- नीर फाउंडेशन ने कराया पानी का परीक्षण, मिले चौंकाने वाले तत्व
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गंगानगर में स्थित गर्म पानी के जल स्रोत का पानी पीने लायक नहीं हैं। यदि गलत से भी आपने ये पानी पिया तो पेट के रोग हो सकते हैं। किडनी को भी खतरा पैदा हो सकता हैं। पानी का नीर फाउंडेशन ने परीक्षण कराया। जिसमें ये तथ्य सामने आये हैं। यह परीक्षण रजपुरा में स्थापित भारत सरकार से प्रमाणित प्रयोगशाला नियोन इंडस्ट्रियल टेस्टिंग रिसर्च लैबोरेटरी में कराया गया।
इसके पानी का नमूना गत दो सितम्बर को लिया गया था। इस पानी में सभी 29 पैरामीटर का परीक्षण किया गया है। शनिवार को प्रयोगशाला ने पानी की जांच के परिणाम जारी किए हैं। गौरतलब है कि यह बोरिंग तत्कालीन भारत सरकार के जल संसाधन मंत्री सोमपाल शास्त्री ने कराया था।
प्रयोगशाला की क्वालिटी मैनेजर आंचल वत्स के अनुसार इस बोरवेल के पानी में टीडीएस 4102 मिलीग्राम प्रति लीटर है, जोकि भारत सरकार के मानकों के अनुसार पेयजल 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। पानी में हार्डनेस की मात्रा 719 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है, जोकि 200 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
पानी में कैल्शियम की मात्रा 114 मिलीग्राम प्रति लीटर मिली है, जोकि 75 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। पानी में क्लोराइड की मात्रा 2823 मिलीग्राम प्रति लीटर मिली है, जिसकी मात्रा 250 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। पानी में आयरन की मात्रा 2.17 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है।
जबकि यह 0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। पानी में बोरोन की मात्रा भी सामान्य से अधिक 0.8 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है। इस नमूने में बेरियम की मात्रा भी 1.7 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है। इस पानी में सबसे अधिक चौकाने वाली धातु सिलिकॉन का पाया जाना है।
इसमें सिलिकॉन की मात्रा 8.04 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है, जबकि भारत सरकार ने इसका मानक तय नहीं किया गया है। धरती पर आॅक्सीजन के बाद बहुतायत में पाया जाने वाला दूसरा तत्व सिलिकॉन है। पूथ्वी की परतों में इसकी मात्रा करीब 26 प्रतिशत है। सिलिकॉन रेत और पत्थर के रूप में पाया जाता है। पानी में सिलिकॉन का होना पेड़-पौधों के लिए बहुत उपयोगी है।
इस पानी में स्टरोन्टियम की मात्रा भी 3.3 मिलीग्राम प्रतिग्राम पाया गया है, जबकि पानी में इसकी मात्रा का मानक भी तय नहीं है। पानी में स्टरोन्टियम की मात्रा से झारीयता बढ़ती है, लेकिन अगर अधिक झारीयता होती है तो यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। नदीपुत्र रमन कांत के अनुसार भूगर्भ की संरचना में बहुत प्रकार की चट्टाने होती हैं और ये चट्टानें आपस में क्रियाएं करती रहती हैं।
इस बोरिंग से गर्म पानी निकलने के पीछे की वजह भी परीक्षण के दौरान सामने आई है। पानी में नीचे के फ्रैक्चर के एक्टीवेट होने के कारण पानी गर्म होने लगता है। इसका तापमान 31 डिग्री सेल्सियस है, जोकि सामान्य से अधिक है। परीक्षण के परीणामों से यह स्पष्ट है कि यह पानी पीने के उपयोग में नहीं लाया जा सकता है क्योंकि इस पानी को पीने ये जहां पथरी, बाल झड़ना, पेट खराब होना व शारीरिक कमजोरी जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं। नहाने व पौधों आदि के लिए यह पानी इस्तेमाल किया जा सकता है।
ये होना चाहिए मानक
पानी में टीडीएस 4102 मिलीग्राम प्रति लीटर है, जोकि भारत सरकार के मानकों के अनुसार पेयजल 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। पानी में हार्डनेस की मात्रा 719 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है, जोकि 200 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
पानी में कैल्शियम की मात्रा 114 मिलीग्राम प्रति लीटर मिली है, जोकि 75 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। पानी में क्लोराइड की मात्रा 2823 मिलीग्राम प्रति लीटर मिली है, जिसकी मात्रा 250 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
पानी में आयरन की मात्रा 2.17 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है जबकि यह 0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। पानी में बोरोन की मात्रा भी सामान्य से अधिक 0.8 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है। इस नमूने में बेरियम की मात्रा भी 1.7 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है।

