaturthi 2025: पहले दिन से अनंत चतुर्दशी तक, ऐसे मनता है गणेश महोत्सव, जानें महत्व और भोग

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। गणेश चतुर्थी का त्योहार पूरे भारत में बहुत श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था। भक्तगण उन्हें विघ्नहर्ता मानते हैं, यानी हर प्रकार की बाधा को दूर करने वाले। इन्हें गजानन, एकदंत, वक्रतुंड, सिद्धि विनायक जैसे कई नामों से जाना जाता है।

बप्पा का आगमन भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होता है। इस बार गणेश चतुर्थी 27 अगस्त 2025 को मनाई गई और 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के साथ इसका समापन होगा। यह दस दिवसीय पर्व खास तौर पर महाराष्ट्र में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। भक्त गणपति को घर लाते हैं और इन दस दिनों में उनकी पूजा-अर्चना कर उनसे सुख, शांति व सफलता की कामना करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इन दस दिनों का महत्व और प्रत्येक दिन लगाए जाने वाले भोग के बारे में।

पहला दिन: गणेश चतुर्थी

मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती को पुत्र स्वरूप श्री गणेश की प्राप्ति हुई थी। इसलिए इस दिन भक्त गणेश जी की प्रतिमा घर में स्थापित करते हैं और उनका षोडशोपचार पूजन करते हैं। इस दिन उनके प्रिय मोदक, लड्डू और पुरणपोली का भोग लगाया जाता हैं।

दूसरा और तीसरा दिन

इन दोनों दिनों में प्रतिमा की विधिवत पूजा की जाती है। इस दिन भगवान गणेश को फूल, फल और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। आमतौर पर इस समय खिचड़ी, गुड़-नारियल से बने मिठाई और व्यंजन भोग में शामिल होते हैं।

चौथा और पांचवां दिन

इन दिनों में गणेश जी के जन्म और उनके विघ्नहर्ता स्वरूप की कथाएं सुनी जाती हैं। इस दिन भक्त सामूहिक प्रार्थना कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। भोग के लिए इन दो दिनों में रवा लड्डू और चना-नारियल के स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं।

छठा दिन

इसे “राजन गणपति” पूजा भी कहा जाता है। इस दिन लोग मिलकर गणपति की विशेष आराधना करते हैं। इस अवसर पर पारंपरिक भोज का आयोजन होता है। इसमें थालीपीठ, वड़ा पाव, नारियल की बर्फी और बेसन लड्डू जैसे व्यंजन शामिल होते हैं।

सातवां और आठवां दिन

इन दिनों से गणपति विसर्जन की तैयारी शुरू हो जाती है। भक्त भजन-कीर्तन करते हैं और भोग के लिए विभिन्न प्रकार की बर्फी व लड्डू तैयार करते हैं।

नौवां दिन अनंत चतुर्दशी

यह गणेश उत्सव का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन प्रतिमा का विसर्जन शोभायात्रा के साथ किया जाता है, जिसे भगवान के कैलाश पर्वत लौटने का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भोग में मोदक, श्रीखंड, मोतीचूर लड्डू आदि बनाए जाते हैं।

दसवां दिन

विसर्जन के बाद भक्त एकत्र होकर भगवान का आभार व्यक्त करते हैं और पूजा कर पारंपरिक भोजन जैसे पिठला भाकरी, पुरणपोली, वड़े और मिठाइयों का आनंद लेते हैं।

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